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सरकार व आरपीएससी पर दो-दो लाख का दण्ड

Patrika news network Posted: 2017-03-12 09:42:57 IST Updated: 2017-03-12 09:42:57 IST
सरकार व आरपीएससी पर दो-दो लाख का दण्ड
  • राजस्थान हाईकोर्ट ने परीक्षा में सफल रहे एक अभ्यर्थी को नौकरी नहीं देने के मामले में राजस्थान सरकार और आरपीएससी को दो- दो लाख रुपए का दंड लगाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि दण्ड की राशि दोषी अधिकारियों से वसूल करें।

जोधपुर

राजस्थान उच्च न्यायालय ने वर्ष 2004 की तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफल रहने और हाईकोर्ट से आदेश पारित होने के बावजूद एक अभ्यर्थी को नौकरी नहीं देने के मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग और राज्य सरकार की उदासीनता को गंभीरता से लेते हुए दोनों पर दो-दो लाख रुपए का अर्थदण्ड लगाया है।

अफसरों से वसूल करने के आदेश

अदालत ने दण्ड की राशि याचिकाकर्ता को देने और इसकी वसूली जिम्मेदार अधिकारियों से करने के भी आदेश दिए हैं। न्यायाधीश संदीप मेहता ने इसके लिए राज्य के मुख्य सचिव और आरपीएससी के अध्यक्ष को इस मामले में देरी के लिए दोषी अधिकारियों को पता लगाने के भी निर्देश दिए हैं।

सेवा लाभ दिए जाएं

न्यायाधीश मेहता ने हनुमानगढ़ जंक्शन निवासी याचिकाकर्ता कौशल कुमार गुप्ता को इसी भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश देने की तिथि से सेवा लाभ देने के भी आदेश दिए। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट के पूर्व आदेश की तारीख यानी 29 जुलाई, 2008 से वास्तविक वित्तीय लाभ व इससे पूर्व के काल्पनिक (नोशनल) सेवा लाभ दिए जाएं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विशाल शर्मा ने पैरवी की।

यह था प्रकरण

याचिकाकर्ता कौशल गुप्ता ने आरपीएससी की ओर से आयोजित तृतीय श्रेणी, शिक्षक भर्ती परीक्षा में हिस्सा लिया और 134 अंक प्राप्त कर सफल रहा। गुप्ता को साक्षात्कार के लिए भी बुलाया गया। बाद में आरपीएससी ने इतने ही अंक पाने वाले अन्य अभ्यर्थियों को नौकरी दे दी, लेकिन गुप्ता को वंचित रखा गया। इस पर गुप्ता ने वर्ष 2008 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।

अवमानना याचिका दायर की

इस पर हाईकोर्ट ने वर्ष 2004 की भर्ती में रिक्त पदों पर गुप्ता को नियुक्ति देने के आदेश दिए। बावजूद इसके जब नियुक्ति नहीं मिली, तो कौशल ने 2011 में अवमानना याचिका दायर की। इस दौरान पहले तो सरकार व आरपीएससी ने कहा कि वर्ष 2004 की भर्ती में कुछ पद रिक्त हैं, लेकिन बाद में यह कह कर मुकर गए कि सभी रिक्त पद अगली भर्ती में कैरी-फॉरवर्ड हो गए हैं और 2006 में सभी पद भर लिए गए।

झूठे शपथ पत्र देकर कोर्ट को गुमराह किया

इस पर कौशल ने अवमानना याचिका वापस लेते हुए नये सिरे से याचिका दायर की। इसमें बताया गया कि सरकार और आरपीएससी ने झूठे शपथ पत्र देकर कोर्ट को गुमराह किया है। जहां एक ओर सभी पद भरे हुए बताए जा रहे हैं, वहीं विधानसभा में एक सवाल के जवाब में पद रिक्त बताए गए हैं। 

अदालत को गुमराह किया 

विस्तृत सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माना कि राज्य सरकार और आरपीएससी दोनों ने अदालत को गुमराह किया है। अदालत ने इस मामले में अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताई। साथ ही याचिका मंजूर करते हुए राज्य सरकार को छह हफ्ते में याचिकाकर्ता को तृतीय श्रेणी अध्यापक के पद पर नियुक्ति देने के आदेश दिए।

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