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जोधपुर के इस कस्बे में वर-वधू क्यूं ले रहें हैं आठवां फेरा, ये अनूठी प्रथा जान हैरान रह जाएंगे आप

Patrika news network Posted: 2017-05-19 15:41:59 IST Updated: 2017-05-19 15:41:59 IST
  • अब तक आपने शादी की विभिन्न रस्मों-रिवाजों के बारे में जाना होगा लेकिन जोधपुर का एक कस्बा एेसा भी है जहां शादी में वर-वधू आठवें फेरे में एक दूसरे से ये अनूठा वचन लेते हैं। जानिए क्या है ये वचन...

महेन्द्र ढाका/भावी/जोधपुर

विवाह संस्कार सात फेरों के बिना पूरा नहीं होता है। सात जन्मों के साथ का वचन लेकर सात फेरों के बाद गृहस्थ आश्रम शुरू होता है लेकिन जोधपुर जिले के भावी कस्बे में आठ फेरे लेकर विवाह संस्कार पूरा किया जाता है। वर-वधु यहां आठवां फेरे में पर्यावरण संरक्षण का वचन ले रहे है। इस साल इस क्षेत्र में ऐसी पचास शादियां अब तक हो चुकी हंै। सभी ने आठ फेरे लिए। साथ ही बाबुल का घर छोड़ पिया के घर को विदा होने से पहले वधु अपने घर या सार्वजनिक स्थान पर एक पौधा रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं।

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अब तक ऐसी शादियां करवा चुके पंडित रामचन्द्र शर्मा, गौतम शर्मा और चन्द्र प्रकाश शर्मा बताते है कि एक साल पहले शुरू हुई यह परंपरा अब भावी में प्रथा का रूप लेने लगी है। हम वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलवाते हैं। लोग खुशी.खुशी इस नई प्रथा को स्वीकार कर रहे हैं।


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दूल्हे ने दहेज में मांगे पौधे

इस क्षेत्र में पर्यावरण के प्रति बढ़ रही जागरूकता के चलते हाल ही आठ मई को इसी गांव के युवक जगदीश सीरवी ने दहेज में अपने ससुर से पांच सौ पौधे मांगे थे। दुर्गाराम सोलंकी अपने होने वाले दामाद की इस मांग से एक बारगी तो दंग रह गए मगर जिद के आगे एक न चली और पांच सौ पौधे देने का वादा किया तभी शादी की रस्में पूरी हुई। भावी निवासी जगदीश सीरवी वर्तमान में दिल्ली एम्स में नर्सिंग अधिकारी है। उनके ससुर पांच सौ पौधे बरसात के मौसम में देंगे, जिन्हें वर-वधु अपने परिवार के साथ अलग-अलग चयनित स्थानों पर रोपेंगे।


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2016 से चल रही है मुहिम

पर्यावरण संजीवनी संस्थान के अध्यक्ष गोविन्द सीरवी ने बताया कि पर्यावरण की सुरक्षा का संदेश देने वाली यह परंपरा फरवरी 2016 से वृक्षमित्र कानाराम पित्तावत की दोनों पुत्रियों के विवाह से शुरू हुई। संस्थान के सदस्य आसपास के क्षेत्र में सेवानिवृति, गृह प्रवेश, मुण्डन संस्कार व अन्य सामाजिक समारोह में जाकर पर्यावरण संरक्षण व पौधरोपण की शपथ दिलवाते हैं।

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