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पिता का सपना पूरा कर, किया अपना सपना साकार

Patrika news network Posted: 2017-06-12 14:52:39 IST Updated: 2017-06-12 14:57:32 IST
पिता का सपना पूरा कर, किया अपना सपना साकार
  • महिला डॉक्टर ने सिविल सेवा परीक्षा में लहराया परचम

बासनी(जोधपुर)

पिता का सपना था कि उनकी बेटी डॉक्टर बने...। बेटी ने जीजान से पढ़ाई की और मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर चिकित्सक के रूप में जरूरतमंद लोगों की सेवा की...। लेकिन खुद के मन के कोने में भी कहीं न कहीं एक और सपना पल रहा था।



 सिविल सेवा में जाने का। पिता का सपना पूरा करने के बाद अपना सपना साकार करने की राह पर चल पड़ी और डॉ. सुनीता कुमारी ने वर्ष 2017 की सिविल सेवा परीक्षा में 862वीं रैक पर चयनित होकर उसे पूरा किया। 



कमला नेहरू नगर निवासी डॉ. सुनीता कुमारी वर्तमान में राजकीय अस्पताल बनाड़ में चिकित्साधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। डॉ. सुनीता के पिता का मदनलाल पूनिया खुद का व्यापार करते हैंं और पति रमेश चौधरी बीएसएफ केन्द्रीय विद्यालय में व्याख्याता पद पर कार्यरत हैं। सुनिता के परिवार में एक 4 वर्ष का पुत्र मानवेन्द्र है।

पिता के सपनों को पूरा करने बनी डॉक्टर


डॉ. सुनीता ने बताया उसके पिता की इच्छा थी की मैं डॉक्टर बन कर जरूरतमंदों की सेवा करूं। उनके सपनों को साकार करने के लिए मैंने पीएमटी परीक्षा के लिए तैयारी की और उर्तीण होकर अजमेर के मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की।



इसके बाद पीजी के बजाय सिविल सेवा का मन बना लिया लेकिन पिता के सपनों को पूरा करने के लिए डॉक्टरी की पढ़ाई भी जारी रखी। इसी दौरान मेरा सरकारी चिकित्साधिकारी के पद पर चयन हो गया। 



...जारी रखी कोशिश


चिकित्सक के पद की जिम्मेदारी सम्भालने के बाद भी डॉ. सुनीता ने पढ़ाई जारी रखी। ड्यूटी के साथ पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा था, लेकिन फिर भी हिम्मत नहीं हारी और एक के बाद एक पांच प्रयास किए और आखिर में छठे प्रयास में भारतीय सिविल सेवा में 862वां स्थान प्राप्त किया। हालांकि सुनीता को परीक्षा में उच्च स्थान न मिलने का मलाल जरुर हैं।


सुनिता चौधरी से पत्रिका से बातचीत के अंश

रिपोर्टर-  सुनिता जी आपको सिविल सेवा में चयन होने पर बहुत बधाई!


सुनिता-  धन्यवाद।


रिपोर्टर-  आपका यह कौनसा प्रयास था?


सुनिता-  इस बार मेरा यह छठा प्रयास था। इससे पहले 5 बार परीक्षा में भाग लिया था जिसमें मेरा 4 बार प्री परीक्षा में पास कर मुख्य परीक्षा में भाग लिया लेकिन पर साक्षात्कार में चयन नहीं हो पा रहा था। इस वर्ष प्रथम बार मेरा न केवल साक्षात्कार बल्कि अंतिम चयन भी हो गया।               

       

रिपोर्टर- आपका परीक्षा में माध्यम क्या था?    


सुनिता-  मैंने परीक्षा के लिए हिन्दी माध्यम चुना था। मेरी पढ़ाई विज्ञान संकाय से हुई है उसमें हालांकि मेरा माध्यम अग्रेजी था फिर भी मैंने हिन्दी को चुनना उचित समझा। 


रिपोर्टर- आपका परीक्षा में वैकल्पिक विषय क्या था?


सुनिता- मैंने वर्ष 2011 में पहले प्रयास में वैकल्पिक विषय के रुप में लोकप्रशासन इतिहास विषय को चुना... लेकिन बाद में परीक्षा के पैर्टन में बदलाव हो गया जिसमे एक ही विषय चुन सकते थे तब मैंने इतिहास विषय को चुना था। लेकिन बार-बार चयन न होने पर इस वर्ष मैंने संस्कृत विषय को चुना और मेरा यह फैसला सही साबित हुआ।


रिपोर्टर-  आपके साक्षात्कार में क्या प्रशन पुछे गये? 


सुनिता-  मेरा साक्षात्कार 35 से 40 मिनट तक लिया गया। वैसे तो अनेक सवाल पुछे गये उसमें राजस्थान के इतिहास व संस्कृति के बारे में सामान्य जानकारी व विज्ञान विषय के प्रशन भी पुछे गए।


रिपोर्टर- आपने सिविल सेवा तैयारी के लिए कोचिग कहा से ली? क्या आप कोचिग को परीक्षा तैयारी के लिए जरुरी मानती हैं?


सुनिता-  मैंने वर्ष 2011 में प्रथम बार परीक्षा के लिए कोचिग का सहारा लिया था उसके बाद मेने यह महसुस किया कि बिना कोचिग भी अच्छे से तैयारी कि जा सकती है। मेरी नजर मैं कोचिग जाकर पैसे और समय की बर्बादी करना हैं।


रिपोर्टर-  अपनी सफलता का श्रेय किन्हें देना चाहती हैं?


सुनिता-  मैं  अपनी सफलता का श्रेय भग्वान को, अपने पिता मदनलाल पुनिया, माता सायरी देवी, सास-ससुर भंवरलाल, पति रमेश चौधरी व मेरी दोस्त सीमा विश्नोई को देना चाहुँगी ।


रिपोर्टर- आप समाज में बेटियों कि शिक्षा के बारे में क्या संदेश देना चाहेगी?


सुनिता- अगर हर परिवार बेटियों को अच्छे परिवेश में उतम शिक्षा प्रदान की जाए तो एक न एक दिन जरुर देश व परिवार का नाम रोशन करेगी। मेरे माता पिता ने उतम शिक्षा मुझे प्रदान की जिसका परिणाम है की मैं आज इस मुकाम पर पंहुचने में सफल रही। 


रिपोर्टर- आप सिविल सेवा की तैयारी करने वाले युवाओं को क्या संदेश देना चाहते है?


सुनिता- प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए नियमित अध्ययन किया जाये तो कोई भी परीक्षा में सफलता हासिल करना कठिन नहीं है।

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