एमबीएस में अनूठी सर्जरी: मांसपेशियों को सुन्न किए बिना दिमाग की सर्जरी

Patrika news network Posted: 2017-04-11 10:06:58 IST Updated: 2017-04-11 10:06:58 IST
एमबीएस में अनूठी सर्जरी: मांसपेशियों को सुन्न किए बिना दिमाग की सर्जरी
  • एमबीएस अस्पताल में मांसपेशियों को सुन्न किए बिना दिमाग से गांठ निकालने की रिस्की ओपन सर्जरी न्यूरोसर्जरी और एनेस्थिसिया विभाग के डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक कर दिखाया।

कोटा.

बिना मांसपेशियां सुन्न किए डाली कृत्रिम श्वांसनली


एमबीएस अस्पताल में मांसपेशियों को सुन्न किए बिना दिमाग से गांठ निकालने की रिस्की ओपन सर्जरी  न्यूरोसर्जरी और एनेस्थिसिया विभाग के डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक कर दिखाया। ऑपरेशन पूर्व जांचों में मरीज को एनेस्थिसियों की दवाओं से एलर्जी होने का पता चला। बिना बेहोश किए सिर की ओपन सर्जरी  संभव नहीं है, एेसे में एक बार तो चिकित्सकों ने मरीज को जयपुर रेफर करने को कह दिया। फिर गहन चर्चा  के बाद ऑपरेशन करना तय हुआ। 


Read More: कोटा: जेलर और कुख्यात अपराधी का थाने में ऐसे हुआ आमना-सामना

इसमें एनेस्थिसिया के चिकित्सकों ने रिस्क लिया। उन्होंने मरीज की मांसपेशियों को सुन्न नहीं किया, बल्कि दवा सुंधाकर मरीज को बेहोश कर कृत्रिम श्वासनली (एंड्रोट्रेकियल ट्यूब) डाल सर्जरी को पूरा करवाया। बड़ी सर्जरी में पहली बार इस तरह से मरीज को बेहोश रखा गया।


इसलिए जरूरी था बेहोश करना

डॉ. सोमवंशी ने बताया कि लंबी चलने वाली सर्जरी में कृत्रिम श्वास देना पड़ता है। इसके लिए एंड्रोट्रेकियल ट्यूब मरीज की श्वासनली में डाली जाती है, लेकिन इसके लिए मरीज की सभी मांसपेशियों को सुन्न  करना जरूरी होता है।


Read More: कोटा थर्मल परिसर में मौत बनकर दौड़ी नीलगाय


मरीज हिलता तो डॉक्टरों को होती परेशानी

डॉ. सोमवंशी ने बताया कि मरीज की मांसपेशियों को सुन्न नहीं किया जाए तो ऑपरेशन के दौरान उसके हिलने की संभावना रहती है। एेसे में सर्जन को परेशानी हो सकती थी। जिससे मरीज के दिमाग में भी नुकसान हो सकता था। साथ ही सूंघने की दवा से बेहोश करने पर बीपी डाउन, हार्ट रुकने का खतरा भी था।


Read More: Video: एसीबी ने जेल से गिरफ्तार किया कुख्यात अनूप पहाड़िया

यह है मामला

कनवास निवासी चन्द्रकला  (40) दो से तीन माह के सिरदर्द, उल्टी, चक्कर और चलने में असंतुलन की परेशानी लेकर न्यूरोसर्जन डॉ. एसएन गौतम से परामर्श लेने पहुंची। जांच में दिमाग के पिछले भाग में गांठ मिली। इसको सर्जरी कर निकालना तय किया गया। मरीज के पूर्व में एलर्जी होने की जानकारी बेहोशी की जांच में मिली। इस पर एनेस्थिसिया के चिकित्सकों ने एलर्जी टेस्ट करवाया। 


Read More:  खुलासा: जेल प्रशासन ने ही गायब किए थे बंदियों के मोबाइल

सर्जरी के दौरान मांसपेशियों को सुन्न करने वाली सभी दवाओं से एलर्जी होना सामने आया। एेसे में एक बार तो मरीज को जयपुर रेफर करने का मानस बनाया। फिर मरीज व परिजनों की सहमति से सर्जरी करना तय किया गया। सूंघने और इंजेक्शन से एनेस्थिसिया की दवा ज्यादा मात्रा में देकर बेहोश रखा गया। 


डॉ. गौतम और रेजीडेंट डॉ. प्रकाश मीणा ने दो घंटे में सर्जरी कर गांठ निकाली। जिसे बायप्सी जांच के लिए भेजा गया है। इस सर्जरी में एनेस्थिसिया विभाग के प्रोफेसर डॉ. चेतन शुक्ला, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मुकेश सोमवंशी, सहायक आचार्य डॉ. उषा दडिया व उनकी टीम शामिल थी।

rajasthanpatrika.com

Bollywood