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जालोर नगर परिषद में शपथ पत्रों की साख पर सवाल

Patrika news network Posted: 2017-03-19 10:43:45 IST Updated: 2017-03-19 10:43:45 IST
जालोर नगर परिषद में शपथ पत्रों की साख पर सवाल
  • निर्माण कार्य आधे से अधिक पूरा होने के बाद नगरपरिषद की ओर से ऐसे भवनों को सीज करने या नोटिस देने की कार्रवाई

जालोर. नगर परिषद में पेश किए जाने वाले भवन निर्माण संबंधी शपथ पत्रों में आवेदकों की घोषणाएं महज कागजी नजर आ रही है। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भवन मालिकों की ओर से दिए जाने वाले इन शपथ पत्रों में नियम कायदों की पूरी पालना करने की बात तो कही जाती है, लेकिन निर्माण मनमर्जी से ही किया जाता है। निर्माण कार्य आधे से अधिक पूरा होने के बाद नगरपरिषद की ओर से ऐसे भवनों को सीज करने या नोटिस देने की कार्रवाई की जाती है। ऐसे में भवन मालिकों की ओर से पेश किए जाने वाले इन शपथ पत्रों की साख पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में वार्ड संख्या 29  के पार्षद ने शहर के वन वे रोड पर नगरपरिषद की ओर से सीज किए गए कॉम्पलेक्स के मालिक को जारी की गई निर्माण इजाजत को लेकर आपत्ति जताई है। पार्षद जितेंद्रकुमार प्रजापत ने बताया कि आरटीआई के तहत उन्हें मिली सूचना में बताया गया कि आवेदक दिलीपकुमार पुत्र लालचंद भण्डारी को वर्ष 2012 में आवासीय प्रयोजनार्थ निर्माण इजाजत दी गई थी। जिसमें उसने सेट बैक व पार्किंग की जगह छोडऩे के लिए लिखा था, लेकिन आज दिन तक यह जगह नहीं छोड़ी गई। आवासीय इजाजत के बावजूद भवन मालिक की ओर से व्यवसायिक कॉम्पलेक्स का निर्माण कराना चाहा और इसकी शिकायत भी हुई। जिसके बाद एडीएम ने 30 मार्च  2012  को नगरपालिका अधिनियम के तहत कार्रवाई के आदेश दिए, लेकिन कार्रवाई के नाम पर बेसमेंट न डालने का नोट डालकर आवासीय निर्माण की इजाजत दे दी गई।

इस तरह चली परिषद की कार्रवाई

पार्षद प्रजापत की ओर से मांगी गई सूचना में बताया कि इसके बाद 27 जुलाई 2012 को आवेदक से सेट बैक छोडऩे को लेकर 100 रुपए का एक और शपथ पत्र लिया गया। वहीं 15 मई 2014 को कार्य बंद करने का नोटिस दिया गया। बाद में परिषद ने 1 जनवरी 2015 को आवासीय से वाणिज्यिक की अनुमति देने व 4 लख 20 हजार चार सौ तीन रुपए वसूलने का निर्णय लिया।

कार्रवाई ड्रॉप कर खोला सीजर

इसी तरह 16 अप्रेल 2015 को नगरपरिषद की ओर से नियमों के उल्लंघन का नोटिस देकर नवीन प्लान लिया गया। वहीं मौका देखने के बाद 13 जनवरी 2017 को आयुक्त चारण द्वारा भवन सीज कर दिया गया। इसके बाद गत 1 फरवरी सीजर खोलने की कार्रवाई करते हुए 6  माह में फिर से सेट बैक और पार्किंग छोडऩे को लेकर 500 रुपए के स्टाम्प पर वचन पत्र लिया गया। जिसमें आगामी बैठक के निर्णय को स्वीकारने की बात लिखी थी। इस तरह गत १४ फरवरी को कार्यवाही ड्रॉप कर सीजर खोल दिया गया।

अतिक्रमण कर मार्ग पर बना दी सीढिय़ां

पार्षद प्रजापत ने बताया कि भवन मालिक की ओर से मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण कर सीढिय़ां भी बनाई गईहैं। जबकि परिषद की ओर से इस मामले में भी कोई कार्रवाई तक नहीं की गई। इधर, इस मामले में पार्षद ने कलक्टर को पूरी पत्रावली की प्रति और ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच कराने और संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

परिषद का पक्षपात पूर्ण रवैया

परिषद ने एक दिव्यांग महिला के घर के आगे बनी सीढिय़ां कलक्टर की मौजूदगी में जेसीबी से तुड़वा दी थी, लेकिन रसूखदारों के खिलाफकार्रवाईनहीं कर रही।इस तरह बार-बार नियम तोडऩे वाले के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना पक्षपात पूर्ण रवैया दर्शाता है। कलक्टर से इस मामले की जांच कराकर निर्माण कार्य रुकवाने और कॉम्पलेक्स के बाहर अतिक्रमण कर बनाई गई सीढिय़ां तोडऩे की मांग की है।

- जितेंद्रकुमार प्रजापत, पार्षद

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