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आपदा प्रबंधन कागजों में

Patrika news network Posted: 2017-06-17 21:03:49 IST Updated: 2017-06-17 21:03:49 IST
आपदा प्रबंधन कागजों में
  • राहत के इंतजामों में कागजी घोड़े दौड़ा रहा है, झालावाड़ पत्रिका फेसबुक पेज लाइक करना व खबर शेयर करना न भूले

झालावाड़.

झालावाड़. मानसून की दस्तक अगले सप्ताह से शुरू हो जाएगी, लेकिन जिला प्रशासन आपदा राहत के इंतजामों में कागजी घोड़े दौड़ा रहा है। तेज बारिश के दौरान काम आने वाली नाव पूरी तरह से खस्ताहाल है। 

इसी तरह नाव में कई जगह से तकनीकी खराबी भी आई हुई है। वहीं एक एयर बोट है जो दुर्दशा का शिकार हो रही है। जिले के तीन प्रमुख बांधों भीमसागर, छापी व चंवली में कई बार पानी की अधिक आवक के चलते यहां सीमेंट के कट्टों के इंतजाम किए जाते है। 

लेकिन अब तक तीनों प्रमुख बांधों पर पानी की अधिक आवक होने पर इसकी रोक के इंतजाम नहीं है। सिर्फ भीमसागर बांध पर ही गेट की मरम्मत का कार्य शुरू कराया है। 

अलार्म व बजर जरूरी 

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बांधों में पानी की तेज आवक के चलते निकट गांवों में पानी भरने की आशंका के चलते अलार्म व बजर के माध्यम से ग्रामीणों को सूचना दी जाती है, लेकिन अब तक अलार्म व बजर सिस्टम को विकसित नहीं किया गया है। 

जिले के कनवाड़ा समेत गागरीन व अन्य लघु सिंचाई परियोजनाओं का पानी कई बार बस्तियों में चला जाता है। इस बारे में कई बार ग्रामीणों ने कई बार लिखित में भी अवगत कराया है। 

हो चुके हैं हादसे

मानसून की तेज बारिश के दौरान पहले भी कई तरह के डूब के मामले सामने आ चुके है। पिछले तीन वर्षों में करीब आधा दर्जन से अधिक पानी में डूबने  के मामले सामने आए है। 

इनमें सर्वाधिक कालीसिंध नदी का बहाव अधिक होने व  सुनेल सामिया पुलिया तथा पीपाजी व बिंदु दह में पानी की अधिक आवक में नहाने व पिकनिक के दौरान कई हादसे हो चुके है। हालांकि आपदा प्रबंधन को लेकर जिला प्रशासन की बैठकें हो चुकी है लेकिन व्यवस्था के नाम पर नतीजा ढाक के तीन पात है।

जीवन रक्षक जैकेट नहीं 

बाढ़ से बचने के इंतजामों में जीवन रक्षक जैकेट   उपलब्ध नहीं है। वहीं गोताखारों समेत अन्य प्रबंध किए जाने शेष है।

डूबने से बचाने के लिए सर्वप्रथम जीवन रक्षक जैकेट की आवश्यकता होती है। इसके लिए अब तक विभाग के पास कोई इंतजाम नहीं है। 

वहीं बांधों के समीप आपदा आने के दौरान  लगाए जाने वाले चेतावनी बोर्ड भी अब तक नहीं लगाए जा सके है। इसके चलते आपदा राहत कार्यक्रमों पर प्रश्नचिंह लगा हुआ है।

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