सस्ते और आधुनिक उपचार का मेडिकल हब बना जयपुर, 10 सालों में बड़ा परिवर्तन 'ट्रांसप्लांट' भी आया

Patrika news network Posted: 2017-05-14 16:10:17 IST Updated: 2017-05-14 16:10:17 IST
सस्ते और आधुनिक उपचार का मेडिकल हब बना जयपुर, 10 सालों में बड़ा परिवर्तन 'ट्रांसप्लांट' भी आया
  • जयपुर अब देश के उन चुनिंदा शहरों में शुमार है, जहां इलाज की सबसे आधुनिक विधा से हृदय, किडनी, कैडेवर, लिवर, स्किन जैसे प्रत्यारोपण शुरू हो चुके हैं। वहीं कई दूसरे अंग प्रत्यारोपण भी अब शुरू हो रहे हैं...

जयपुर.

करीब दस साल पहले तक चुनिंदा निजी अस्पतालों में आधुनिक उपचार की सुविधाओं वाली पिंकसिटी अब सस्ते और आधुनिक उपचार में मेडिकल हब के रूप में पहचान बना चुकी है। इन दस सालों में बड़ा परिवर्तन प्रत्यारोपण को लेकर भी आया है।


अब करीब-करीब हर सुपर स्पेशियलिटी और अन्य बीमारियों का उपचार दर्जनों निजी अस्पतालों में उपलब्ध है। यही कारण है कि अब राजस्थान के लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए देश के दूसरे बड़े मेट्रो शहरों में जाने के बजाय जयपुर में ही आधुनिक उपचार ले रहे हैं।


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ऐसा भी नहीं है कि चिकित्सा की आधुनिक सुविधाएं शहर के किसी एक हिस्से तक ही सीमित है। टोंक रोड, जेएलएन मार्ग, विद्याधर नगर, मानसरोवर, मालवीय नगर, जगतपुरा, शास्त्री नगर, बनीपार्क, आगरा रोड और यहां तक की चारदीवारी के आस पास भी ऐसे कई बड़े और छोटे निजी अस्पताल खुल चुके हैं, जहां अधिकांश उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं।


नई तकनीक और सस्ता उपचार :

खास बात यह है कि राजधानी में नई तकनीकों से सस्ता उपचार भी सुलभ हो गया है। शहर में बाइपास सर्जरी, प्रत्यारोपण, कैंसर सर्जरी, अस्थि रोग से संबंधित सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, की विश्वस्तरीय सर्जरियां हो रही है। राजधानी के निजी अस्पतालों के डॉक्टर कई ऐसी सर्जरियां और उपचार भी कर रहे हैं, जो कि विश्वस्तरीय मेडिकल जर्नल्स में भी दर्ज हो चुकी हैं।


प्रत्यारोपण में भी जयपुर का कमाल :

जयपुर अब देश के उन चुनिंदा शहरों में शुमार है, जहां इलाज की सबसे आधुनिक विधा से हृदय, किडनी, कैडेवर, लिवर, स्किन जैसे प्रत्यारोपण शुरू हो चुके हैं। वहीं कई दूसरे अंग प्रत्यारोपण भी अब शुरू होने की ओर हैं।


मिनी थोरेकोटमी से दिल की सर्जरी क्या है

पसलियों के बीच सिंगल चीरा लगा कर ह्रदय की सर्जरी करना ही मिनी थोरकोटोमी कहलाती है सामान्यतया  सर्जरी में छाती की हड्डी काटकर ऑपरेशन करते हैं तथा मिनिमल इनवेसिव कार्डियक  सर्जरी  (द्व द्ब ष् ह्य ) में भी ग्रोइन रीजन (पाव की नसों से) से बाईपास पर जाते हैं जहां इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा रहता हैं पावराब होने का भी डर रहता है पर इस तकनीक में केवल एक छोटे से चीरे से ही ऑपरेशन करते हैं तथा इसी से बाईपास मशीन पर जाते हैं रोगी अगले ही दिन से खाने पीने लग जाता हैं।


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