यह पत्थर है मेहरानगढ़ और उम्मेद भवन की शान, सालों बरकरार रहती है जोधपुर के छीतर की मजबूती और चमक

Patrika news network Posted: 2017-02-16 00:41:24 IST Updated: 2017-02-16 00:41:24 IST
यह पत्थर है मेहरानगढ़ और उम्मेद भवन की शान, सालों बरकरार रहती है जोधपुर के छीतर की मजबूती और चमक
  • जोधपुर के छीतर पत्थर की खासियत है कि यह सदियों बाद भी नया लगता है। इसका उदाहरण है 558 साल पुराना जोधपुर का मेहरानगढ़ फोर्ट जो आज भी जस का तस है।

जोधपुर

कहावत है कि जोधपुर की दो ही चीजें प्रसिद्ध हैं छीतर के खंडे और खावन गंडे। इसका अर्थ है छीतर का पत्थर अपनी अनूठी खासियत के कारण प्रसिद्ध है और दूसरा यहां लजीज खाने-पीने के शौकीन बड़ी संख्या में है। जोधपुर के छीतर पत्थर की खासियत है कि यह सदियों बाद भी नया लगता है। इसका उदाहरण है 558 साल पुराना जोधपुर का मेहरानगढ़ फोर्ट जो आज भी जस का तस है।

इसकी गगनचुम्बी और विशालकाय दीवारें सदियों बाद भी नएपन का आभास देती हैं। वहीं उम्मेद भवन में लगा यह पत्थर इस इमारत और शहर की आभा को विश्व में लगातार बढ़ा रहा है। यही वजह है कि छीतर का पत्थर मारवाड़ ही नहीं अपितु देश-विदेश में अपनी पहचान बना रहा है। 

कायल हैं विदेशी पर्यटक

558 सालों के दौरान मेहरानगढ़ ने कितने ही अकाल और कितने ही तूफान देखे। यहां तक कि बाढ़ भी आई, लेकिन छीतर के पत्थरों पर खड़ा यह मेहरानगढ़ आज भी अडिग रूप से खड़ा है। यह छीतर का कमाल है कि हर साल विदेशों से लाखों पर्यटक इसे देखने आते हैं।

 पानी से गलता नहीं, बढ़ जाती है चमक

देश के अन्य पत्थर जहां पानी के कारण गलने लग जाते हैं और पपड़ी बनकर पत्थर निकलने लग जाता है। यहां तक कि पानी से पत्थर काला होने लग जाता है, लेकिन छीतर पत्थर की खासियत है कि यह पानी से गलता नहीं है। यहां तक कि पत्थर की पपड़ी नहीं बनती, बल्कि पानी गिरने से इस पत्थर की चमक और बढ़ जाती है। इसलिए इसे रंगने की आवश्यकता भी नहीं रहती।

वजनी और मजबूत

वहीं अन्य पत्थरों की अपेक्षा यह अधिक वजह सह सकता है। अन्य पत्थरों की अपेक्षा इस पत्थर में ढाई गुणा ज्यादा वजन होता है। इसके चलते इसका लोडिंग और ट्रांसपोर्ट का खर्च ज्यादा आता है।

 

बारीक गढ़ाई के लिए होता है प्रयोग

छीतर के पत्थर का उपयोग मकान की फ्रंट एलिवेशन बनाने में, बारीक गढ़ाई के कार्य में, मकान की छत डालने और मकान की दीवार बनाने में किया जाता है। पुराने समय में इस पत्थर को सीधे ही उपयोग में लिया जाता था, लेकिन आजकल मशीनों के माध्यम से कटिंग करवा कर इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। इसलिए मार्बल की तरह अब यह और भी खूबसूरत दिखाई देता है। इसका रंग बादामी है।

फैक्ट फाइल

3500 खानें हैं जोधपुर में छीतर पत्थर की

1200 से 1400 टन माल एवरेज सालाना एक खान से निकलता है

300 से 350 रुपए प्रति घनफुट की दर से बिक रहा है बेहतरीन छीतर पत्थर

80 से 100 रुपए प्रति घनफुट की दर से बिकता है हल्का छीतर पत्थर


सदियों बाद भी नया जैसा

इस पत्थर की खासियत है कि यह सबसे ज्यादा मजबूत है और सदियों बाद भी नया बना रहता है। उम्मेद भवन में लगा भी यह पत्थर ऐसा दिखता है, जैसे आज ही लगाया गया हो। आज भी इस पत्थर की मांग राजस्थान ही नहीं पूरे देश में रहती है। हालांकि वजनी पत्थर होने के कारण ट्रांसपोर्ट में यह महंगा पड़ता है, इसलिए हर कोई इसे नहीं लेता। छीतर का पत्थर कई हेरिटेज इमारतों और सरकारी भवनों की आभा बिखेर रहा है।

-पूनाराम गहलोत, अध्यक्ष, फिदूसर पत्थर उद्योग एवं विक्रेता संघ

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