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आखिर ऐसा क्या हुआ कि सामाजिक विद्वेष का कारण बन गया चौबीस घंटे जलापूर्ति 'पायलट प्रोजेक्ट' ?

Patrika news network Posted: 2017-03-14 09:55:40 IST Updated: 2017-03-14 09:55:40 IST
आखिर ऐसा क्या हुआ कि सामाजिक विद्वेष का कारण बन गया चौबीस घंटे जलापूर्ति 'पायलट प्रोजेक्ट' ?
  • बजट घोषणा में मुख्यमंत्री ने जयपुर शहर में चल रहे चौबीस घंटे जलापूर्ति पायलट प्रोजेक्ट की जहां तारीफ की। जयपुर की तर्ज पर कोटा शहर में भी पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की बात बजट घोषणा में मुख्यमंत्री ने कहीं। जबकि हकीकत है कुछ और ...

जयपुर

बजट घोषणा में मुख्यमंत्री ने जयपुर शहर में चल रहे चौबीस घंटे जलापूर्ति पायलट प्रोजेक्ट की तारीफ जयपुर की तर्ज पर कोटा शहर में भी पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की हुई बजट घोषणा जबकि हकीकत में जयपुर शहर का प्रोजेक्ट चल रहा है - भगवान भरोसे ना पानी स्टोरेज का पता और ना ही पानी खपत की जानकारी है विभाग के पास उपलब्ध पंप हाउस में सप्लाई हो रहे पानी की मात्रा बताने वाले फ्लो मीटर बीते कई महीने से पड़े हैं खराब वहीं दूसरी ओर पेयजल कनेक्शनों के पानी मीटर भी हैं खस्ता हाल मानसरोवर और मालवीय नगर में प्रोजेक्ट पूरा होने पर भी चौबीस घंटे चालू है ।   

बुधवार को राज्य के आम बजट में मुख्यमंत्री ने कोटा शहर में चौबीस घंटे जलापूर्ति पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की घोषणा कर जयपुर शहर में चल रहे पायलट प्रोजक्ट की तारीफ के पुल बांधे। जबकि हकीकत में शहर के मालवीय नगर व मानसरोवर इलाके में चल रहा पायलट प्रोजेक्ट जलदाय अधिकारियों की अनदेखी के चलते क्षेत्र के बाशिंदों में सामाजिक समरसता बिगाड़ने का जीता जागता प्रमाण साबित हो रहा है। 

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बरती जा रही है लापरवाही 

मॉनीटरिंग में बरती जा रही लापरवाही का आलम यह है कि किस उपभोक्ता ने कितना पानी खपत किया इसका रिकॉर्ड नहीं है तो पंप हाउस से क्षेत्र के घरों में कितना पानी सप्लाई किया जा रहा है इसका रिकॉर्ड कागजों में दुरुस्त किया जा रहा है। 




मौके पर की गई पड़ताल में मानसरोवर के कावेरी पथ पंप हाउस में चौबीस घंटे जलापूर्ति प्रोजेक्ट में सप्लाई हो रहे पानी की मात्रा की निगरानी के लिए लगाए गए फ्लो मीटर बीते कई महीने से पानी की मात्रा शुन्य दर्शा रहे हैं तो दूसरी ओर प्रोजेक्ट से लाभांवित हो रहे उपभोक्ताओं के पेयजल कनेक्शनों के पानी मीटर भी खस्ताहाल हैं।

ऐसे में विभाग उपभोक्ताओं से वास्तवित जल उपभोग की बजाय औसत ​राशि ही जल उपभोग पेटे वसूल रहा है। प्रोजेक्ट पूरा होने का हवाला फिर भी चालू है चौबीस घंटे जलापूर्ति मानसरोवर सेक्टर तीन और नौ में बीते दो साल से चौबीस घंटे जलापूर्ति चालू है। वहीं मालवीय नगर सेक्टर नौ में भी प्रोजेक्ट स्टडी पूरा होने की बात विभाग के अभियंताओं ने कही है। 

ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि जब पायलट प्रोजेक्ट स्टडी पूरी हो चुकी है तो फिर भी संबंधित इलाकों में चौबीस घंटे जलापूर्ति जो बीते दो साल से हो रही है उसका क्या औचित्य है। विभाग नॉन रेवेन्यू वाटर प्रोजेक्ट के तह​त जहां मानसरोवर के कावेरी पथ सेक्टर पर सवा करोड़ रुपए लागत से दूसरा पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। जबकि पुराने बंद हो चुके प्रोजेक्ट में पेयजल वितरण सिस्टम में फिर से बदलाव करने की सुध अब तक विभाग के अभियंताओं ने नहीं ली है। 




प्रश्न -आखिर किस पर हुआ नोटबंदी का असर ?





होना था विस्तार अब मामला ठप

शहर में होना था विस्तार अब मामला ठप शहर के बनीपार्क, चित्रकूट नगर, कंवर नगर और आदर्श नगर में भी चौबीस घंटे जलापूर्ति पायलट प्रोजेक्ट शुरू होेना था लेकिन बीते तीन साल से प्रोजेक्ट की तैयारियां ​महज फाइलों में ही चल रही हैं। ऐसे में शहर के इन इलाकों के बाशिंदों को प्रोजेक्ट का फायदा कब तक मिलेगा यह कहना मुश्किल है।

इनका कहना है— 

शहर के दोनों इलाकों में चल रहा पायलट प्रोजेक्ट स्टडी के बाद बंद हो गया है। लेकिन पेयजल वितरण तंत्र में बदलाव नहीं होने की जानकारी मुझे नहीं है। यदि ऐसा है तो क्षेत्र के अभियंताओं से जल्द ही रिपोर्ट लेकर एक समान जलापूर्ति करने के इंतजाम किए जाएंगे। 


आरसी मीणा, अधीक्षण अभियंता,नगरवृत्त दक्षिण, जलदाय विभाग

rajasthanpatrika.com

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