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नोटबंदी, बैंकों की सख्ती और आयकर विभाग की नजर से ठेकेदार पड़े ठण्डे, डूब सकती है 1015 करोड़ की कमाई

Patrika news network Posted: 2017-03-15 16:36:53 IST Updated: 2017-03-15 16:36:53 IST
नोटबंदी, बैंकों की सख्ती और आयकर विभाग की नजर से ठेकेदार पड़े ठण्डे, डूब सकती है 1015 करोड़ की कमाई
  • राजस्थान में अभी जिला आबकारी कार्यालयों में 1 लाख आवेदनों के आसपास की ही मूल प्रति आवेदन शुल्क व जमानत राशि के डीडी के साथ जमा हुआ है।

जयपुर.

राजस्थान में पिछले साल शराब दुकानों की लॉटरी करने से आवेदन शुल्क के रूप में ही करीब 1015 करोड़ रुपए की हुई कमाई से इस बार हाथ धोना पड़ सकता है। नोटबंदी, बैंकों की सख्ती और आयकर विभाग की नजर ठेकेदारों पर होने से आवेदनों की संख्या में भारी कमी आ सकती है।


ऑनलाइन आवेदन करने के बाद बैंक से डीडी बनवाकर आवेदन की फोटो प्रति के साथ जमा कराना होता है। लेकिन बैंकों में एक दिन में खाते से एक से अधिक डीडी बनवाने में परेशानी आ रही है। ऐसे में आवेदन करने वाले डीडी जमा नहीं करा पा रहे।


जयपुर में ही 400 दुकानों के लिए 25000 आवेदन ऑनलाइन

आबकारी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक राज्यभर में अब तक करीब साढ़े 3 लाख ऑनलाइन आवेदन जमा कराए जा चुके हैं। लेकिन जिला आबकारी कार्यालयों में 1 लाख आवेदनों के आसपास की ही मूल प्रति आवेदन शुल्क व जमानत राशि के डीडी के साथ जमा हुआ है।


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राजधानी जयपुर में ही करीब 400 दुकानों के लिए 25 हजार आवेदन ऑनलाइन हो चुके हैं। लेकिन डीडी 5 हजार के आसपास आवेदनों के जमा हुए हैं। जो काउन्टर पिछले साल आवेदन की प्रति जमा कराने के लिए भरे रहते थे, वे आज खाली पड़े हैं।


अब तक साढ़े 3 लाख से ज्यादा आवेदन

अंग्रेजी व देशी शराब दुकान के लिए सरकारी कर्मचारी के अलावा कोई भी व्यक्ति कितने ही आवेदन कर सकता है। ऐसे में आवेदन तो ऑनलाइन खूब हो रहे हैं। अब तक साढ़े 3 लाख से ज्यादा आवेदन किए जा चुके हैं। लेकिन विभाग के अधिकारियों में इस बात को लेकर मायूसी है कि बैंकों की सख्ती के चलते डीडी नहीं बनने से रुपए जमा नहीं हो रहे।


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फिर आयकर विभाग की नजर से भी शराब ठेकेदार डरे हुए हैं। पिछले दिनों कुछ शराब कारोबारियों पर आयकर विभाग कार्रवाई भी कर चुका है।


ब्लैकमनी का खेल खत्म

आवेदन में परेशानी का कारण ब्लैकमनी का काम लगभग बंद होना भी है। अब आवेदन करने में राशि एक नंबर की खर्च होगी। फिर आवेदन शुल्क की राशि वापस भी नहीं मिलेगी। ऐसे में एक नंबर की राशि खत्म हो जाएगी। प्रति फार्म 16 से 22 हजार तक शुल्क लिया जा रहा है।


100 से 2000 तक आवेदन

शराब ठेकेदार दुकानों पर अधिस संख्या में कब्जा जमाने के लिए 100 से लेकर 2000 हजार तक आवेदन कर देते हैं। आवेदन के रूप में पहले ब्लैकमनी ही खपाई जाती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इसके चलते शराब ठेकेदारों के साथ आबकारी विभाग के अधिकारियों में भी बेचेनी ज्यादा है।


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