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राजस्थान में अब सरकार लगाएगी थड़ी—ठेलों के जरिए व्यापार करने वालों की संख्या पता, ये काम होंगे

Patrika news network Posted: 2017-03-17 17:28:16 IST Updated: 2017-03-17 17:28:16 IST

राजस्थान में अब सरकार लगाएगी थड़ी—ठेलों के जरिए व्यापार करने वालों की संख्या पता, ये काम होंगे
  • दीनदयाल अन्त्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की प्रगति की भी समीक्षा। कई योजनाएं हैं, जिनमें हर निकाय को 50 व्यक्तियों की क्षमता का आश्रय स्थल बनाया जाना शामिल...

जयपुर.

राजस्थान में थड़ी—ठेलों के जरिए व्यापार (स्ट्रीट वेंडर) करने वालों की संख्या पता लगाने के लिए आखिर सरकार की नींद खुल गई है। न्यायालय के आदेश के बाद सरकार इनकी संख्या का जून तक पता लगाएगी।


इसके लिए अगले माह तक टाउन वेंडर कमेटियों का गठन हो जाएगा, जो इस पर भी काम करेगी। इस संबंध में स्वायत्त शासन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। दीनदयाल अन्त्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत गठित राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक में यह फैसला किया गया। इसके अलावा यह तय किया गया है कि नगरीय निकाय क्षेत्रों में एक-एक आश्रय स्थल का निर्माण एवं संचालन करना जरूरी होगा।


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बैठक में दीनदयाल अन्त्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की प्रगति की समीक्षा भी की गई। बैठक में स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक पवन अरोड़ा, हुडको के क्षेत्रीय प्रबन्धक राम सिंह गुनावत, एसएलबीसी से सहायक महाप्रबन्धक सहित तकनीकी शिक्षा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, उद्योग विभाग, श्रम विभाग व आरएसएलडीसी के अधिकारी व निदेशालय के अधिकारी शामिल हुए।


यहां रह गए फिसड्डी

शहरी गरीब परिवारों के युवाओं को आरएसएलडीसी के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा था। इसमें प्रगति कम होने से अफसर भी परेशान नजर आए। ऐसे में विभाग द्वारा योजना की गाइडलाइन के अंतरर्गत अन्य प्रशिक्षण प्रदाताओं को सीधे ही कार्य आवंटित करने का निर्णय किया गया। शहरी क्षेत्रों में कुशल व्यक्तियों की मांग व आपूर्ति का सर्वे भी होगा, जिससे की पता चल सके की आखिर जरूरत किन लोगों की है और रोजगार के साधन किस तरह के मुहैया कराए जाएं।


आश्रय स्थल

बेघर व्यक्तियों के नि:शुल्क ठहरने के लिए नगर निकाय अभी तक 202 स्थाई और 141 अस्थाई आश्रय स्थल संचालित कर रहे हैं। अब कम से कम 50 व्यक्तियों की क्षमता का एक आश्रय स्थल का निर्माण व संचालन हर निकाय को जरूरी होगा।


यह भी

योजना के तहत 6097 शहरी गरीब परिवारों की महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं, जबकि इनकी संख्या 8750 होनी है।

—आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 12 हजार स्वयं सहायता समूहों के गठन का लक्ष्य रखा गया।

—एसएलबीसी के अधिकारियों को आगामी वित्तीय वर्ष में 12500 परिवारों को ही ऋण उपलब्ध कराने के लिए कहा।


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