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विश्व एड्स दिवस: राजस्थान की जेलों में 40 रोगी बंद, और डॉक्टर्स के 70% से ज्यादा पद खाली हैं

Patrika news network Posted: 2016-12-01 13:33:03 IST Updated: 2016-12-01 13:33:03 IST
विश्व एड्स दिवस: राजस्थान की जेलों में 40 रोगी बंद, और डॉक्टर्स के 70% से ज्यादा पद खाली हैं
  • यहां जेलों में बंद बीस हजार से ज्यादा बंदियों में करीब 3 हजार बंदी किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त हैं। इनमें एड्स, टीबी और अन्य गंभीर बीमारियों की संख्या करीब चार सौ है। समय पर सटीक इलाज नहीं मिलने के कारण ये मौत के मुंह में जा रहे हैं....

जयपुर.

आज विश्व एड्स दिवस है। इसे लेकर कई जगहों पर आयोजन हो रहे हैं, लेकिन राजस्थान की जेलों में बंद एड्स रोगियों के हालत खराब है।


प्रदेश की जेलों में वर्तमान में करीब चालीस रोगी हैं जो एड्स से पीडि़त हैं, लेकिन मेडिकल स्टाफ नहीं होने के कारण इनकी सार संभाला समय पर नहीं हो पा रही है। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण ये मौत के मुंह में जा रहे हैं।


139 मेडिकल स्टाफ 95 पद खाली

प्रदेश की 108 जेलों में वर्तमान में बीस हजार से भी ज्यादा बंदी बंद हैं। इन बंदियों में आधी से ज्यादा संख्या प्रदेश की नौ सेंट्रल जेलों में बंद हैं। बंदियों की देखभाल के लिए प्रदेश वर्तमान में सिर्फ 139 मेडिकल कर्मियों का स्टाफ है, लेकिन इस स्टाफ में आधे से भी ज्यादा स्टाफ कम है।


जेलों में मेडिकल कवर के लिए 139 मेडिकल स्टाफ में से सिर्फ 44 मेडिकल कर्मी ही कार्यरत हैं। 95 मेडिकल कर्मी कम चल रहे हैं। इनमें डॉक्टर और मेल नर्स के पद सबसे ज्यादा रिक्त हैं। डॉक्टर के 37 पदों में से 25 पद और मेल नर्स के 89 पदों में से 64 पद खाली चल रहे हैं।


3 हजार से ज्यादा बंदी बीमार, अधिकतर को किया जाता है रेफर

प्रदेश की जेलों में बंद बीस हजार से ज्यादा बंदियों में करीब तीन हजार बंदी किसी न किसी बीमारी से बीमार हैं। इनमें एड्स, टीबी और अन्य गंभीर बीमारियों की संख्या करीब चार सौ है। एड्स रोग के सबसे ज्यादा बंदी जयपुर सेंट्रल जेल में हैं। उसके बाद अलवर जेल और फिर अजमेर सेंट्रल जेल का नंबर आता है। प्रदेश की जेलों में सबसे ज्यादा बीमार बंदी चर्म रोग से हैं।


तीन घंटे के लिए लगाए 30 डॉक्टर

प्रदेश की जेलों में बंदियों को हो रही परेशानी को ध्यान में रखते हुए जेल विभाग ने कुछ अस्थायी इंतजाम किए हैं। बंदियों के लिए सभी सेंट्रल जेलों में डॉक्टरों का अतिरिक्त स्टाफ कुछ घंटे के लिए लगाया गया है। हफ्ते में दो से तीन दिनों के लिए सरकारी चिकित्सकों को लगाया गया है। तीस चिकित्सकों से फिलहाल काम लिया जा रहा है। भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाने पर विचार चल रहा है।

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