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जोधपुर में 'कैलाश' काबचपन विकसित करने का अनुभव अब इस नवजात शावक को मिला

Patrika news network Posted: 2017-06-19 20:12:52 IST Updated: 2017-06-19 20:14:38 IST
  • माचिया जैविक उद्यान में आठ माह पूर्व जन्मे लायन शावक कैलाश के बचपन को सफलतापूर्वक विकसित करने का चिकित्सकीय अनुभव वर्तमान में दो कैट प्रजाति के शावकों के लिए जीवनदायिनी बन गया है।

जोधपुर

माचिया जैविक उद्यान में आठ माह पूर्व जन्मे लायन शावक कैलाश के बचपन को सफलतापूर्वक विकसित करने का चिकित्सकीय अनुभव वर्तमान में दो कैट प्रजाति के शावकों के लिए जीवनदायिनी बन गया है। वन्यजीव चिकित्सक डॉ. श्रवणसिंह राठौड़ के नेतृत्व में चार माह की मादा पैंथर शावक 'सोनू' और पिछले माह 13 मई को जन्मे बेबी लॉयन 'आरके' को बचाने में विशेष सर्तकता बरती जा रही है। माचिया जैविक उद्यान में शेरनी 'आरटी' ने 22 अक्टूबर 2016 को एक साथ तीन शावकों को जन्म दिया, लेकिन दो शावक की मौत हो गई। 


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तीसरे शावक को बचाना वनविभाग के लिए चुनौती बन गया था। डॉ. राठौड़ को शावक पालने का जिम्मा सौंपा गया और देखते ही देखते कैलाश वर्तमान आठ माह का हो चुका है। इस बीच कैलाश की मां एशियाटिक शेरनी ने पिछले माह पुन: दो शावकों को जन्म दिया, लेकिन एक शावक को अनुभवहीनता के कारण मुंह में रखने के दौरान दांत धंसने से उसकी मौत हो गई थी। दूसरे शावक 'आरके' को बचाने का जिम्मा भी चिकित्सक डॉ. राठौड़ को सौंपा गया।


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दूध पीने में नखरे दिखाता है आरके


नवजात शावक आरके का पालन पोषण करने वाले चिकित्सक डॉ. राठौड़ ने बताया कि शावक कैलाश ने दूध पीने के लिए कभी नखरे नहीं दिखाए, लेकिन नवजात लायन शावक आरके को दूध पिलाने में खासी मशक्कत करनी पड़ती है। छोटे बच्चों की तरह दूध पीने में नखरे दिखाने के कारण करीब 15 से 20 मिनट लग जाते है। डॉ. राठौड़ के सहायक महेंद्र गहलोत 24 घंटे शावक की देखरेख में जुटे हैं। मां के दूध से वंचित लॉयन शावक के लिए अमरीका से आयातित विशेष दूध का पॉउडर 'पेटलेक' दिन रात चार-चार घंटे के अंतराल से पिलाया जा रहा है।


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सोनू भी हुई चार माह की

माचिया जैविक उद्यान में ही 13 फरवरी 2017 को जन्में तीन पैंथर शावकों में एक मात्र जिंदा बची मादा शावक 'सोनू'भी चार माह की हो चुकी है।


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वजन के अनुसार देते है डाइट

नवजात लायन शावक का वजन सवा माह में करीब 4.5 किलो ग्राम हो गया है। प्रतिदिन उसका वजन देखकर ही उसकी डाइट का निर्धारण किया जाता हैं। सामान्यत: 50 से 80 ग्राम भार प्रति दिन बढ़ रहा है। नवजात शावक के लिए रूम एयर प्यूरीफ ायर, ओटो क्लेव मशीन, ओटो क्लेव मशीन, फ ॉगिंग मशीन, नेओ नेटल केज, नेओ नेट्ल क्लोडिंग्स सुविधाएं पहली बार विकसित की गई है। चिकित्सक के अलावा अन्य किसी को भी नवजात शावक के पास जाने की इजाजत नहीं है।

-महेन्द्रसिंह राठौड़, उपवन संरक्षक वन्यजीव जोधपुर।

rajasthanpatrika.com

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