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जानिए कैसे टीम कर रही माही प्रोजेक्ट को फिर से गति देने के प्रयास

Patrika news network Posted: 2017-06-17 11:05:10 IST Updated: 2017-06-17 11:05:10 IST
जानिए कैसे टीम कर रही माही प्रोजेक्ट को फिर से गति देने के प्रयास

जालोर. माही प्रोजेक्ट की क्रियान्विति को लेकर 26 मई को जालोर में हुई अधिकारियों की बैठक के बाद हाल ही में मिनिट्स जारी हुए हैं। जिसमें प्रोजेक्ट पर हुए पुराने सर्वे को लेकर विभिन्न पक्ष और पहलुओं को जाहिर किया गया है। बैठक में 259 किमी माही, अनास और साबरमती टनल जो टिमूरवा से भीनमाल क्षेत्र के बिशाला तक बननी है, उसे लेकर भी विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के साथ साथ वर्तमान परिस्थितियों में उसकी उसकी क्रियान्विति को तकनीकी दृष्टि से जांचने के लिए चर्चा की गई। बैठक में करीब 51 साल पूर्व इस प्रोजेक्ट के लिए हुए सर्वे को वर्तमान परिस्थितियों के लिए अनुकूल नहीं माना गया। अधिकारियों ने कहा कि इन सालों में परिस्थितियों में काफी ज्यादा बदलाव हुआ है। ऐसे में समय और वर्तमान लागत एवं तकनीकी दृष्टिकोण से पुनर्विचार को लेकर फिर से रिपोर्ट तैयार करने को लेकर चर्चा की गई। साथ ही यह रिपोर्ट सरकार को भेजने पर सहमति बनी।

बन गए कई बांध

अधिकारियों ने माना है कि पूर्व में जो सर्वे हुआ था अब इस सर्वे रूट में इस समयावधि में अनेक बांध बन चुके हैं। इसलिए अब इसमें बदलाव की जरुरत है। बैठक में सुझाव है कि अब नए सिरे से सर्वे इस क्षेत्र से बाइपास या उससे निश्चित दूरी से होते हुए तय किया जाए ताकि भविष्य में दिक्कत न हो। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि टिमूरवा से विशाला तक प्रस्तावित टनल के लिए ढलान कम है। ऐसे में उसके अनुसार आवश्यक ढलान को ध्यान में रखते हुए सर्वे हो ताकि समय के साथ पानी के बहाव के साथ मिट्टी व अन्य कारणों से यह अवरुद्ध न हो।

चार जिलों से जुड़ा है प्रोजेक्ट

माही परियोजना से जालोर, पाली, सिरोही व बाड़मेर जिले को लाभान्वित करने के लिए यह प्रोजेक्ट 1966 में बना, लेकिन उसके बाद गति नहीं पकड़ गया। इस प्रोजेक्ट की क्रियान्विति को लेकर जालोर में इसी साल की शुरुआत में किसान का महापड़ाव हुआ था, जिसके बाद इस प्रोजेक्ट को लेकर फिर से हलचल शुरू हुई थी। प्रोजेक्ट की क्रियान्विति को लेकर यह प्री-फिजिबिलिटी सर्वे से पहले की यह कवायद है।

कंसलटेंट एजेंसी का सुझाव

इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की भविष्य में यदि क्रियान्विति हो जाती है तो जालोर जिले को बहुत अधिक फायदा मिल सकता है। बैठक में प्रोजेक्ट की वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए क्रियान्विति से पूर्व किसी कंसलटेंट एजेंसी से उसकी विभिन्न स्तर पर जांच के लिए सुझाव दिया गया है।

ऐसे चला प्रोसेस

जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त सचिव विनोद शाम ने माही के पानी को लूनी बेसिन में लाने के लिए पानी की गणना व पेयजल की उपलब्धता का आकलन कर फिजिबिलिटी सर्वे के लिए अपे्रल माह में निर्देशित किया था। जल संसाधन विभाग जोधपुर के अतिरिक्त मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय कमेटी भी गठित की गई थी। साथ ही उन्होंने 10 दिन के भीतर सिरोही या जालोर मुख्यालय पर बैठक आयोजित कर 1966  में माही बांध के प्रोजेक्ट की पूरी रूपरेखा तैयार करने के साथ आवश्यक दस्तावेज जुटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पहली स्तर की बैठक 26 मई को जालोर के सर्किट हाउस में हुई।

यह था माही प्रोजेक्ट

बांसवाड़ा व जालोर के बीच स्थित अरावली पर्वतमाला की शृंखलाओं में सुरंग बनाकर नहर के जरिए माही नदी का पानी जालोर के विशाला गांव तक पहुंचाना था। सुरंग डूंगरपुर जिले के टिमुरवा गांव के पास माही नदी से 130.50 इंटरनल लेवल से शुरू होकर जालोर जिले की भीनमाल तहसील के विशाला गांव में 93.50 मीटर लेवल पर पहुंचाना था। इसके अलावा इसी प्रोजेक्ट के तहत माही सागर बांध का पानी डूंगरपुर जिले के टिमुरवा गांव से सेई बांध तक पहुंचाना थी प्रस्तावित था। टिमुरवा से सेई बांध की दूरी मात्र 124 किमी है। केनाल या सुरंग के जरिए माही का पानी सेई में पहुंचने के बाद जवाई बांध में आसानी से पहुंचाया जा सकता है।

अब बैठक सिरोही में

पहली बैठक में पूर्व में हुए सर्वे पर विभिन्न स्तर पर चर्चा हुई। करीब 3 घंटे चली इस बैठक में पुराने सर्वे की स्थितियां और वर्तमान की स्थितियों का आकलन किया गया। साथ ही  वर्तमान में इस रूट सर्वे की स्थितियों पर भी चर्चा की गई।  विभागीय जानकारी के अनुसार समिति की अगली बैठक सिरोही में होगी, हालांकि अभी तक इसके लिए तारीख तय नहीं हो पाई है।

इनका कहना

बैठक में प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा हुई थी। प्रोजेक्ट काफी बड़ा और पुराना है। वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार इसमें बदलाव की आवश्यकता भी है। सरकार को वर्तमान स्थितियों से अवगत करवाया जाएगा और आगामी बैठक में विभिन्न परिस्थितियों पर चर्चा की जाएगी।

- राजीव चौधरी, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, जोधपुर

rajasthanpatrika.com

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