जोधपुर का पैंथर लेने लगा है कुत्ते का रूप, वन्यजीव चिकित्सक अपना रहे ये तकनीक

Patrika news network Posted: 2017-05-19 19:07:12 IST Updated: 2017-05-19 19:07:12 IST
  • जोधपुर में एक पैंथर एेसा भी है जो धीरे धीरे पालतू कुत्ता बनने लगा है। उसे खूंखार बनाने के लिए वन्यजीव चिकित्सकों के पसीने छूट रहे हैं। जानिए क्या है पूरा मामला...

नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर

कहते हैं, शेर को शिकार करना कौन सिखाएगा। लेकिन हर बार यह बात सहीं नहीं होती। जोधपुर के माचिया जैविक उद्यान में इंसानों के बीच पल रहे तीन शावकों को उनके नैसर्गिक, प्राकृतिक और जन्मजात गुण विकसित नहीं हुए हैं। दिखने में शेर लेकिन हरकतें शेरों जैसी नहीं दिखने से वन अधिकारियों के माथे पर सलवटें आ रही हैं। अब इन शावकों को दहाडना सिखाया जा रहा है। वन्यजीव चिकित्सक डॉ. श्रवणसिंह राठौड़ के नेतृत्व में पैंथर शावक 'सोनू' को दहाडऩे, लपकने, छलांग लगाने का का प्रशिक्षण देना शुरू किया है।


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माचिया जैविक उद्यान में शेरनी 'आरटी' ने 22 अक्टूबर 2016 को एक साथ तीन शावकों को जन्म दिया, लेकिन किसी भी शावक के प्रति अपना ममत्व नहीं दर्शा सकी। इसी कारण दो शावक की मौत हो गई। तीसरे शावक 'कैलाश' के लालन पोषण की जिम्मेदारी वन्यजीव चिकित्सक़ को सौंपी गई। लगातार सात माह तक देखरेख और लालन पोषण से शावक कैलाश को नया जीवन मिला । इस दौरान वह इंसानों के सम्पर्क में रहा और उसमें नैसर्गिक गुण विकसित नहीं हो सके। ना ही उसकी दहाड़ सुनाई दी। अब उसमें प्राकृतिक गुणों के विकास के लिए ग्रीन नेटयुक्त विशेष पिंजरे में मिट्टी डलवाई गई है।


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शावक के शरीर का विकास हो इसके लिए पिंजरे में फुटबॉल व अन्य खेल सामग्री भी रखी गई है। माचिया जैविक उद्यान में ही 13 फरवरी 2017 को जन्में तीन शावकों में जिंदा बची एकमात्र मादा शावक 'सोनू Óअब तीन माह की हो चुकी है। पैंथर शावक भी अपने प्राकृतिक गुणों से वंचित ना रहे इसके लिए उसे रोजाना दहाडऩे का प्रशिक्षण दे रहे है। उसे बिग केट लॉयन एन्क्लोजर के पास ले जाकर दहाडऩे, लॉयन के बैठने और अन्य अठखेलियां दिखाते हैं ताकि ये नैसर्गिक गुण उसमें भी विकसित हो। पैंथर के शेल्टर हाउस में सीसीटीवी से शावक हर गतिविधियों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है।


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डर यही वन्यजीव पालतू ना बन जाए


माचिया जैविक उद्यान में आने वाले लाखों दर्शकों को प्रकृति के बीच वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार और अठखेलियों से रू-ब-रू कराना हमारा दायित्व भी है। पैंथर या लॉयन शावक ही नहीं सभी तरह के प्रजातियों के वन्यजीवों के लिए के प्राकृतिक गुण विकसित करना हमारा प्रयास होता है। हम वन्यजीव को पालतु पशु के रूप में ट्रीटमेंट भी नहीं देते। मांसाहारी वन्यजीवों को भोजन तक भी प्राकृतिक तरीके से देने का प्रयास रहता है।

डॉ. श्रवणसिंह राठौड़, चिकित्सक, माचिया जैविक उद्यान जोधपुर।

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