बिना पुस्तकों का पुस्तकालय !

Patrika news network Posted: 2017-04-14 19:27:06 IST Updated: 2017-04-14 19:29:37 IST
बिना पुस्तकों का पुस्तकालय !
  • विद्यार्थियों की मांग है कि समय भी बढ़ाया जाए

बासनी/जोधपुर

केन्द्रीय पुस्तकालय के पत्र पत्रिका कक्ष से हो रहा छात्रों का मोहभंग 

                       

। प्रदेश के दूसरे बड़े विश्वविद्यालयों के नया परिसर के केन्द्रीय पुस्तकालय में आकर अध्ययन करने वाले छात्र छात्राओं की तादाद लगातार घटती जा रही है। 

यहां हालात अभी इस कदर है कि इस पुस्तकालय में प्रतिदिन औसतन आने वाले विद्यार्थियों की संख्या मात्र 40 है। वहीं दूसरी ओर पुस्तकालय के अदंर अलग अलग विभाग बने हुए हैं। उनके आंकडों पर नजर डालें तो इस से भी बूरे हालात है। पत्र पत्रिका कक्ष रोजाना औसतन 7  छात्र ही पढने आते हैं अलग अलग अध्ययन कक्ष में 6 से 10 विद्यार्थी पढने आते हैं। उनमें से अधिकतर नियमित तौर पर आने वाले 10-12 विद्यार्थी है जो रोजाना इन कक्षों में बैठकर अध्ययन करते हंै बाकी विद्यार्थी केवल पुस्तक लेने या जमा करवाने आते हैं और वापिस चले जाते है। जिनकी संख्या औसतन 40 रहती है। 

यहां नियमित आने वाले विद्यार्थियों ने बताया कि नोटिस बोर्ड के अभाव में कुछ विद्यार्थी ऐसे हैं जिनको यह भी नहीं पता होता कि यहां अलग अलग कक्ष अंदर बैठकर पढने के लिए बने हुए हैं। जानकारी के अभाव में विद्यार्थी केवल पुस्तक लेकर वापिस बहार चले जाते हैं। हिंदी विभाग के छात्र अरुण पुरोहित के साथ कुछ ऐसा ही वाकया हुआ। वो नियमित तौर पर पिछले पांच छ महीने से पुस्तकालय आते रहे लेकिन उनको हाल ही में पता चला कि पुस्तकालय में पत्र पत्रिका कक्ष भी है ऐसा अरुण नहीं हजारों विद्यार्थियों के साथ हो चुका है। 

अंग्रेजी के पत्र पत्रिकाओं की मांग 

यहां पुस्तकालय में पत्र पत्रिका कक्ष की बात की जाए तो 8 से 10 तरह के दैनिक व साप्ताहिक पत्र और बीस से अधिक तरह की पत्रिका यहां विश्वविद्यालय में आ रही है। विद्यार्थियों का कहना है कि अंग्रेजी के समाचार पत्र पत्रिकाएं और मंगवाई जाए। अब सेमेस्टर प्रणाली लागू होने के बाद पुस्तकालय प्रशासन यह आस लगाए बैठा है कि विद्यार्थियों की तादाद में इजाफा होगा। यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन फिलहाल केन्द्रीय पुस्तकालय के आंकड़ों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़ा किया है। 

rajasthanpatrika.com

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