जयपुर बम कांड की नौंवी बरसीः वक्त के पास भी नहीं इस घाव का मरहम

Patrika news network Posted: 2017-05-13 09:04:20 IST Updated: 2017-05-13 09:04:20 IST
जयपुर बम कांड की नौंवी बरसीः वक्त के पास भी नहीं इस घाव का मरहम
  • पर्यटन की नजर में दुनिया के खूबसूरत शहरों में शुमार गुलाबीनगर के लोगों ने अपनी जमीं पर नौ साल पहले आतंक का जो मंजर देखा, उसे आज भी वे भुला नहीं पाए हैं।

जयपुर।

पर्यटन की नजर में दुनिया के खूबसूरत शहरों में शुमार गुलाबीनगर के लोगों ने अपनी जमीं पर नौ साल पहले आतंक का जो मंजर देखा, उसे आज भी वे भुला नहीं पाए हैं। 13 मई 2008 को परकोटे के भीड़भाड़ वाले बाजारों में एक के बाद एक आठ विस्फोटों ने पूरे शहर को दहला दिया था। आज उन स्थानों पर वही भीड़भाड़ है, चहल-पहल है। इसके बावजूद नौ साल पहले मिला दर्द भुलाया नहीं जा सका। पत्रिका टीम शुक्रवार को उन स्थानों पर एक बार फिर पहुंची, जहां आतंकियों ने विस्फोट कर दहलाया था। विस्फोट में प्रभावितों और चश्मदीदों से भी मिली। लोगों ने कहा कि समय भले ही बीत गया हो, लेकिन अब तक जख्म नहीं भरे हैं।



जयपुर बमकांड की नौंवी बरसी: आतंक के तीन गुनाहगार अभी भी हैं फरारदुग्धाभिषेक हो रहा था...

सांगानेरी गेट स्थित हनुमान मंदिर में आज भी हादसे के निशान हैं। मंदिर के महंत भंवर लाल शर्मा उस पल को याद करते हुए कहते हैं कि दुग्धाभिषेक चल रहा था। महाआरती से 15 मिनट पहले विस्फोट हुआ। हर तरफ चीख-पुकार मच गई। मंदिर के दरवाजे और पास बनी प्याऊ पर अभी भी छर्रों के निशान हैं। पास में ही पान की दुकान लगाने वाले बाबूलाल ने इस हादसे में अपने भाई को खोया है। वह कहते हैं कि जब विस्फोट हुआ तो हम समझ ही नहीं पाए थे कि आतंकी वारदात है। 



बाहर आया तो खून से लथपथ लोग देखे

ट्रैफिक वार्डन सुशील चंद्र जैन बताते हैं कि माणकचौक थाने के सामने पहला विस्फोट हुआ। थाने से बाहर आए तो देखा खून से लथपथ लोग और हर तरफ चीख पुकार मच गई। पुलिस के सहयोग से हम लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। यहां खड़ी एक कार पूरी तरह से खाक हो गई। करीब पांच मिनट बाद चूड़ी वाले खंदे में दूसरा विस्फोट हुआ। पास में ही बर्तन की दुकान मालिक बृजेश ने अपने भाई और दो नौकरों को भी खो दिया। इनके पास बैठी महिला खून से लथपथ हो गई थी। उसे कई छर्रे लगे थे। 



जहां पिता को खोया, वहां आज भी निशान

चांदपोल बाजार निवासी गोविंद ने अपने पिता रामप्रसाद को धमाके में खो दिया। उन्होंने बताया कि पिता की धमाके में दो टुकड़े हो गए थे। चांदपोल स्थित हनुमान मंदिर के अंदर तक खून के निशान थे। वो दिन आज भी नहीं भूल रहे पा रहे हैं। वहीं, छोटी चौपड़ पर फूल बेचने वाले नरेश के शरीर में छर्रे लगे थे, जो निशान अब तक उनके शरीर पर हैं। जब भी वो घाव देखते हैं तो मंजर आज भी ताजा हो जाता है। 


जयपुर बमकांड की नौंवी बरसी: आतंक के तीन गुनाहगार अभी भी हैं फरार




याद भुलाने को चले जाते हैं शहर से बाहर

हादसे में तीन बेटियों को खोने वाले आदर्श नगर धन्नादास की बगीची निवासी लियाकत खान के परिवार को हर दिन विस्फोट की गूंज सुनाई देती है। लियाकत ने बताया कि दशहतगर्दों ने सब कुछ छीन लिया। बात करते-करते उनके आंखों में आंसू आ गए और कहा कि इस तरह की वारदातों में आम आदमी को जान गंवानी पड़ती है, फिर चाहे वे किसी भी मजहब का ही क्यों न हो। बेटियों की जान गंवाने के बाद हर दिन हम रोते हैं। 13 मई को हम जयपुर से बाहर चले जाते हैं, ताकि यह दिन भूल जाएं। जौहरी बाजार स्थित नेशनल हैण्डलूम के पास हुए धमाके में लियाकत की तीन बेटियों सुमेरा खान (26), असमा खान (15) व एनी खान (12) की मौत हुई थी। 



याद में बना दी मस्जिद

लियाकत ने बताया कि सरकार ने पांच-पांच लाख की मदद की थी, तब मैने उनसे कहा था कि मेरी सारी दौलत आप ले लो, लेकिन मेरी तीनों बेटियों को लौटा दो। वो तो कुछ नहीं कर सके, लेकिन मोहल्ले के लोगों ने मिलकर बेटियों की याद में मस्जिद बना दी। इसके लिए किसी ने जमीन दी तो किसी ने राशि। अब मस्जिद निर्माण अंतिम दौर में है। 

rajasthanpatrika.com

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