मदर्स डे स्पेशल : एक मां ऐसी, जो 75 बच्चों पर लुटाती है ममता

Patrika news network Posted: 2017-05-14 11:35:44 IST Updated: 2017-05-14 11:50:26 IST
मदर्स डे स्पेशल : एक मां ऐसी, जो 75 बच्चों पर लुटाती है ममता
  • जालोर. किसी के हिस्से मकां आया, किसी के हिस्से दुकां आई। मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से मां आई। शायर की ये पंक्तियां इन बच्चों के लिए नहीं है, जिनके हिस्से दुनिया से कुछ भी हिस्से नहीं आया, सिर्फ एक ममतामयी सूरत के। मदर्स डे पर हम आपको एक ऐसा मां से मिला रहे है।

जालोर. किसी के हिस्से मकां आया, किसी के हिस्से दुकां आई। मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से मां आई। शायर की ये पंक्तियां इन बच्चों के लिए नहीं है, जिनके हिस्से दुनिया से कुछ भी हिस्से नहीं आया, सिर्फ एक ममतामयी सूरत के। मदर्स डे पर हम आपको एक ऐसा मां से मिला रहे है। जो एक साथ ७५ मानसिक विमंदित बच्चों का पालन पोषण कर रही है।

मानसिक विमंदित नाम आते ही सबसे पहले हमारे मन में उनकी परवरिश का सवाल उठता है। मानसिक विमंदित एक बच्चें केे पालन पोषण में जहां पूरा परिवार परेशान हो जाता है। उसकी हर गतिविधि पर नजर रखना और उसकी सार संभाल करने के साथ उसे समझाना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। ऐसे में एक महिला एक साथ ऐसे ही मानसिक विमंदित ७५ बच्चों को पाल रही है। जी हां, जिले के आहोर कस्बे में जागृति जन सेवा संस्थान की ओर से मानसिक विमंदित पुनर्वास गृह का संचालन किया जा रहा है। यहां पर वर्तमान में ७५ बच्चे आवासरत है। उनकी सार संभाल व शिक्षा को लेकर यहां उनके साथ आम बच्चों की तरह की व्यवहार किया जाता है।शुरूआत में खुद को असहज महसूस करने वाले बच्चे यहां आकर खुद को बदल देते है। मानसिक विंमदित होने के बावजूद उनकी दिनचर्या आम बच्चों की तरह हो जाती है। यह सरल नहीं है, लेकिन पुनर्वास गृह की संचालिका प्रेमकुमारी की ममता व प्रेम के आगे यह बच्चे कुछ ही समय में सहज हो गए  है।जब यह संस्था जून २०१३ में शुरू हुई, तब यहां २५ बच्चों को प्रवेश दिया गया था। लेकिन बच्चों को बेहतर आवास सुविधा उपलब्ध करवाने व उन में आए बदलाव को देखकर अन्य अभिभावकों ने भी अपने विमंदित बच्चों को प्रवेश दिलवाया।

दानदाता भी रहते है तत्पर

वैसे तो सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग की ओर से पुनर्वास गृह के संचालन के लिए बजट दिया जाता है। लेकिन वह विभागीय नियमानुसार ही होता है। ऐसे में बच्चों के लिए अन्य आवश्यक सुविधाएं कूलर, खेल सामग्री व अन्य जरूरतों को समय-समय पर दानदाता पूरा करते हैं।

नित्यकर्म भी ढंग से नहीं कर पाते थे

पुनर्वास गृह की संचालिका प्रेमकुमारी ने बताया कि जब बच्चों को यहां लाते है, तो बच्चे ढंग से नित्यकर्म भी नहीं कर पाते है। लेकिन स्टाफ की मेहनत से कुछ ही समय में बच्चे नित्यकर्म करना सीख जाते है। उन्होंने बताया कि कुछ बच्चों को वे खुद अपने हाथों से खाना खिलाती है। धीरे-धीरे बच्चे अपने हाथों से भोजन करना सीख लेते है।

विमंदित, लेकिन करते हैं हर काम

संचालिका प्रेमकुमारी ने बताया कि आमजन में धारणा होती है कि मानसिक विमंदित बच्चे जिदंगी में कुछ नहीं कर पाते है। लेकिन उन्होंने इस धारणा को बदल कर रख दिया है। यहां ये बच्चे एक-दूसरे के कार्य में तो सहयोग करते ही है। वहीं इन दिनोंं मोमबती बनाने का काम कर अपने हुनर को निखार रहे है। पहले जहां इनकों हाथ पकड़कर खिलाना पड़ता था, अब वहीं बच्चे खुद अपना काम अपने हाथ से कर रहे हैं।

rajasthanpatrika.com

Bollywood