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SPL Story: राजस्थान में 10,000 से ज्यादा बच्चों की जिंदगी में आई 'अक्षर ज्ञान' की रोशनी, मिली दुनिया में ख्याति

Patrika news network Posted: 2017-04-16 14:36:03 IST Updated: 2017-04-16 19:40:19 IST
SPL Story: राजस्थान में 10,000 से ज्यादा बच्चों की जिंदगी में आई 'अक्षर ज्ञान' की रोशनी, मिली दुनिया में ख्याति
  • इस विशेष संस्था के बाशिंदे 8,000 से ज्यादा लड़कियों को शिक्षित कर चुके हैं चार साल में। 4 अन्तरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय अवॉर्ड मिल चुके हैं संस्थान को अब तक। जानिए इनकी कहानी...

जयपुर.

सरकार यूं तो अपने स्तर पर साक्षरता मिशन के जरिए लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने की कोशिश कर रही है लेकिन कुछ संस्थाएं भी अपने स्तर पर इस कार्य को करने में जुटे हुए हैं।


उन्हीं में से एक है गोविन्द नगर पूर्व में चल रही प्रवीण लता संस्थान जो बिना किसी लोभ और स्वार्थ के कच्ची बस्तियों के उन बच्चों के जीवन में शिक्षा की अलख जगाने का प्रयास कर रही है जो शायद ही कभी अपने जीवन में स्कूल की चौखट देख पाएं हों। इतना ही नहीं डॉप आउट्स को भी वापस स्कूल भेजने में भी इनके प्रयास सराहनीय है।


गैर सरकारी संगठन की कवायद से कच्ची बस्ती के बच्चों को शिक्षा

 बच्चों के सर्वांगीण विकास, महिला रोजगार और बालिका शिक्षा व सुरक्षा के प्रति कार्यरत इस संस्थान के प्रयास से अभी तक दस हजार से भी ज्यादा बच्चों को अपना भविष्य संवारने का अवसर मिल चुका है।


घर से की शुरुआत

संस्थान की डायरेक्टर भारती सिंह ने बताया कि उनके इस मिशन से कई वॉलंटीयर्स भी जुड़े हुए हैं। इनमें अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ, स्कूल व कॉलेज के स्टूडेंट्स, टीचर्स और निजी ऑफिस में काम करने वाले लोग इन बच्चों के साथ जुड़े हुए हैं। यहां आकर वो इन बच्चों को हाइजीन, विभिन्न सब्जेक्ट्स, क यूनिकेशन स्किल्स, पर्सनैलिटी डवलपमेंट, इंग्लिश क यूनिकेशन और एटिकेट्स के अलावा गुड टच बैड टच, वुमन राइट्स और बच्चों के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हैं।


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इसमें इंटरनैशनल वॉलंटीयर्स भी हैं जो साल में दो से तीन बार यहां आकर इन बच्चों के साथ वक्त बिताते हैं। घर में ही चलने वाली इन बच्चों की कक्षाओं में पढ़ाई के अलावा जूडो-कराते, थिएटर, सिलाई-कढ़ाई-बुनाई और हस्तकला में भी प्रशिक्षित किया जाता है।


ये काम करती है संस्थान

संस्थान के प्रमुख उद्देश्य जरुरतमंद बच्चों का सर्वांगीण विकास, महिलाओं में रोजगारोन्मुख आत्मनिर्भरता और जागरुकता लाना है

-बच्चों के लिए बालसभा, मस्ती की पाठशाला का आयोजन किया जाता है

-महिलाओं और बालिकाओं के लिए जागृति कार्य भी करते हैं, जिसमें इनसे जुड़े मुद्दों पर संगोष्ठी और कार्यशाला का आयोजन कर उन्हें अपनी सुरक्षा और आत्मरक्षा के प्रति जागरुक करना है


फैक्ट फाइल

-10,000 बच्चे अब तक हो चुके हैं लाभान्वित

-8,000 से ज्यादा लड़कियों को शिक्षित कर चुके हैं चार साल में

-04 अन्तरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय अवॉर्ड मिल चुके हैं संस्थान को अब तक

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