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बस्तर के जंगलों में बैखोफ एके-47 लिए घूमती हैं उषा, बनाई गईं महिला असिस्टेंट कमांडेंट

Patrika news network Posted: 2017-01-12 09:33:35 IST Updated: 2017-01-12 14:43:36 IST
  • उषा किरण अपने परिवार से सीआरपीएफ में सेवा देने वाली तीसरी पीढ़ी हैं, इससे पहले उनके दादा और पिता सीआरपीएफ में रह चुके हैं। साथ ही वो ट्रिपल जंप में गोल्ड मेडल जीत राष्ट्रीय विजेता भी रह चुकी हैं।

बस्तर। (छत्तीसगढ़)

अब महिला भी किसी पुरुष से कम नहीं है, वो पुरुषों की तरह हर वो काम करने में सक्षम है जो लोगों की नजरों में कठिन माना जाता है। आपको बता दें कि लगभग तीन दशक से नक्सलवाद का दंश झेल रहा छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका अब एक महिला सीआरपीएफ जवान की वजह से शांति की ओर कदम बढ़ा रहा है। 



दरअसल, यहां के नक्सल क्षेत्र में पहली किसी महिला को असिसटेंट कमांडेंट का पदभार दिया गया है। जिस कारण काफी चर्चा हो रही है। बस्तर में सीआरपीएफ की पहली महिला असिस्‍टेंट कंमांडेंट उषा किरण के पदभार संभालने के बाद यहां के जवानों का भी हौसला बढ़ गया है। 



गौरतलब हो कि उषा किरण अपने परिवार से सीआरपीएफ में सेवा देने वाली तीसरी पीढ़ी हैं, इससे पहले उनके दादा और पिता सीआरपीएफ में रह चुके हैं। फिलहाल उनके भाई भी फोर्स में अपनी सेवा दे रहे हैं। तो वहीं उषा किरण मूल रुप से गुड़गांव की रहने वाली हैं। साथ ही वो ट्रिपल जंप में गोल्ड मेडल जीत राष्ट्रीय विजेता भी रह चुकी हैं। 



उषा मिशन ने बताया कि वो 2017 को ध्यान में रखकर बस्तर को नक्सलवादियों से पूरी तरह मुक्त करने के इरादे से आई हैं। उनके हौसले को देख यहां के आदिवासियों और लोगों में आशा की किरण चमक उठी है। तो वहीं उषा किरण ने कहा कि वो खुद बस्तर आना चाहती थी, क्योंकि उन्होंने सुना है कि यहां लोग काफी सीधे साधे है और नक्सल प्रभावित होने की वजह से लोगों का विकास नहीं पाया है, जिससे मुझे आने की प्रेरणा मिली। 



महिला असिस्टेंट कमांडेंट के तौर पदभार संभालने के बाद उन्होंने बताया कि इससे पहले वो 332 महिला बटालिन से जुड़ी थी। साथ ही उन्हें अपनी सेवा के रुप में यहां आना स्वीकार किया है। यहां वो सीआरपीएफ की 80 महिला बटालिन में नियुक्त हुई हैं। 

rajasthanpatrika.com

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