मनमानी-टोल का ऐसा खेल, सड़क अधूरी हो या ऊबड़-खाबड़, वसूली बेधड़क

Patrika news network Posted: 2017-03-20 09:05:00 IST Updated: 2017-03-20 09:05:00 IST
मनमानी-टोल का ऐसा खेल, सड़क अधूरी हो या ऊबड़-खाबड़, वसूली बेधड़क
  • सड़क भले ही पूरी नहीं बनी हो, टोल वसूली पहले ही शुरू हो जाती है। खुद सरकार ने ही निर्माण पूरा होने से पहले वसूली चालू करने की छूट दे रखी है। सड़क भले ही बदहाल हो, वसूली पल-पल पूरी होती है।

जयपुर

जयपुर- टोल वसूली की व्यवस्था ज्यादातर जगह जनता की जेब खाली करने का जरिया बनकर रह गई है। सड़क भले ही पूरी नहीं बनी हो, टोल वसूली पहले ही शुरू हो जाती है। खुद सरकार ने ही निर्माण पूरा होने से पहले वसूली चालू करने की छूट दे रखी है। सड़क भले ही बदहाल हो, वसूली पल-पल पूरी होती है। 






सरकार ने नियम बनाकर टोल कंपनियों को 80 प्रतिशत निर्माण होते ही वसूली की छूट दे रखी है। ऐसे में सड़क बनती नहीं उससे पहले ही कंपनी के खजाने में पैसा आना शुरू हो जाता है। कई राजमार्ग तो एेसे हैं, जहां वसूली वर्षों पहले शुरू हो चुकी है और सड़क पूरी होने का नाम ही नहीं ले रही। अधूरी सड़क को लेकर कई साल से विवादों में चल रहा जयपुर-दिल्ली राजमार्ग इसका बड़ा उदाहरण है।





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इस राजमार्ग पर लागत से अधिक वसूली हो चुकी और हाईकोर्ट नाराजगी भी जाहिर कर चुका है। जयपुर से अजमेर जाने वाले राजमार्ग पर तो ठीकरिया टोल के पास ही सड़क का हाल खराब है। इससे टोल पर लम्बी कतारें लग जाती है। 





अकेले इस राजमार्ग का नहीं बल्कि अन्य राजमार्गों का हाल भी कमोबेश ऐसा ही देखा जा सकता है। इसके बावजूद केन्द्र और राज्य सरकार ने हालात सुधारने के लिए अब तक कदम नहीं उठाया। कई बार टोल कंपनियों से नेता और अधिकारियों के जुड़ाव की बात भी सामने आ चुकी है लेकिन लोगों को राहत दिलाने के लिए सरकार की तरफ से कोई कानून नहीं बन पाया। 



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टोल बढ़ाने में आगे, सड़क सुधार में पीछे 

टोल सड़कों के नियमों में थोक मूल्य सूचकांक के हिसाब से टोल दरों में 3त्न बढ़ोतरी का प्रावधान है। इसकी पालना में न कंपनियां पीछे हैं, न एनएचएआई। नियम यह भी है कि सड़क दुरुस्त रखना कंपनी का जिम्मा है। 





सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट कर दिया है कि टोल पर लाइन लगी तो वसूली बंद हो सकती है। इसके बावजूद हाल यह है कि स्टेट हाइवे की सुध लेने वाला कोई नहीं है। आज तक किसी भी टोल नाके पर वसूली बंद नहीं कराई गई है। 

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राजमार्गों की स्थिति


   वर्ष              नेशनल     स्टेट

2010-11 5,274 11,873

2011-12 7,260 10,953 

2012-13 7,310 10,937

2013-14 7,310 11,971 

2014-15 8,016 11,421

2015-16 8,168 15,607

(राजमार्ग किलोमीटर में)

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