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जोधपुर की बेटी ने अमरीका में बढ़ाई भारत की शान, ऑपरेटिंग सिस्टम में बग्स निकाल तुरंत बताए सॉल्यूशन

Patrika news network Posted: 2017-07-12 12:01:24 IST Updated: 2017-07-12 12:01:24 IST
जोधपुर की बेटी ने अमरीका में बढ़ाई भारत की शान, ऑपरेटिंग सिस्टम में बग्स निकाल तुरंत बताए सॉल्यूशन
  • दसवीं की छात्रा वनिशा केशवानी ने कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम में गलतियां ढूंढ लीं। गूगल कॉन्टेस्ट में पकड़े बग्स के माध्यम से कराई पूरे परिवार को अमरीका की सैर भी कराई। अब गूगल ने भविष्य में इंटर्नशिप के लिए संभावनाएं बताते हुए 5 लाख के अवॉड्र्स दिए हैं।

बासनी/जोधपुर

अक्सर हम देखते हैं कि आजकल के टेक्नोफ्रेंडली बच्चे मोबाइल, लैपटॉप पर फेसबुक, व्हाटसअप पर काफी टाइम व्यर्थ में व्यतीत कर देते हैं, लेकिन जोधपुर की वनिशा केशवानी ने यही टाइम 100 पर्सेंट कंज्यूम कर अपने घर वालों को अमरीका की फ्री में सैर करा दी। शहर की डीपीएस स्कूल में इस साल ग्यारहवीं क्लास में प्रवेश करने वाली 16 साल की वनिशा ने पिछले साल सेंट एंस स्कूल सरस्वतीनगर में 10 वीं क्लास के दौरान ही गूगल कोड इन...नाम के कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया था। जिसमें उसने 'हाइकू' नाम के ऑपरेटिंग सिस्टम में बग्स ढूंढा और उसका तुरंत सोल्युशन भी बता दिया। 


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इस तरह उसने 10 से ज्यादा टास्क सही समय पर पूरे किए। गूगल कंपनी के कॉन्टेस्ट के डायरेक्टर जेसोफ टाइट्स ने वनिशा के क्विक सोल्युशन और क्रिएशन देख कर अमरीका के कैलिफोर्निया में गूगल के दफ्तर में बुला कर सम्मानित किया और 5 लाख रुपए की स्मार्ट वॉच, गूगल पिक्सल एक्सल फोन, डे ड्रीम और ट्रॉफी प्रदान की। गूगल ने विश्व में ऐसे 36 होनहार टेक्नोफ्रेंडली स्कूल विद्यार्थियों को चुना। भारत से 5 विद्यार्थियों को गूगल ने कॉल किया। इसमें राजस्थान से एक मात्र वनिशा ही थी। जिसने यह उपलब्धि हासिल की।


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स्कूल में जो सीखा उसी से किया कमाल

वनिशा ने बताया कि उसने कम्प्यूटर की कोई पढ़ाई नहीं की है। स्कूल में कम्प्यूटर की क्लास में जो सीखा, उसी से टास्क की। वह सोशल मीडिया पर भी ज्यादा सक्रिय नहीं है। वह टेक्नोफ्रेंडली जरूर है। यह कॉन्टेस्ट हर साल होता है। वर्ष 2016-17 में हुए इस कॉन्टेस्ट में उसने ऑनलाइन गूगल कोड-इन की टीम को संतुष्ट किया। इसमें उसे इस टास्क के लिए चुन लिया। उसने पिछले साल 28 नवंबर से 17 फरवरी 2017 तक यह टास्क पूरा किया। 


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इसमें उसे हर टास्क के लिए 3 दिन का टाइम मिला। इस टास्क में उसे गलती ढूंढ कर उसका सॉल्युशन भी बताना था। उसे गूगल की ओर से इस दौरान ऑनलाइन 20 अलग-अलग मेन्टर भी मिले, जो उसे टास्क में आने वाली परेशानियों को लेकर समाधान बताते थे। वनिशा भविष्य में बिजनेस वुमन बनना चाहती है। चौपासनी क्षेत्र के शंकरनगर में रहने वाले पिता विजय केशवानी का बिजनेस है। मां गृहिणी हैं। वनिशा अपनी सफलता का श्रेय भगवान और अभिभावक को दिया है।

rajasthanpatrika.com

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