अपने मूक-बधिर बेटे का विकलांग सर्टिफिकेट बनवाने को पेट पाले या हक मांगे ये विधवा मां

Patrika news network Posted: 2017-04-21 18:58:51 IST Updated: 2017-04-21 18:58:51 IST
  • विधवा संतोष देवी अपने मूक-बधिर बेटे का विकलांग सर्टिफिकेट बनवाने के लिए हॉस्पिटल के काट रही है चक्कर

दीनबन्धु वशिष्ठ/जोधपुर

कमठा मजदूरी करने वाली विधवा संतोष देवी सप्ताह भर से अपने मूक-बधिर बेटे के सर्टिफिकेट के लिए सरकारी हॉस्पिटल के चक्कर लगा रही है, लेकिन सर्टिफिकेट बनवाना तो दूर, उसे आए दिन डॉक्टरों की लताड़ सहनी पड़ रही है। सप्ताह भर से घूम रही इस मजबूर मां से जब राजस्थान पत्रिका संवाददाता ने पीड़ा पूछी तो खुद को रोक नहीं सकी, आंखों से आंसू निकल आए और बोली कि वह मजबूर है, बच्चों का पेट भरने के लिए मजदूरी करे या सर्टिफिकेट बनवाने के लिए डॉक्टर के चक्कर काटे।


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बचपन में भी नहीं बना सर्टिफिकेट

संतोष ने बताया कि वह अपने मूक-बधिर बेटे राजू का सर्टिफिकेट बनवाने के लिए एमडीएम हॉस्पिटल गई, तो यहां उसे ईएनटी विभाग में डॉ. योगेश सोलंकी के पास भेजा। वह बेटे के साथ डॉक्टर से मिली, तो डॉक्टर बोले कि बेटा इतना बड़ा हो गया है, अभी तक क्यों नहीं बनवाया और टरका दिया। संतोष ने बताया कि जब राजू 6-7 साल का था, तब भी वह हॉस्पिटल सर्टिफिकेट बनवाने के लिए गई, लेकिन सर्टिफिकेट नहीं बना। अब राजू 20 साल का हो चुका है।

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पेट पाले या हक के लिए लड़े

संतोष देवी के पति की मृत्यु भी खानों में काम करते हुए सिलिकोसिस बीमारी से हो गई, लेकिन पति की मौत पर भी इन्हें सरकार से कोई सहायता नहीं मिली। कुछ साल पहले एक बेटा भी गुजर गया। अब ये अपने मूक-बधिर बेटे के लिए हॉस्पिटल के चक्कर लगा रही है, ताकि बीपीएल नहीं तो कम से कम आस्था कार्ड बन जाए और सरकारी सहायता मिल जाए, लेकिन सरकारी अफसरों के रवैये से यह भी संभव नहीं दिख रहा।


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मां की रुलाई

अस्पताल गई, तो वहां मुझे कहा कि बाहर जा... बाहर जा, यहां क्यों आई। कोई सर्टिफिकेट तेरा नहीं बनेगा। मैंने कहा कि अंदर तो जाने दो, तो जवाब मिला कि कहीं अंदर नहीं जाना है। इतना बड़ा हो गया तेरा बेटा।

- संतोष देवी


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कोई वजह रही होगी, आप महिला को भेजें


ऐसा नहीं हो सकता, हमारे यहां तो पूरे पश्चिमी राजस्थान के लोग आते हैं, सारे सर्टिफिकेट यहीं बनते हैं। हो सकता है कि उस महिला के पास कोई दस्तावेज नहीं हो, या बच्चा मूक-बधिर नहीं हो। कोई न कोई वजह रही होगी। सोमवार को ये महिला मुझसे आउटडोर में आकर मिले। जो भी वस्तुस्थिति है, स्पष्ट हो जाएगी।

भारती सोलंकी, विभागाध्यक्ष, नाक, कान, गला रोग 

rajasthanpatrika.com

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