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गुलदाउदी की बिक्री 'गुल'

Patrika news network Posted: 2016-12-01 18:17:02 IST Updated: 2016-12-01 18:17:02 IST
गुलदाउदी की बिक्री 'गुल'
  • गुलदाउदी। जयपुर शहर को जिसने दीवाना कर रखा है, वह नोटबंदी की मार नहीं झेल पाया। यह पहला मौका है जब लोग प्रदर्शनी में आकर सिर्फ गुलदाउदी के फूल को निहार रहे हैं, खरीद नहीं रहे। पांच सौ व हजार के पुराने नोट बंद कर देने व नए नोटों की किल्लत के चलते अधिकतर लोग पौधे खरीदने से बच रहे है।

जयपुर. गुलदाउदी। जयपुर शहर को जिसने दीवाना कर रखा है, वह नोटबंदी की मार नहीं झेल पाया। यह पहला मौका है जब लोग प्रदर्शनी में आकर सिर्फ गुलदाउदी के फूल को निहार रहे हैं, खरीद नहीं रहे। पांच सौ व हजार के पुराने नोट बंद कर देने व नए नोटों की किल्लत के चलते अधिकतर लोग पौधे खरीदने से बच रहे है। राजस्थान विवि में चल रही गुलदाउदी की प्रदर्शनी के तीसरे दिन गुरुवार को इसकी बिक्री फीकी रही है।

खर्चों पर लगाम लगाना शुरू कर दिया

नोटबंदी का असर जीवन के हर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। पिछले 22 दिन में परेशान हो चुके लोगों ने अपने खर्चों पर लगाम लगाना शुरू कर दिया है। खासकर उन खर्चोंं पर जो शौक और पसंद से जुड़े हैं। एेसी ही एक हॉबी है बागवानी। जयपुर में बागवानी के शौकीन लोगों के लिए राजस्थान विवि में हर साल लगने वाली गुलदाउदी प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र होती है। हर साल की तरह इस साल भी दो दिन तक प्रदर्शनी लगने के बाद गुरुवार को तीसरे दिन विवि की नर्सरी से गुलदाउदी की बिक्री शुरू की गई। बिक्री शुरू होते ही एक चौंकाने वाली स्थिति सामने आई।

जहां खरीदते थे 10 गमले वहां खरीद रहे दो या तीन

आमतौर पर जहां हर साल बिक्री शुरू होते ही पहले तीन घंटे में ही पूरे के पूरे गुलदाउदी बिक जाते हैं वहीं इस साल एेसा गुरुवार को शुरू हुई प्रदर्शनी में दोपहर 12 बजे तक तो मात्र 35 प्रतिशत गमलों की बिक्री हुई। नर्सरी में लोग तो पहुंच रहे थे लेकिन वे पिछली साल की तुलना में कम गमले खरीद रहे थे। जो लोग हर साल 10-10 गमले खरीदते थे वे इस बार मात्र 1 या 2 गमले खरीद कर गए। लोगों का कहना था कि नगदी की समस्या के कारण एेसा कर रहे हैं। एेसे में एक ही दिन चलने वाली बिक्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

पौधे बच गए तो आगे भी बिक्री की जाएगी

इस बार पिछले सालों की तुलना में कम पौधे बिक रहे हैं। इसकी मुख्य वजह तो नहीं पता है। यह जरूर है कि जो लोग पिछले सालों तक पांच से दस गमले खरीदते थे वे इस बार मात्र एक या दो ही खरीद रहे हैं। पौधे बच गए तो आगे भी बिक्री की जाएगी।

- डॉ. रामअवतार शर्मा, नर्सरी प्रभारी

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