हाथों में सजी मेहंदी, गूंज रही थी शहनाइयां, उनके आते ही पड़ गया रंग में भंग

Patrika news network Posted: 2017-04-19 10:26:18 IST Updated: 2017-04-19 10:29:30 IST
हाथों में सजी मेहंदी, गूंज रही थी शहनाइयां, उनके आते ही पड़ गया रंग में भंग
  • 'सब तैयारियां पूर्ण हो चुकी थी। हाथों में मेहंदी लग चुकी थी और शहनाई भी गूंज रही थी। लोग खुश थे कि बेटी के हाथ पीले होने वाले हैं।

कोटा .

'सब तैयारियां पूर्ण हो चुकी थी। हाथों में मेहंदी लग चुकी थी और शहनाई भी गूंज रही थी। लोग खुश थे कि बेटी के हाथ पीले होने वाले हैं। कोई सपने देख रहा था कि कुछ ही घंटों में बहू की अगवानी करेंगे,  लेकिन शायद वे भूल गए थे कि बाल विवाह करने की जो गलती वे कर रहे हैं, इसका उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। रंग में भंग पड़ सकता है। एेसा ही हुआ। 


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अचानक महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम व पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे और आयु सम्बन्धित प्रमाण पत्र देखने लगे तो परिजनों के हाथ पैर फूल गए। दस्ते ने कार्रवाई शुरू की। आखिर परिजनों को बेटे-बेटियों की शादी रोकनी पड़ी और लिखकर देना पड़ा कि जब तक लाडले विवाह योग्य नहीं होंगे, उनका विवाह नहीं करेंगे। 


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बाल विवाह करने की गलती में पिछले एक साल में 124  परिवार के लोगों को समाज के सामने नीचा देखना पड़ा।  महिला अधिकारिता विभाग से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार  गत छह वर्षों में जिले में  विभिन्न स्थानों से बाल विवाह होने की करीब 200 शिकायतें मिली। इनमें से 65 शिकायतें झूठी निकली, वहीं प्रशासन ने 124 बाल विवाह रुकवाए। 


आ रही है चेतना 

महिला अधिकारिता विभाग से एकत्रित जानकारी के अनुसार बाल विवाह की शिकायतों में लगातार कमी आ रही है। वर्ष 2012-13 के बाद से ही लगातार शिकायतें कम आ रही हैं। वर्ष 2012-13 से तुलना करें तो शिकायतों की संख्या एक चौथाई से भी कम है। गत वर्ष तो महज 17 शिकायतें मिली। इनमें से 4 सही निकली। 


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खूब हुई दौड़भाग

वर्ष 2012-13 में महिला एवं बाल विकास विभाग व प्रशासन के दस्ते को जमकर भागदौड़ करनी पड़ी। इस वर्ष बाल विवाह की 66 शिकायतें आईं। इनमें से 55 शिकायतें सही निकली। इन शिकायतों के आधार पर विवाह रुकवाए गए।

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