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शहीद विश्नोई का परिवार संवार रहा पार्क

Patrika news network Posted: 2017-06-12 17:53:29 IST Updated: 2017-06-12 17:53:29 IST
शहीद विश्नोई का परिवार संवार रहा पार्क
  • वीरांगना व उसकी बेटियां करती हैं पेड़-पौधों की देखभाल

बासनी (जोधपुर)

वैसे तो शहीदों के शहादत की वीर गाथाएं और उनके परिवार की संघर्ष की कहानियां राजस्थान के हर कोनें में फैली है, लेकिन शहीद बाबूलाल विश्नोई की वीरांगना सीता देवी और उनकी तीन पुत्रियों ने उनकी शहादत को अमर बनाने के लिए स्मृति-स्मारक लगाने के साथ ही पार्क को संवारनें का कार्य किया है।


गौरतलब है कि मूलत: जोधपुर जिले की भोपालगढ़ तहसील के धोरू गांव के सीमा सुरक्षा बल के जवान विश्नोई 22 अक्टूबर 1999 को जम्मु-कश्मीर के मालवान, कुलगम स्थान पर शहीद हो गए थे। वे शहादत से पहले 41 बीएन बीएसएफ में कांस्टेबल(ड्राइवर) के पद पर कार्यरत थे।



 पिछले 20 वर्षों से बासनी क्षेत्र के गंगा विहार में रहने वाले इस परिवार ने अपने पैसों से घर के पास शहीद बाबूलाल विश्नोई पार्क और स्मारक बनाया है। जिसकी देखभाल भी वे खुद ही करती हैं।



अब पेयजल सेवा के लिए बना रहे प्याऊ


वीरांगना सीता देवी ने बताया कि उनकी शहादत के बाद 2001 में स्मृति-स्मारक बनवाया। उसके बाद उन्होंने व उनकी तीन पुत्रियां रेखा, प्रियंका व ममता ने मिलकर स्मारक के पास पार्क विकसित किया हैं।



 बड़ी बेटी रेखा सैनिक कल्याण बोर्ड में लिपिक के पद पर तैनात है वहीं प्रियंका बीए द्वितीय वर्ष व ममता बीए प्रथम वर्ष में पढ़ रही हैं। इन्होंने पार्क में हरी घास के साथ ही विभिन्न छायादार पेड़-पौधें भी लगाए हैं।



 पेड़-पौधों को पानी देने के साथ ही घास की कटाई आदि का काम भी शहीद का परिवार ही करता है। वीरांगना पार्क में ही स्वयं व सैनिक कल्याण बोर्ड की सहायता से पानी की प्याऊ व पशुओं के पेयजल के लिए छोटे होद का निर्माण भी करवा रही हैं। 



पार्क की चारदिवारी तारबंदी से की गई हैं। उनकी इच्छा है कि पार्क की पक्की चारदीवारी व मेन गेट बनाकर रोशनी की व्यवस्था हो जाए तो यहां से आने-जाने वालों के साथ ही कॉलोनी वासियों को भी सुविधा का लाभ मिल सकेगा।


...ताकि जगे देश प्रेम की भावना


उनकी शहादत के बाद स्मृति-स्मारक बनाकर पार्क विकसित किया ताकि पास से निकलने वालों में भी देश प्रेम की भावना जागृत हो सके। मेनें अपने बलबूते पर ही बेटियों को भी पढ़ाया है। इस दौरान मेरे भाइयों का भी सहयोग रहा। मैं और मेरी बेटियां ही मिलकर पार्क की सुरक्षा और देखभाल करते है

- सीतादेवी, शहीद बाबूलाल विश्नोई की वीरांगना

rajasthanpatrika.com

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