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VIDEO गजब : यहां के युवक कभी स्कूल नहीं गए फिर भी बोलते हैं 4 विदेशी भाषाएं, फर्राटेदार अंग्रेजी भी

Patrika news network Posted: 2017-02-15 12:08:10 IST Updated: 2017-02-15 12:14:53 IST
  • झुंझुनूं जिले में मंडावा कस्बे में कई युवकों ने विदेशी पर्यटकों को कठपुतली व कलेंडर बेचकर ही सीख ली उनकी भाषा। मंडावा दिल के झरोखे सी हवेलियों का कस्बा है। यहां सालभर हजारों विदेशी पर्यटक हवेलियों को निहारने आते हैं। बॉलीवुड की कई फिल्मों की शूटिंग भी यहां

जितेन्द्र सिंह शेखावत मंडावा.

ये कभी स्कूल नहीं गए। किसी का पढऩे का मन नहीं था तो किसी की राह अभावों ने रोक ली थी, मगर आज ये फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं। एक नहीं बल्कि चार-चार विदेशी भाषाएं जानते हैं। विदेशी सैलानियों से उन्हीं की भाषा में इन्हें बातचीत करता देख कोई कह भी नहीं सकता कि ये युवक अनपढ़ हैं।


यह कमाल कर दिखाया है मंडावा के कन्हैया, जावेद, काला लीलगर, सिंकदर, हनीफ व जीतू आदि युवाओं ने। मंडावा दिल के झरोखे सी हवेलियों का कस्बा है। यहां सालभर हजारों विदेशी पर्यटक हवेलियों को निहारने आते हैं। बॉलीवुड की कई फिल्मों की शूटिंग भी यहां हो चुकी हैं।


कई बन गए गाइड

कई युवकों ने तो कपड़े और कठपुतली बेचने से लेकर गाइड बनने तक का सफर तय कर लिया है। जो पर्यटक अपने साथ जयपुर या दिल्ली से गाइड लेकर नहीं आते हैं। वे पर्यटक इन्हीं युवकों की मदद लेते हैं। ये उनकी भाषा के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन स्थलों की भी पूरी जानकारी रखते हैं। इसके अलावा कई युवकों ने भाषा का ज्ञान होने के कारण यहां पर दुकान भी खोल रखी हैं।


यूं शुरू हुआ सफर

मंडावा में जब पर्यटन व्यवसाय परवान चढ़ा तो यहां काफी पर्यटक आने लगे। पर्यटक कठपुतली, कलेंडर व स्थानीय कपड़ों में खासी रूची दिखाते थे, लेकिन विदेशी सैलानियों की भाषा समझ में नहीं आना युवकों के सामने बड़ी समस्या थी। शुरुआत में युवक इशारों-इशारों में सामान बेचा करते थे।


पर्यटकों के साथ आने वाले टूर एस्कोर्ट लीडर और पर्यटक के बीच होने वाले संवाद पर भी गौर करते। धीरे-धीरे इन्हें न केवल विदेशी पर्यटकों की भाषा समझ में आने लगी बल्कि ये अंग्रेजी, स्पेनिश, इटालियन व फें्रच आदि विदेशी भाषाएं बोलने भी लगे।


गरीबी के कारण कभी स्कूल नहीं जा पाया। कस्बे में आने वाले पर्यटक को कुछ वस्तुएं बेचकर ही उनकी भाषाएं सीख गया। चार भाषाएं आसानी बोल व समझ लेता हूं।

जावेद, वार्ड 20 मंडावा

गाइड का काम करता हूं। 7 साल का था तब स्कूल तो नहीं गया, मगर पर्यटकों के सम्पर्क में आ गया था। मंडावा के पर्यटन स्थलों के बारें में पर्यटकों से कई भाषाओं में बातचीत करता हूं।

काला लीलगर, मंडावा

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