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क्या सब कुछ लुटने के बाद होश में आएगा जोधपुर का वनविभाग!

Patrika news network Posted: 2017-06-20 20:06:17 IST Updated: 2017-06-20 20:06:17 IST
क्या सब कुछ लुटने के बाद होश में आएगा जोधपुर का वनविभाग!
  • जोधपुर की 441 हेक्टेयर वनभूमि पर बस गई 40 बस्तियां, एक दशक से पर्यावरण समिति की बैठक सिर्फ औपचारिकता

नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर

जोधपुर शहर की सीमा में सात वनखंडों में आबाद 40 बस्तियों में करीब 25 हजार से अधिक कब्जे होने के बाद भी वनविभाग होश में नहीं आया है। पर्यावरण को बचाने के लिए जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला पर्यावरण समिति की बैठक भी एक दशक से कागजी रह गई है। जोधपुर की वनभूमि पर अंधाधुंध अतिक्रमण बढऩे के बावजूद समिति की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई है।

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जेडीए के समानान्तर काम कर रहे भू माफिया ने तथाकथित जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर सरकारी तंत्र पर दबाव बनाने के बाद शहर की लाइफ लाइन माने जाने वाली वनभूमियों को तबाह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। वनमंडल जोधपुर के अधीन अमल दरामद से वंचित 13 हजार 750 हेक्टेयर वन भूमि पर भी भू माफिया की नजर है। पूरे संभाग में 23 हजार 362 हेक्टेयर भूमि राजस्व रिकॉर्ड में शामिल है।


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कच्ची बस्तियों के नियमन में कानूनी पेच

शहर की वन भूमियों पर बसी बस्तियों के नियमन में सबसे बड़ी समस्या अनारक्षण प्रस्ताव के नियम व शर्तें है। वनभूमि प्रत्यावर्तन के लिए राज्य सरकार को भारत सरकार से मंजूरी के बाद समान क्षेत्रफल यानि 441.11 हेक्टेयर जमीन वनविभाग को उपलब्ध करानी होगी। उपलब्ध कराए जाने वाली भूमि के विकास के लिए 9 लाख 20 हजार प्रति हेक्टेयर की दर से एनपीवी यानि नेट प्रजेन्ट वैल्यू राशि वनविभाग के कोष में जमा करानी पड़ेगी। एनपीवी राशि संबंधित यूजर एजेन्सी (जेडीए अथवा निगम) को वहन करना होगा।


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सुप्रीम कोर्ट आदेश की हो रही अवहेलना

उच्चततम न्यायालय ने वन भूमियों पर अतिक्रमण तथा गैर वानिकी कार्य की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए 12 दिसम्बर 1996 को अपने फैसले में कहा कि जब तक वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत किसी भी वन भूमि पर गैर वानिकी कार्य के लिए भारत सरकार मंजूरी नहीं देती, तब तक वहां कोई निर्माण नहीं हो सकता है।


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वनों की सुरक्षा के लिए नहीं पर्याप्त स्टाफ


वन विभाग में कर्मचारियों की नई भर्ती ऊंट के मुंह में जीरे के समान है, जबकि आला अफ सरों के पदों को निरंतर बढ़ाया जा रहा है। जोधपुर वन मुख्यालय के अधीन डीडीपी जैसलमेर में 127 में से 45, इंदिरा गांधी नहर परियोजना स्टेज द्वितीय में कुल 204 में से 86, उपवन संरक्षक कार्यालय जालोर में कुल 107 में से 47, पाली में 102 में से 16, बाड़मेर में कुल 168 में से 88, सिरोही में 224 में से 125, जोधपुर वन मंडल में 177 में 50 से अधिक पद रिक्त हैं।


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प्रदेश में वनक्षेत्र की वैधानिक स्थिति

प्रदेश में कुल 32 हजार 828.35 वर्गकिमी वन क्षेत्रफल है, जिसमें आरक्षित वन 12 हजार 352.75, रक्षित वन 18 हजार 408.37 तथा अवर्गीकृत वन 2 हजार 66.73 वर्गकिमी है।


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प्रदेश में मात्र 7384 प्रकरण दर्ज

वनभूमि से अतिक्रमियों को बेदखल करने के लिए राज्य सरकार ने संबंधित सहायक वन संरक्षकों को तहसीलदार की समस्त शक्तियों एवं कर्तव्यों के प्रयोग के लिए अधिकृत किया है। इन प्रावधानों के बावजूद वर्ष 2015-16 में करीब 7 हजार 259 हेक्टेयर वनक्षेत्र में 7384 प्रकरण अतिक्रमण के दर्ज है।


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अतिक्रमण से निपटने एक्शन प्लान बनेगा

जोधपुर की वनभूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए मुख्य वन संरक्षक से चर्चा कर नया एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा। कुछ कानूनी अड़चनों के कारण वनभूमि पर अतिक्रमण हटाने में समस्या आ रही है। कुछ मामले एसीएफ कोर्ट में विचाराधीन है। पर्यावरण समिति की बैठक की मुझे जानकारी नहीं है।

-एचआर चौधरी, उपवन संरक्षक जोधपुर

rajasthanpatrika.com

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