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ग्रेनाइट उद्यमियों ने ऐसा क्या किया कि, राह चलते लोग ठिठक कर उन्हें देखने लगे

Patrika news network Posted: 2017-07-13 12:14:25 IST Updated: 2017-07-13 12:14:25 IST
ग्रेनाइट उद्यमियों ने ऐसा क्या किया कि, राह चलते लोग ठिठक कर उन्हें देखने लगे
  • जालोर . ग्रेनाइट उद्योग पर जीएसटी की दरों को लेकर विरोध बरकरार है। 12वें दिन उद्यमियों ने विरोध का नया तरीका अपनाया। नारेबाजी कर उद्यमियों ने शहर में थाली पीटते हुए विरोध रैली निकाली।

जालोर . ग्रेनाइट उद्योग पर जीएसटी की दरों को लेकर विरोध बरकरार है। 12वें दिन उद्यमियों ने विरोध का नया तरीका अपनाया। नारेबाजी कर उद्यमियों ने शहर में थाली पीटते हुए विरोध रैली निकाली। शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए उद्यमियों ने रैली निकाली। उद्यमियों का इस तरह का विरोध प्रदर्शन देख एक बार तो मार्ग से गुजरने वाले लोग भी चौंक गए। रैली विभिन्न मार्गों से होते हुए कलक्ट्रेट पहुंची। यहां पर उद्यमियों ने सरकार की नीतियों के विरोध में नारेबाजी की।साथ ही थालियां पीट पीट कर विरोध किया। इसके बाद उद्यमियों ने मांगों को लेकर एडीएम नरेश बुनकर को ज्ञापन सौंपा।

जीएसटी की दर कम करने की मांग

उद्यमियों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि सरकार ने हाल ही में ग्रेनाइट पर 28  प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया है। जो काफी अधिक है। इस स्थिति में उद्योग को सीधा  नुकसान हो जाएगा। ज्ञापन में बताया गया है कि पूर्व में वेट मात्र 5 प्रतिशत ही था, लेकिन अब अप्रत्याशित रूप से जीएसटी की दर को बढ़ाया गया है, जबकि उद्यमी 12 से 15 प्रतिशत तक जीएसटी पर सहमत थे। विरोध के चलते जालोर में 1500 यूनिट अनिश्चिलकालीन बंद है। जिससे किसी भी तरह का प्रोडक्शन, निर्यात व निर्गम नहीं हो रहा है। सभी उद्यमी व प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए करीब 1 लाख 25 हजार मजदूर बेरोजगार होने जा रहे है। ज्ञापन में बताया गया है कि जालोर के अलावा उदयपुर, चितौड़, किशनगढ़, राजनगर, आबूरोड, पाली, रूपनगढ़ एवं केसरियाजी उद्योग भी हड़ताल पर चल रहे हैं। इन सभी स्टोन मंडियों से जुड़े हुए करीब 50 लाख मजदूर व मालिक असमंजस की स्थिति में है व उन्हें लग रहा है कि 28  प्रतिशत जीएसटी देने की बजाय फैक्ट्री को बंद कर विद्युत कनेक्शन कटाने में ही फायदा है। इसी के साथ साउथ इंडिया ग्रेनाइट उद्योग भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का विचार कर रहे है। इस हड़ताल के चलते ट्रक एसोसिएशन का भी कार्य ठप हो चुका है। इस उद्योग के चलते अन्य व्यापर भी ठप है।

चाइना मार्केट को फायदा

ज्ञापन में बताया गया है कि सरकार की नीति का सीधा असर चाइना के ग्रेनाइट मार्केट को होगा। सरकार की नीति में बदलाव नहीं होता है तो यहां का ग्रेनाइट उद्योग बंद होने के कगार पर होगा। दूसरी तरफ इस स्थिति में चाइना के मार्केट को सीधी तौर पर फायदा पहुंचेगा। जिससे बेरोजगारी के साथ साथ भारतीय मुद्रा का भी नुकसान होगा।

 प्रतिनिधि मंडल गठित

जीएसटी की दरों को लेकर जारी विरोध के बीच ग्रेनाइट उद्यमियों के प्रतिनिधि मंडल का गठन किया गया। बुधवार को दो प्रतिनिधि मंडल गठित किए गए, जिनमें से एक जयपुर और एक दिल्ली में सरकार तक उद्यमियों की मांग को पहुंचाएगा। इधर, जीएसटी की दरों को कम करने के लिए ग्रेनाइट उद्यमी सांसद देवजी पटेल और जालोर विधायक अमृता मेघवाल से मिले। इस दौरान उन्होंने समस्या से अवगत करवाया। जनप्रतिनिधियों ने मांग को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

इनका कहना

जीएसटी की तर्कसंगत दरों को लागू करने की मांग को लेकर विरोध जारी है।सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है। उद्योग 12 दिन से बंद होने से इस उद्योग से जुड़े मजबूर वर्ग को भी नुकसान हो रहा है।

- लालसिंह राठौड़, अध्यक्ष, ग्रेनाइट एसोसिएशन, जालोर

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