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VIDEO: आखें खोलो 'राजे सरकार'! यहां मोर्चरी में नहीं, खुली सड़क पर सालों से हो रहा है शवों का पोस्टमॉर्टम

Patrika news network Posted: 2017-06-12 11:00:15 IST Updated: 2017-06-12 11:23:35 IST
  • बस्सी में डॉक्टर्स और पुलिस टीम के सामने सड़क पर ही कर दिया गया पोस्टमार्टम, खबर फैली तो कई लोग जुटे, लेकिन उसके बाद भी वहीं पर किया गया पोस्टमार्टम

जयपुर, बस्सी।

जयंत शर्मा आैर राजेन्द्र वरधानी। 

डॉक्टर्स और पुलिस की टीम ने मिलकर राजधानी जयपुर में इंसानियत के चीथड़े उड़ा दिए। एक मृतक जिसका पोस्टमार्टम होना था, कहीं जगह नहीं मिली तो सड़क पर ही उसका पोस्टमार्टम कर दिया गया। खबर फैली तो लोगों की भीड़ जुट गई लेकिन उसके बाद भी डॉक्टर्स ने पोस्टमार्टम की जगह नहीं बदली और देखते ही देखते सभी के सामने मृतक के शरीर की चीर फाड़ कर डाली। बाद में जब बात फैली तो डॉक्टर्स नदारद हो गए और शव परिजनों को सौंप गए। मामला राजधानी से सटे बस्सी कस्बे का है। रविवार सवेरे हुए इस पोस्टमार्टम की चर्चा पूरे दिन बनी रही।


सड़क हादसे में हुई थी दो युवकों की मौत

दरअसल बस्सी में शनिवार रात और रविवार तड़के दो युवको की हादसे में मौत हुई थी। रात आठ बजे बस्सी चक के पास राजूलाल नाम के युवक को एक अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। उसका शव बस्सी राजकीय अस्पताल लाया गया और फिर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। 


रविवार तड़के करीब तीन बजे दूसरा हादसा हुआ। इसमे दौसा से जयपुर जा रहे युवक सुरेश गुर्जर को एक अज्ञात वाहन ने बस्सी जटवाड़ा के पास टक्कर मार दी। उसकी भी मौत हो गई। जब उसका शव पोस्टमार्टम के लिए लाया गया तो शव के साथ इनती बेकद्री की गई कि परिजन और अन्य लोग भी हैरान हो गए। कुछ बोलना चाहा तो डॉक्टर्स और पुलिस ने उनको धमका दिया।


ट्रक में पड़ा था एक शव इसलिए सड़क पर कर दिया दूसरे का पोस्टमार्टम

बस्सी में पोस्टमार्टम रुम की कमी करीब पैंतीस साल से चल रही है। इस दौरान वहां पर एक खराब पड़े खटारा ट्रक में शवों का पोस्टमार्टम किया जाता है। जब कभी एक साथ दो शव आते हैं तो उनका एक-एक कर ट्रक में ही पोस्टमार्टम किया जाता है। 


लेकिन रविवार को तो डॉक्टर्स ने इतनी जल्दी दिखाई कि दोनो ही शवों का पोस्टमार्टम एक साथ ही कर डाला। राजूलाल के शव का पोस्टमार्टम ट्रक में जारी था उसी दौरान सड़क पर एम्बुलेंस की आड़ में सुरेश के शव का भी पोस्टमार्टम कर दिया गया। 


परिजनों ने आपत्ति जताई तो डॉक्टर्स ने कहा कि यहां एेसे ही पोस्टमार्टम होता है। बेचारे परिजन खड़े-खड़े सभी के सामने अपने परिवार के सदस्य की चीर फाड़ होते देखते रह गए।


तीन थाने, 44 ग्राम पंचायतें, 200 से ज्यादा गांव लेकिन हालत इतने खराब

बस्सी उपखण्ड क्षेत्र में तीन थाने बस्सी, कानोता और तूंगा आते हैं। वहीं यहां की जनसंख्या करीब साढे 4 लाख से अधिक है। 44 ग्राम पंचायते हैं और करीब 215 गांव हैं। इसके अलावा यहां तीन सीएचसी, करीब आधा दर्जन से अधिक पीएचसी हैं। लेकिन इन सीएचसी में मुर्दाघर नहीं है। जिसके कारण लोगों के शवों को खुले में पटक कर पोस्टमार्टम किया जाता है।


क्षेत्र में मुर्दाघर नहीं होने के कारण शवों को थाना परिसर में रखवाया जाता है। मुर्दाघर अस्पताल में होना चाहिए इसके लिए कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। --- वीरेन्द्र सिंह, बस्सी थाना अधिकारी।


क्षेत्र में मुर्दाघर होना चाहिए, इसके लिए कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। जनप्रतिनिधि भी कई बार मुद्दा उठा चुके हैं। लेकिन स्थान की कमी के कारण मुर्दाघर नहीं बन सका। --- डॉ दिनेश मित्तल सीएचसी

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