जयंती विशेष : मारवाड़ आए थे विवेकानंद, खेतड़ी नरेश थे हितैषी

Patrika news network Posted: 2017-01-11 10:45:57 IST Updated: 2017-01-11 10:45:57 IST
जयंती विशेष : मारवाड़ आए थे विवेकानंद, खेतड़ी नरेश थे हितैषी
  • अमरीका के शिकागो सम्मेलन से पूरी दुनिया पर छाये भारत के तूफानी सांस्कृतिक पुरोधा स्वामी विवेकानंद का राजस्थान व मारवाड़ से गहरा ताल्लुक है। उनका नया नाम राजस्थान में रखा गया था तो उन्होंने मारवाड़ के माउंट आबू में नक्की झील के ऊ पर बनी चम्पा नामक गुफा में साधना और योगाभ्यास करते थे।

जोधपुर/ एम आई जाहिर

पूरे देश और दुनिया को जगाने वाले हमारे स्वामी विवेकानंद अपने गुरु परमहंस रामकृष्ण के देवलोक होने के बाद स्वामी रमता जोगी बन गए। अगले पांच बरस तक किसी को पता नहीं था कि विवेकानंद कहां हैं? इस भ्रमण के दौैरान ही वे मारवाड़ के माउंट आबू आए थे। 

वे  चम्पा गुफा में साधना  करते थे

स्वामी जी नक्की झील के ऊ पर एकांत में बनी चम्पा नामक गुफा में साधना और योगाभ्यास करते थे। संयोग से यहां उनकी खेतड़ी के नरेश अजीतसिंह से भेंट हुई। स्वामी जी की अजीतसिंह से भेंट के बारे में प्रामाणिक जीवनी Óद लाइफ ऑफ स्वामी विवेकानंद- बाय हिज ईस्टर्न एंड वेस्टर्न डिसाइपल्स Óमें यह उल्लेख मिलता है।

उत्तर से दक्षिण दिशा में चलना शुरू किया

जयनारायण व्यास विवि छात्र सेवा मंडल के राजस्थानी संस्कृति प्रकोष्ठ की ओर से प्रकाशित व प्रो. कन्हैयालाल राजपुरोहित संपादित एक लघु पुस्तिका Óस्वामी विवेकानंद अर राजस्थानÓ में भी इस बात का उल्लेख किया गया है। पुस्तिका में उल्लेख है कि उन्होंने आदि गुरु शंकराचार्य के बताए मार्ग से उलट देश में उत्तर से दक्षिण दिशा में चलना शुरू किया और माउंट आबू पहुंचे। स्वामी जी के सभी जीवनीकारों ने खुद यह बात स्वीकार की है कि खेतड़ी नरेश स्वामी जी के सच्चे मीत और हितैषी थे।

समस्त मानव एक ही ईश्वर की संतान

माउंट आबू में रहने के दौरान स्वामी जी को किशनगढ़ रियासत मुंशी फैज अली ने वहां से निकलते देखा तो वे उनकी विद्वता से बहुत प्रभावित हुए और उनके शैदाई हो गए। मुंंशी ने कहा, मैं अकेला हूं, किशनगढ़ की कोठी में रहने के लिए चलें। इतना स्नेह देख स्वामी जी मना न कर सके। वे वहां रहे। पास में ही खेतड़ी रियासत की कोठी भी थी। तब खेतड़ी के दीवान जगमोहनलाल ने पूछा कि स्वामी जी आप यहां इस जगह? स्वामी जी ने कहा, समस्त मानव एक ही ईश्वर की संतान हैं।

-प्रो. कन्हैयालाल राजपुरोहित

प्रख्यात राजनीतिशास्त्री

पूर्व संस्थापक सचिव व उपाध्यक्ष

विवेकानंद केंद्र, कन्हैयाकुमारी शाखा, जोधपुर


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