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'जिस स्वरूप में देखना चाहते हो उसी में दर्शन देते हैं भगवान, बस आपमें आस्था हो'

Patrika news network Posted: 2017-05-19 14:22:15 IST Updated: 2017-05-19 14:23:43 IST
'जिस स्वरूप में देखना चाहते हो उसी में दर्शन देते हैं भगवान, बस आपमें आस्था हो'
  • सच्चा धन भगवान का नाममात्र है। कलियुग में नाम और दान का बहुत अधिक महत्व है। अधिक से अधिक भगवान के नाम का स्मरण करे और दान करके घमंड़ न करे। जीवन में अच्छे संकल्प के साथ कार्य करें। और ये भी करें...

जयपुर.

भगवान की कोई आकृति नहीं होती है। भक्त जिस भाव से प्रभु में अपनी आस्था रखता है भगवान उसी स्वरूप में भक्त के समक्ष प्रकट होते हैं। यह बात गुरुवार को टोरडा ग्राम के बाबा भरतदास महाराज मंदिर में  महंत गोपाल दास महाराज के सान्निध्य में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में श्रीधाम वृंदावन से पधारे संत सुदर्शन महाराज ने कही।


पावटा , मेहंदीपुर बालाजी  व रतनगढ़ में हुई श्रीमद्भागवत कथा

महाराज ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास महाराज ने रामचरित मानस में स्पष्ट किया है कि जांकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी, अर्थात भगवान को पिता तुल्य मानने वाले को पिता-माता के समान मानने वाले को माता, भाई व सखा के रूप में मानने वाले को भाई व सखा के सहित जैसे स्वरूप में देखना चाहता है उसी स्वरूप में भगवान के भक्त को दर्शन होते हैं। क था का  शुभारंभ महंत गोपाल दास महाराज, संत मंगलदास महाराज, रघुनाथ दास महाराज व विशम्भरदास महाराज ने आरती उतार कर  किया। 

भजनों के साथ करें सद्कर्म

मेहंदीपुर बालाजी. आस्था धाम के अंजनी माता मंदिर के पास स्थित श्रीबालाजी संकटमोचन धाम आश्रम में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचन देते हुए कथावाचक वृंदावन धाम  के माधवकृष्ण शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को प्रतिदिन ईश्वर के भजन करने चाहिए। इससे मनुष्य को आत्मिक शांति व शुद्धता मिलती है। शास्त्री ने भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया तथा भजनों की प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि गंगा पावन पवित्र नदी है। गंगा में स्नान से मनुष्य को पापकर्मों से मुक्ति मिलती है। भगवान कृष्ण ने भी यमुना का उद्धार किया था जो कि बाद में चलकर जन-जन की आस्था का केन्द्र बनी।


रतनगढ. गाय की सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं है। मानव को जीवन में हमेशा गो माता की सेवा करनी चाहिए। गो माता के शरीर में 36 करोड़ देवी देवताओं का निवास करते हैं। गाय का संरक्षण करने से मनुष्य का कल्याण हो जाता है। उक्त धर्म प्रवचन चारियां वाले बालव्यास चंद्रप्रकाश शर्मा ने वार्ड नं. 16 स्थित शिव मंदिर सांड समाधि स्थल के पास चल रही सप्त दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में जीव जब तक भगवान का आश्रय नहीं लेता है तब तक उसका जीवन अधूरा है।


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सच्चा धन भगवान का नाममात्र है। कलियुग में नाम और दान का बहुत अधिक महत्व है। अधिक से अधिक भगवान के नाम का स्मरण करे और दान करके घमंड़ न करे। जीवन में अच्छे संकल्प के साथ कार्य करे। मुख्य यजमान महावीर प्रसाद भोभरिया व अमृतलाल अलारिया द्वारा व्यासपीठ की पूजा अर्चना व कथावाचक के स्वागत के साथ शुरू हुई पंचम दिवस गुरुवार को नंदोत्सव प्रसंग सुनाया।


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