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जेल में खुले आम चल रहा 'साजिश' का 'खेल'

Patrika news network Posted: 2016-12-02 00:30:40 IST Updated: 2016-12-02 00:30:40 IST
जेल में खुले आम चल रहा 'साजिश' का 'खेल'
  • देश की सुरक्षित मानी जाने वाली जोधपुर सेंट्रल जेल से तीन बंदियों के भागने के प्रयास की घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवालिया निशान लगा दिए हैं। ये बंदी पिछले कई दिनों से जेल से भागने की साजिश रच रहे थे, लेकिन जेल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी।

जोधपुर

देश की सुरक्षित मानी जाने वाली जोधपुर सेंट्रल जेल से तीन बंदियों के भागने के प्रयास की घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवालिया निशान लगा दिए हैं। ये बंदी पिछले कई दिनों से जेल से भागने की साजिश रच रहे थे, लेकिन जेल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी।

बंदियों ने कब कम्बल की रस्सी बनाई तथा वे कब दीवार पर जा चढे़, इस संबंध में जेल के प्रहरियों को पता तक नहीं चला। इतना कुछ हो जाने के बावजूद किसी को भनक तक नहीं लगना, यह बात गले नहीं उतरती है। बंदी जेल की करंट वाली तारबंदी भी फांद चुके थे, लेकिन तब तक जेल प्रहरी चैन की बंशी ही बजा रहे थे।

आखिरकार दीवार के उस तरफ गिरते समय करंट लगने से वे चिल्लाएं तो जेल सुरक्षाकर्मियों को घटना का पता चला। इसके बाद जेल में सायरन बजा और सब अलर्ट हुए। भागने का प्रयास करने वाले बंदी जेल के वार्ड नम्बर सात के बैरक नम्बर चार में बंद थे। बंदी वीरम एनडीपीएस व अमृत और नेमाराम दुष्कर्म के आरोप में बंद थे।

जेल अधीक्षक छुट्टी पर, पुलिस को भी नहीं बताया

जेल की सुरक्षा रामभरोसे ही है। जेल अधीक्षक विक्रम सिंह छुट्टी पर है। पीछे जेलर सरोज व एक अन्य अधिकारी है, वे जेल सुरक्षा की परवाह नहीं करते। बंदियों के भागने की घटना के एक घंटे तक जेल प्रशासन ने पुलिस को नहीं बताया। आखिरकार पुलिस अपने महकमे के अधिकारियों की सूचना पर मौके पर पहुंची। अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि इस साजिश में और कौन बंदी शामिल है।

भोपाल व नाभा जेल काण्ड के बाद किया था अलर्ट

जेल प्रशासन की लापरवाही एेसे सामने आती है कि मध्यप्रदेश की भोपाल जेल से 8 आतंकियों के भागने व पंजाब के नाभा जेल से आतंकियों को भगाने की घटना के बाद जेल में अलर्ट किया था। 


इसके बावजूद जेल अधिकारी लापरवाही बरतते रहे। जेल में संदिग्ध आतंकी, संदिग्ध सिमी कार्यकर्ता के अलावा आसाराम जैसे कई बंदी बंद है। लेकिन सुरक्षा ताक पर है। इसके अलावा इस जेल में पिछले छह माह में चार सुरक्षाकर्मी जेल में अफीम ले जाते पकड़े गए है। 


मोबाइल मिलने की भी कई बार घटना हो चुकी है। एेसे में जेल की सुरक्षा में लगातार सेंध लगाई जा रही है और जेल प्रशासन नींद में है।


तीन साल पहले भी कम्बल की रस्सी से ही भागा था

सूत्रों की मानें तो वर्ष 2013 में एक बंदी, जो नकबजनी के मामले में सेंट्रल जेल में बंद था। उसने कम्बल की रस्सी बनाकर जेल की दीवार फांद दी थी। वह जेल की करंट की तारबंदी को भी फांद गया था। मशक्कत के बाद बनाड़ थाना पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था।


हो चुकी है जेलर की हत्या

सितंबर 2010 में फिल्म अभिनेता व जोधपुर सेंट्रल जेल के जेलर भारतभूषण भट्ट की एक कैदी ने हत्या कर दी थी। कैदी की नरेंद्र के रूप में पहचान हुई थी। उसने एक तेज धारदार हथियार से उसकी गर्दन पर हमला कर मार डाला था। इस जेल में मादक पदार्थ, मोबाइल व फेसबुक पर बंदियों और कैदियों द्वारा फोटो डालना आम बात है। 

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