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इस प्रशिक्षक ने एेसा क्या किया कि दिव्यांग बच्चों की कमी ही बन गई उनकी ताकत

Patrika news network Posted: 2017-03-02 00:20:29 IST Updated: 2017-03-02 00:20:29 IST
इस प्रशिक्षक ने एेसा क्या किया कि दिव्यांग बच्चों की कमी ही बन गई उनकी ताकत
  • कोई सुन नहीं सकता, तो कोई बोल नहीं सकता। कोई देख नहीं सकता, तो कोई ठीक चल भी नहीं सकता। इनमें कई मंदबुद्धि वाले भी हैं।

जोधपुर

कोई सुन नहीं सकता, तो कोई बोल नहीं सकता। कोई देख नहीं सकता, तो कोई ठीक चल भी नहीं सकता। इनमें कई मंदबुद्धि वाले भी हैं। इसके बावजूद इन बच्चों की कमी को ही ताकत बनाने का काम कर रहे हैं कोच महेश कुमार पारीक। वे दिव्यांग बच्चों को विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण देकर उनका हौसला बढ़ा रहे हैं और उनको राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार कर रहे हैं।

बड़े भाई से मिली प्रेरणा

महेश ने बताया कि वर्ष 1996 में एमए अंग्रेजी में करने के बाद ट्यूशन किए। इस दौरान इनके बड़े भाई, जो मानसिक विमंदित व दिव्यांग बच्चों के लिए काम करते थे, ने दिव्यांग बच्चों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद इन्होंने इन्हीं विशेष बच्चों के लिए काम करने का निर्णय लिया।


 इसके लिए इन्होंने स्पेशल एजुकेशन का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद भोपाल से मानसिक विमंदित बच्चों के प्रशिक्षण के लिए फाउण्डेशन कोर्स किया। वहां उन्होंने श्रवण बाधित, दृष्टि बाधित, शारीरिक दिव्यांग व मानसिक विमंदित बच्चों को खेलों में पारंगत बनाने का प्रशिक्षण लिया।

55 राष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार किए

महेश वर्ष 2008 में मानसिक विमंदित बच्चों के विकास के लिए एक केन्द्र से जुड़ गए और बच्चों को प्रशिक्षण देने लगे। इस दौरान, इन्होंने दिव्यांग बच्चों के लिए काम करने वाले राष्ट्रीय संघ स्पेशल ओलंपिक भारत (एसओबी) से जुडऩे के लिए मास्टर ट्रेनर का सर्टिफिकेट कोर्स किया और मास्टर ट्रेनर बने। इन 9 सालों में इन्होंने 55 बच्चों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। साथ ही, दो बच्चों को दिव्यांगों की अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिता के लिए प्रशिक्षित किया। 


इनमें एक बच्चे को वर्ष 2011 में एथेन्स में आयोजित वल्र्ड समर गेम साइकिलिंग चैम्पियनशिप के लिए प्रशिक्षित किया था। वर्तमान में एक मानसिक मंदबुद्धि बालिका को आस्ट्रेलिया में आयोजित होने वाली वल्र्ड विंटर गेम के लिए तैयार कर रहे हैं।

 प्रतिभा निखारना व तैयार करना ध्येय

महेश ने बताया कि मानसिक विमंदित व दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा निखार कर विभिन्न कॉम्पीटिशन के लिए तैयार किया जाता है। इन बच्चों को क्रिकेट के अलावा सभी खेलों का प्रशिक्षण दिया जाता है, और खेल खिलाए जाते हैं। विशेष बच्चों को प्रशिक्षित करने में बहुत धैर्य व संयम की जरूरत होती है। 

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