Ad Block is Banned Click here to refresh the page

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे

उदासीनता.... बहुत कुछ लुटा, फिर भी नहीं आया होश!

Patrika news network Posted: 2017-07-12 21:37:48 IST Updated: 2017-07-12 21:37:48 IST
उदासीनता....
बहुत कुछ लुटा, फिर भी नहीं आया होश!
  • पत्रिका लाइव - प्रस्तावित लीड -जिम्मेदारों ने पूर्व की घटनाओं से नहीं लिया कोई सबक -बैंकों के भीतर और बाहर नहीं नजर आए सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध -सरहदी जिले के ग्रामीण इलाकों में हाल और बेहाल

जैसलमेर. गत एक सप्ताह के दौरान जैसलमेर मुख्यालय पर दो अलग-अलग बैंक शाखाओं में बुजुर्ग महिला और वृद्ध के साथ क्रमश: 18 हजार और 80 हजार रुपए की लूट के बावजूद न तो बैंकों के भीतर सुरक्षा को लेकर कोई विशेष इंतजाम हुए हैं और न ही शाखाओं के बाहर। ऐसे में उपरोक्त प्रकार की घटनाओं की बारम्बार पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि राष्ट्रीयकृत बड़ी बैंक शाखाओं के साथ कुछ अन्य शाखाओं में गार्ड के तौर पर गनमैन बैठा दिखाई देता है, लेकिन कुछ सरकारी के साथ कई निजी क्षेत्र की बैंक शाखाओं में चतुर्थ श्रेणी के कार्मिक ही चौकीदारी का काम करते नजर आए।
बैंकों के बाहर कोई बंदोबस्त नहीं
जिला मुख्यालय की दो बड़ी बैंक शाखाओं में करीब एक लाख रुपए की लूट और जेबतराशी की घटनाओं से किसी तरह का सबक नहीं लिया गया है। यही कारण है कि बुधवार को पत्रिका टीम ने जब शिव मार्ग स्थित एसबीआई और गांधी चौक की बैंक ऑफ  बड़ौदा शाखा का जायजा लिया तो वहां कोई पुलिसकर्मी आसपास नजर नहीं आया, जबकि इन्हीं दो शाखाओं में घटनाएं घटित हुई थीं। जानकारी के अनुसार अधिकांश बैंक चेस्ट ब्रांच से नकदी लेने जाने के समय ही बंदूकधारी गार्ड को साथ लेकर जाते हैं। कुछ तो उस समय भी निहत्था गार्ड ही लेकर जाते हैं। ऐसे में किसी वारदात को अंजाम देने का इरादा रखने वाले तत्वों को शह ही मिलती है। यह जानकारी भी मिली है कि षहर के कई बैंकों में या तो सीसी टीवी कैमरे हैं ही नहीं और अगर है तो वे कायदे से काम नहीं कर रहे।
बाहरी लोगों पर संदेह
बैंकों में वृद्ध महिला और पुरुष के साथ जो घटनाएं पिछले दिनों घटी हैं, उनके संबंध में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि, यह काम किन्हीं बाहरी व्यक्तियों का हो सकता है। सामान्य चोरी के अलावा नए तौर-तरीकों से चोरी और लूट जैसी वारदातों के घटित होने के पीछे खुद पुलिस भी बाहरी लोगों पर संदेह जताती रही है। बैंक जैसे प्रमुख वित्तीय केंद्रों पर वृद्ध वय के लोगों को निशाना बनाए जाने के पीछे उनका आसानी से शिकार बनना भी है। ऐसे में ऐसी घटनाएं आने वाले समय में और ज्यादा घटित हो सकती हैं।जिन्हें रोकने के लिए न तो बैंक प्रबंधन गंभीर नजर आ रहा है और न ही पुलिस प्रशासन।

फैक्ट फाइल -
-20 से ज्यादा बैंकों की जैसलमेर में शाखाएं
-05 किलोमीटर के दायरे में फैला है जैसलमेर शहर
-15 करोड़ रुपए का बैंकों में रोजाना हो रहा लेन-देन
-40 से ज्यादा जैसलमेर में एटीएम स्थापित

rajasthanpatrika.com

Bollywood