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देश के सबसे बड़े राज्य में 15 जून से 8 जगहों पर महापड़ाव करेंगे किसान, 825 तहसीलों की बनी एकराय

Patrika news network Posted: 2017-06-12 19:51:42 IST Updated: 2017-06-12 19:51:42 IST
देश के सबसे बड़े राज्य में 15 जून से 8 जगहों पर महापड़ाव करेंगे किसान, 825 तहसीलों की बनी एकराय
  • मध्यप्रदेश में चल रहे किसान आंदोलन के बीच राजस्थान के सातों संभाग सहित सीकर मुख्यालय पर किसान देंगे महापड़ाव। अपनी 13 मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने किया एलान, कहा- सरकार को झुका देंगे, वो किसानों की बात मानें...

जयपुर/सीकर.

मध्यप्रदेश में चल रहे किसान आंदोलन की राजस्थान में भी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। केन्द्र सरकार की ओर से घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद न करने के विरोध सहित 13 मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने 15 जून से महापड़ाव का ऐलान किया है।


भारतीय किसान संघ का ऐलान

यह महापड़ाव सातों संभाग और सीकर मुख्यालय पर दिया जाएगा। संघ पदाधिारियों ने सोमवार को पत्रकार वार्ता आयोजित कर यह जानकारी दी, जिसमें संघ के प्रदेश महामंत्री कैलाश गंदालिया, जोधपुर प्रांत अध्यक्ष हीरालाल चौधरी, जयपुर प्रांत अध्यक्ष छोगालाल सैनी मौजूद रहे। उन्होंने किसानों के हित में 13 प्रमुख मांगों तुरंत लागू करने की सरकार से अपील की है।


महापड़ाव का ऐलान

उन्होंने बताया कि 15 जून से सातों संभाग और सीकर मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन महापड़ाव होगा, जिसमें में ही रहने, खाने-पीने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने बताया कि आंदोलन की रणनीति जामडोली में हुए प्रदेश अधिकवेशन में तय की गई थी, जिसमें 825 तहसील के पदाधिकारियों ने महापड़ाव पर सहमति दी। किसान नेताओं ने बताया कि सरकार ने न्यूतम समर्थन मूल्य पर सरसों, मूंग, मूंगफली तुअर आदि की खरीद नहीं की, इससे राज्य के किसानों को 4 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है।


एमपी के आंदोलन को किसान संघ का समर्थन नहीं

प्रदेश महामंत्री कैलाश गंदोलिया ने बताया कि किसान संघ शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन पर विश्वास रखता है। मध्यप्रदेश में आंदोलन अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है। उसका नेतृत्व राजनैतिक लोग कर रहे हैं। किसान संघ उसका हिस्सा नहीं है।


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राजस्थान में ऐसी स्थिति नहीं होगी, लेकिन सरकार को किसानों की वाजिब मांगें मान लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, ऊर्जामंत्री सहित कई प्रतिनिधियों से कई बार वार्ता हो चुकी है, लेकिन किसानों की मांगें मानी नहीं जा रही है।


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