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वीडियो : इस शिल्पकार ने अपनी कलाकृतियों से दिया सृजन का संदेश

Patrika news network Posted: 2016-11-30 23:59:21 IST Updated: 2016-12-01 00:01:38 IST
वीडियो : इस शिल्पकार ने अपनी कलाकृतियों से दिया सृजन का संदेश
  • पुरुष और प्रकृति का मिलन ही सृजन है। जोधपुर के शिल्पकार भूपत डूडी सृजन के इस पहलू को अपनी कलाकृतियों में संजो रहे हैं। शिल्पकार डूडी ने अपने हुनर और विशिष्ट सोच के बूते राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान पुख्ता की है।

जोधपुर

पुरुष और प्रकृति का मिलन ही सृजन है। जोधपुर के शिल्पकार भूपत डूडी सृजन के इस पहलू को अपनी कलाकृतियों में संजो रहे हैं। शिल्पकार डूडी ने अपने हुनर और विशिष्ट सोच के बूते राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान पुख्ता की है। डूडी के बनाए शिल्प विदेशों में न केवल सराहे जा चुके हैं, बल्कि कई प्रमुख जगहों पर उन्हें स्थान दिया गया है।

समसामयिक विषयों को अपनी कलाकृतियों में समेटे डूडी मूल रूप से ओसियां के पड़ासला गांव से हैं। जेएनवीयू में लैब असिस्टेंट रहे पिता राणाराम ने अपने पुत्र भूपत को कला क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए हमेशा ही प्रेरित किया।

पंेंटिंग के साथ शिल्पकला पर आजमाया हाथ

भूपत ने बताया कि जोधपुर मिनिएचर पेंटिंग के लिए जाना जाता रहा है। बचपन से उन्होंने आसपास ऐसे ही कलाकारों को देख पेंटिंग सीखी। बाद में जेएनवीयू से ही कला विषय में स्नातक किया। उनका सफर यहीं तक नहीं रुका और वे स्नातकोत्तर के लिए उदयपुर स्थित मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय चले गए। यहां पढ़ाई के बाद उन्होंने कला क्षेत्र में रहते हुए ही नाम कमाने की ठानी। पेंटिंग के साथ ही शिल्पकला में हाथ आजमाते रहे। इस दौरान उन्होंने दिल्ली, अहमदाबाद, बड़ौदा और मुम्बई रहते हुए बारीकियां सीखीं। यहीं उनके लिए विदेशों में जाकर प्रदर्शनी लगाने व कार्य करने का रास्ता खुल पाया।

यहां हुआ शिल्प का प्रदर्शन

भूपत की कई कलाकृतियां इटली, नीदरलैंड्स, फ्रांस, चेक रिपब्लिक, जर्मनी आदि देशों में प्रदर्शित की जा चुकी हैं। इसके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों व शहरों में भूपत की कलाकृतियां सराही व सम्मानित की जा चुकी हैं। अगरतला में हुई 54वीं नेशनल एग्जीबिशन ऑफ आर्ट के कवर पेज पर प्रदर्शित की गई है। उनके पंसदीदा कलाकार रामकिंकर, बलबीर सिंह, रेने मैग्रिटी, पिकासो व अनीश कपूर आदि हैं।

मॉडर्न नहीं समसामयिक आर्ट

शिल्पकार भूपत का कहना है कि आज के कलाकार अपनी कलाकृतियों को मॉर्डर्नं आर्ट का दर्जा देने लगे हैं। 90 के दशक में प्रयोगधर्मी कलाकार ही मॉडर्नं आर्टिस्ट की श्रेणी में गिने जाते हैं। आज जो कार्य हो रहा है, उसे समसामयिक आर्ट कहना अधिक लाजमी होगा।

जोधपुर में कला के बारे में भूपत का कहना है कि इसके लिए खुद कलाकार जिम्मेदार हैं। सभी कलाकारों को सीमित दायरों को बढ़ाना होगा। इसके लिए सरकार और कलाकारों को मिलकर कार्य करने होंगे। वर्तमान में जोधपुर के किसी भी चौराहे पर शहर के किसी कलाकार की कलाकृति का नहीं दिखना चिंता का विषय है।

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