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सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा था मामला फिर भी नहीं मिल पाई राहत

Patrika news network Posted: 2017-03-21 09:28:54 IST Updated: 2017-03-21 09:28:54 IST
सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा था मामला फिर भी नहीं मिल पाई राहत
  • राष्ट्रीय राजमार्ग और राजकीय राजमार्ग सुविधा से ज्यादा टोल के जरिए कमाई का जरिया बन चुके हैं। यह मामला हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है लेकिन सरकार जनता को टोल वसूली से राहत नहीं दे पाई है।

जयपुर

राष्ट्रीय राजमार्ग और राजकीय राजमार्ग सुविधा से ज्यादा टोल के जरिए कमाई का जरिया बन चुके हैं। यह मामला हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है लेकिन सरकार जनता को टोल वसूली से राहत नहीं दे पाई है। 





राजमार्ग बनाने वाली कंपनियों और राजनेता-नौकरशाहों का गठजोड़ इतना गहरा है कि कानूनी दांव-पेच में मामला वर्षों तक अटका रहता है। राजस्थान हाईकोर्ट में टोल वसूली को लेकर पांच साल पहले दायर मामले में अब भी सुनवाई चल रही है। इस बीच मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। 


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निस्तारित याचिका से जुड़वा दी याचिका 

टोल वसूली कमाई का जरिया बनने को लेकर करीब पांच साल पहले राजस्थान हाईकोर्ट में पूर्व न्यायाधीश आरएस वर्मा की ओर से जनहित याचिका दायर की गई थी। टोल कंपनियों की राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से साठ-गाँठ का हाल यह है कि मामले को सुप्रीम कोर्ट में उस याचिका के साथ जुड़वा दिया गया, जिसका फैसला ही कई साल पहले हो चुका था। 




नहीं हुई सीबीआई जांच  

कोर्ट ने जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर टोल वसूली से जुड़े मामले में गड़बड़ी या अनियमितता होने पर सीबीआई से जांच का आदेश दिया था। इस आदेश को डेढ़ साल से अधिक समय होने के बावजूद केन्द्र सरकार न तो सड़क विस्तार का काम पूरा करा पा रही है और न सीबीआई को जांच दी गई है। यह हाल तो तब है, जब प्रधानमंत्री कार्यालय तक इसकी निगरानी कर रहा है। 






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टोल वसूली का मुद्दा बड़ा ही गंभीर है, यह सीधे तौर पर जनता की जेब से जुड़ा है। केन्द्र सरकार को टोल नीति पर पुन: विचार करना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए मामला जनहित याचिका के जरिए हाईकोर्ट में भी उठाया गया है। कोर्ट में टोल वाले राजमार्गों और उनके द्वारा वसूली जा चुकी राशि का विवरण भी पेश किया जा चुका है।








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