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जोधपुर में ये क्या हो गया पाक विस्थापितों के साथ... कुएं से निकले तो अटक गए खाई में.. !

Patrika news network Posted: 2017-06-16 19:04:15 IST Updated: 2017-06-16 19:04:15 IST
  • जोधपुर जिला प्रशासन की अनदेखी के चलते सीमा पार से आए पाक विस्थापितों को तो परेशानी हुई है। साथ ही यहां भू माफिया भी अपना फायदा बटारेने में लगे हैं।

जोधपुर

सीमा पार से जोधपुर आए पाक विस्थापतों के लिए ठोस कानूनी नीति के अभाव में भू माफि या खनन क्षेत्र में भूखंड बेचकर चांदी काटने में लगे हैं। जोधपुर शहर के गंगाणा में नई बकरामंडी के पीछे खसरा संख्या 61 में अब तक 200 से अधिक भूखंड भूमाफिया ने बेच दिए हैं। उस पर मकान भी बन चुके हैं। पाक विस्थापित भोले-भाले अशिक्षित हिन्दुओं के साथ हो रहे धोखे के प्रति ना तो जिला प्रशासन गंभीर है और ना ही जोधपुर विकास प्राधिकरण के किसी अधिकारी ने पहुंचकर भू माफिया को कभी रोका है। सैकड़ों परिवार सीमा पार अंधेरे कुएं से निकलकर वर्तमान में जोखिम भरे खनन क्षेत्र में सब कुछ गवां कर आशियाना बनाकर रहने को मजबूर हैं।


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सीमान्त लोक संगठन की अध्यक्ष हिन्दू सिंह सोढा से पत्रिका की बातचीत

सीमा पार पाकिस्तान में हिन्दुओं को धार्मिक मतभेद और उत्पीडऩ के कारण भारत आने के सिवा और कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। ये सिलसला तो विभाजन के दिन से ही आरम्भ हुआ है, जो लगातार जारी है। हालांकि भारत सरकार ने विभाजन से लेकर 1971 के युद्ध तक आए हिन्दू विस्थापतों को हिन्दुस्तान में बसने के लिए पुनर्वास का प्रबंध किया था, लेकिन उसके बाद आने वाले हिन्दू विस्थापितों के लिए ना तो कोई पुनर्वास का प्रबंध है और ना कोई कानूनी अधिकार है। जिस के आधार वो कानूनी तौर पर अपने नाम से रोजगार के लिए कोई कार्य कर सके। 

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यहां तक विस्थापित परिवार बैंक में खाता खोलने से लेकर छोटी सम्पत्ति तक अपने नाम नहीं कर सकते हैं, जिस के कारण खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। सीमान्त लोक संगठन जरूरत पडऩे पर ऐसे विस्थापित परिवारों को दरकार लीगल एड देने की तैयारी कर रहा है, ताकिहिन्दुस्तान में रह रहे विस्थापित परिवारों के आर्थिक उत्पीडऩ को रोका जा सके। पिछले साल अगस्त में सरकार ने एक नोटिफि केशन निकाला था, जिसमें हिन्दू विस्थापित अब अपना कार्य और सम्पत्ति वगैरह अपने नाम कर सकेंगे, लेकिन अभी तक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से इस पर अमल करने का आदेश नहीं निकाला गया है। 


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विस्थापितों के साथ धोखाधड़ी की उच्च स्तरीय जांच हो

सीमान्त लोक संगठन के अध्यक्ष हिन्दू सिंह सोढा ने बताया कि विस्थापितों के लिए कोई उचित कानूनी नीति के अभाव में विस्थापित भू माफि याओं के शिकंजे में भी फं स जाते हैं जो मजबूर लोगों को झांसा देकर गलत टाइटल की जमीनें बेच देते हैं, जो कई सालों के बाद इन विस्थापतों को पता चलता है कि खरीदी गई उस जमीन का टाइटल गलत था। विस्थापतों के साथ होने वाली धोखाधड़ी की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और एक पुख्ता पुनर्वास नीति बनाकर विस्थापित परिवारों को बसाने का प्रबंध होना चाहिए। सीमान्त लोक संगठन के संघर्ष से सरकार ने विभिन्न जगहों पर जमीन विस्थापतों के लिए आरक्षित की गई है, जिसमें जेडीए की ओर से 500 बीघा, नगर निगम जोधपुर की ओर से 500 प्लॉट्स, यू.आई.टी जैसलमेर की ओर से 2000 बीघा जमीन शामिल है। जमीन को न केवल विस्थापतों के लिए रिजर्व किया गया, बल्कि यह जमीन मास्टर प्लान का हिस्सा भी है। केंद्र सरकार पाकिस्तानी हिन्दू विस्थापित परिवारों के लिए उचित पुनर्वास पैकेज देना चाहिए।


शिकायत देकर थक चुके

खनन क्षेत्र में अंधाधुंध बेचे जा रहे भू खंड को लेकर जेडीए सचिव को क्षेत्रवासियों ने कई बार लिखित में शिकायत की गई, लेकिन अभी तक किसी भी अधिकारी ने कोई सुध नहीं ली है। नतीजतन भू माफियाओं के हौसले बुलंद होने लगे है। करीब 250 से अधिक लोग खनन क्षेत्र में ही पक्के मकान बना चुके हैं। एेसा ही क्रम चलता रहा तो निकट भविष्य में जानलेवा साबित हो सकता है। -छंवरलाल, खनन व्यवसाय से जुड़ा क्षेत्रवासी


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मजदूरी कर आशियाना बना रहे

हमने तो यहां 60 गुणा 60 आकार का कब्जाशुदा भूखंड एक लाख बीस हजार में लिया है। अब मजदूरी कर यहां अपने आशियाने का निर्माण कर रहे है। पानी, बिजली आदि मूलभूत सुविधाएं नहीं है। क्षेत्र की पुरानी बावड़ी का पानी पीकर ही काम चलाते हैं। -कानाराम

छान कर पीते हैं पानी

हम सीमा पार पाकिस्तान के खिपरो क्षेत्र से वर्ष 2013 में आए थे। तब से यहां रह रहे हैं और किसी भी तरह की मूलभूत सुविधा नहीं है। कुएं का पानी छान कर पीते हैं। -डोली, युवती

कोई सुविधा नहीं

पाकिस्तान के मीरपुर खास से 4 साल पहले आए थे। हमारे 200 परिवारों की बस्ती मे किसी के पास कोई जमीन का पट्टा नहीं है। हम दूसरों के कब्जे ही खरीद रहे हैं। सरकार की तरफ से आज तक कोई सुविधा नहीं मिली है। अधिकतर कमठा मजदूर हैं। पानी बिजली कोई सुविधा नहीं है। बच्चों के लिए एक प्राइमरी स्कूल है। -प्रताप भील

खतरा और मजबूर हैं

खनन क्षेत्र में बसे हम लोगों को खतरा है, लेकिन क्या करें मजबूर है। हम बच्चों को लेकर कहां जाएं। हम किसी से कुछ नहीं कह सकते। -लीमाराम सांगड़ सिंध प्रांत

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