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जोधपुर का एेसा अनोखा मंदिर जहां 28 अखंड दीपों से निकलता है चंदन, शिव पूजा में होता है प्रयोग

Patrika news network Posted: 2017-07-13 19:10:03 IST Updated: 2017-07-13 19:10:03 IST
  • कुंथुनाथ मंदिर जहां 28 दीपक से बरस रहा है केसर, देवलोक में किए जाने वाले शिव पूजन में प्रयुक्त सफेद चंदन भी बरस रहा

जोधपुर.

सनसिटी जोधपुर में केसरिया कुंथुनाथ का एक ऐसा अनूठा मंदिर है जिनके मूल गर्भगृह की परिधि में 28 अखंड दीपों की ज्योति से प्रतिपल काजल के बजाए केसर व सफेद चंदन एकत्रित होता हैं। अजीत कॉलोनी रातानाडा स्थित केसरिया कुंथुनाथ मंदिर की दिव्यता और ज्योतिर्मयता के दर्शन करने वर्ष पर्यन्त दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं। 


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प्रमुख रूप से जिन मंदिर में अखंड दीपों से निरन्तर हर पल श्वेत केसर बरसने के कारण ही मंदिर का नाम केसरिया कुंथुनाथ मंदिर पड़ा। मंदिर में मां चक्रेश्वरी सहित भगवान सहस्रफणा पाश्र्वनाथ आदि जिनेश्वरों की मूर्तियां विद्यमान हैं। दीपक की लौ से होने वाले केसर चंदन से कई बार विभिन्न मुद्राएं भी बनती रहती हैं। मंदिर में 24 तीर्थंकरों के 24 अखंड दीपक सहित शासनदेवी चक्रेश्वरी और माता पद्मावती देवी के अखंड दीपक प्रज्ज्वलित हैं। 


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कुछ दीपक ऐसे भी है जहां सफेद चंदन और केसर की पांखुडिय़ा एक साथ नजर आती हैं। मंदिर के मूल गर्भगृह एवं परिधि में अखंड दीपों की अखंड ज्योत हर क्षण झिलमिलाती हैं। वैदिक धर्म शास्त्रों में सफेद चंदन केवल देवलोक में शिव का पूजन सफेद चंदन से करने का उल्लेख हैं। जैन मतानुसार सफेद चंदन के वृक्ष देवलोक में मल्यागिरी पर्वत में बताया है जहां मां चक्रेश्वरी का निवास है। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष राजरूपचंद मेहता के अनुसार मंदिर में प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रा के दौरान सप्तमी से नवमी के मध्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।


होमाष्टमी के दिन 999 बार अष्टप्रकारी सामग्री से महापूजन किया जाता है। मंदिर की मुख्य विशेषताएं सम्पूर्ण विश्व में एक मात्र एेसा मंदिर है जहां मूल गर्भ एवं परिधि में 28 अखंड ज्योत जिनमें 27 घी से एक मूंगफली के तेल प्रज्ज्वलित है। सभी ज्योतियों में प्रतिपल चंदन, केसर की पांखुडियां एवं सफेद चंदन एकत्रित होता है। - मंदिर का निर्माण मोहनमल दफ्तरी मेहता एवं पत्नी उगम कंवर ने करवाया जिसमें 12 फरवरी 1973 को मंदिर मूल नायक कुंथुनाथ, समुतिनाथ, सुपाश्र्वनाथ आदि की प्रतिमाएं प्रतिष्ठित की गई। मंदिर के दर्शनार्थ आने वाले दर्शनार्थियों एवं भक्तों के आवास व भोजन की आधुनिकतम व्यवस्था है। 

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