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जालोर के अस्पताल में सहेजा जाएगा 'अमृत'

Patrika news network Posted: 2017-07-12 19:40:35 IST Updated: 2017-07-12 19:40:35 IST
जालोर के अस्पताल में सहेजा जाएगा 'अमृत'

जालोर. जिले के मदर एंड चाइल्ड केयर होम में जल्द ही आंचल मदर मिल्क बैंक स्थापित होगा। राज्य सलाहकार योग गुरु देवेंद्र अग्रवाल ने बताया कि मदर मिल्क बैंक से लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री की बजट घोषणा की अनुपालना में राज्य सरकार द्वारा 10 जिला चिकित्सालयों में मदर मिल्क बैंक की स्थापना हो चुकी है। इन बैंकों की स्थापना को देखते हुए अब जालोर, राजसमंद, सिरोही, बाड़मेर, सवाईमाधोपुर, करौली व धोलपुर में आंचल मदर मिल्क बैंक के स्थापना की सैद्धांतिक स्वीकृति मिली है। इसको लेकर राज्य सलाहकार ने वस्तुस्थिति का जालोर के मातृ व शिशु गृह का अवलोकन किया। इस बैंक का मुख्य उद्देश्य शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करना एवं कुपोषण को जड़ से समाप्त करना है। वे माताएं जो अपने बच्चे को स्तनपान कराती है एवं स्तनपान के बाद भी उनके पास अतिरिक्त दूध होता है, वे धात्री माताएं जिनके बच्चे को चिकित्सकीय कारणों से स्तनपान से रोक दिया गया है या वे ग्लुकोज पर है और वे धात्री माताएं जिनके बच्चे की मृत्यु हो गई है। वे माताएं दूध दान कर सकती है।

ऐसे काम करती है बैंक

मदर मिल्क बैंक का संचालन ब्लड बैंक की तर्ज पर किया जाता है। इसमें दूध दान के लिए माताओं को प्रेरित कर उनका दूध स्टोरेज किया जाता है। इलेक्ट्रिक पंप की सहायता से दूध निकालकर 30 मिनट तक पॉश्च्युराइज करने के बाद 4 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर ठंडा किया जाता है। इसके बाद हर डिब्बे से एक मिलीलीटर दूध का नमूना माइक्रोलैब में टेस्टिंग के लिए भेजा जाता है। दूध की सही रिपोर्ट आने पर इसे शून्य से 20 डिग्री नीचे के तापमान पर बर्फ  के गोले के रूप में बैंक के फ्रीजर में संग्रहित कर लिया जाता है।  इस स्थिति में यह छह महीने तक प्रयोग किया जा सकता है। जब इसे किसी शिशु को पिलाना होता है तो उसे गर्म पानी में पतलाकर नली या चम्मच के सहारे पिला दिया जाता है। एक बार तरल रूप में आने पर यह अधिकतम चार घंटों तक ही उपयोगी होता है।

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