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स्क्रू तक जब्त करने के लिए पसीना बहाती रही एसीबी

Patrika news network Posted: 2017-05-20 09:16:20 IST Updated: 2017-05-20 09:16:20 IST
स्क्रू तक जब्त करने के लिए पसीना बहाती रही एसीबी
  • न्यू मेडिकल कॉलेज में एसीबी एक इंच के स्क्रू, डेढ़ इंच के वुडन स्क्रू, प्लास्टिक गुट्टी, ट्यूबलाइट की प्लेट, स्टार्टर, वायर, केबल और लॉन्ग शूज जैसे सामान तलाशने में जुटी रही। अब एसीबी इन सामानों की बाजार दर पता लगाएगी, ताकि सामान की खरीद में हुए भ्रष्टाचार की पोल खुल सके।

कोटा.

मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में कई गुना ज्यादा कीमत पर सामानों की खरीद के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने लगातार दूसरे दिन कार्रवाई जारी रखी। टीम शुक्रवार को अस्पताल पहुंची और गुरुवार को सील किए गए स्टोर प्रभारी के कक्ष का ताला खोला। इसके बाद स्टोर में पहुंचकर वहां का रजिस्टर और कई दस्तावेज कब्जे में लिए। साथ ही इलेक्ट्रिक व्यवस्था के इंचार्ज कक्ष से उस एक-एक सामान को जब्त किया, जिनकी खरीदी में गड़बड़ी का मामला 'राजस्थान पत्रिका' ने उजागर किया। 


सीआई विवेक सोनी की अगुवाई में एसीबी टीम ने इलेक्ट्रिक व्यवस्था के इंचार्ज का कक्ष शुक्रवार सुबह डॉ. एस जैलिया एवं इंचार्ज सुरेश मेहरा की मौजूदगी में खुलवाया। फिर टीम स्टोर पहुंची और रजिस्टर जब्त किया। स्टोर इंचार्ज पृथ्वीराज ने पूछताछ में बताया कि सप्लाई हुए सामान इलेक्ट्रिक व्यवस्था के इंचार्ज सुरेश मेहरा को इश्यू हो चुके हैं। इलेक्ट्रिक सामान रखने के लिए इंचार्ज ने अलग से कक्ष बनाया हुआ है।


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सप्लायर के पास टिन नंबर ही नहीं

एसीबी ने चौधरी कंस्ट्रक्शन और तलवंंडी स्थित राजकुमार फर्म के बिलों की पड़ताल शुरू की है। राजकुमार फर्म के बिल पर टिन नंबर ही नहीं है। उस पर जो फोन नंबर दिया गया है, एसीबी ने जब डायल किया तो एक महिला ने इस नंबर को उठाया और कहा कि उसका राजकुमार फर्म से कोई लेना देना नहीं है। एसीबी टीम ने पहले दिन अस्पताल अधीक्षक डॉ. एसआर मीणा के कक्ष से 3 फाइलें जब्त की थी। शुक्रवार को मीणा अस्पताल में नहीं थे। टीम को बताया गया कि वे अदालती काम से जयपुर गए हैं।


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एक लाख के अंदर-अंदर खेल

अस्पताल अधीक्षक को एक लाख रुपए तक की खरीद का अधिकार है। ऐसे में एसीबी इस बिंदु पर जांच कर रही है कि क्या एक लाख रुपए के अंदर के कई बिलों से खरीदी करके गड़बड़ी की गई है। क्रय समिति से बिना पूछे हजारों रुपए के सामानों की डिमांड भेज दी। संबंधित फर्मों ने सामानों की आपूर्ति भी कर दी, लेकिन स्टॉक रजिस्टर में ब्योरा दर्ज ही नहीं मिला। इंचार्ज सुरेश मेहरा ने कहा कि चार-पांच दिन से व्यस्तता चल रही है। इस वजह से आमद दर्ज नहीं हो सकी। कर्मचारियों के पास अभी तक हाथों में पहनने के दस्ताने ही नहीं थे। पड़ताल में पता चला कि हाल ही में पहली बार दस्ताने खरीदे गए हैं लेकिन कर्मचारियों को ये दिए ही नहीं गए।

rajasthanpatrika.com

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