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जयपुर में आकर्षण का केन्द्र बनी साइंस एग्जीबिशन

Patrika news network Posted: 2014-11-08 00:00:00 IST Updated: 2015-01-16 12:12:43 IST
 जयपुर में आकर्षण का केन्द्र बनी साइंस एग्जीबिशन
  • अक्सर कस्टमर और शॉप कीपर के बीच सामान के वजन को लेकर तू तू- मैं मैं होते आपने देखा-सुना होगा।

जयपुर। अक्सर कस्टमर और शॉप कीपर के बीच सामान के वजन को लेकर तू तू- मैं मैं होते आपने देखा-सुना होगा।

ऎसा हो सकता है कि दुकानदार वजन में हेराफेरी करता हो, इसकी पुष्टि करता है साइंस। शिक्षा संकुल में शुक्रवार से शुरू हुए दो दिवसीय \"एजुकेशन शोकेस\" में आईआईटी स्टूडेंट्स ने इसे प्रेक्टिकली करके दिखाया।

आईआईटी स्टूडेंट्स का मानना है कि इस फ्रॉड को आसानी से पकड़ा जा सकता है। कैसे? इस बात को स्टूडेंट्स ने फिजिक्स के \"टॉर्क बैलेंस\" फॉर्मूले के जरिए समझाया।

स्टूडेंट्स के अनुसार, वजन के फ्रॉड के लिए तराजू के किसी एक पलड़े को कुछ आगे खिसकाकर रखा जाता है। देखने में तो यह बराबर लगता है, लेकिन फिजिक्स के फॉर्मूले के तहत यह बराबर स्केल पर नहीं होता।

इसलिए एक जगह वजन ज्यादा हो जाता है और तौलते समय सामान कम होते हुए भी ग्राहक को दोनों पलड़े बराबर दिखाई देते हैं। यह फ्रॉड किसी को समझ नहीं आता। इसी तरह दूसरा फ्रॉड तराजू की प्लेट्स पर भी हो सकता है।

यदि प्लेट्स घिसी हुई हैं, तो उसमें भी वजन कम हो सकता है। आईआईटी दिल्ली, मुंबई और एक्सलआरआई के स्टूडेंट्स की \"सृजन\" टीम की ओर से यह साइंस एग्जीबिशन लगाई गई।

स्टूडेंट्स यहां कई फॉर्मूले साइंस के जरिए समझाने की कोशिश की। विजिट पर आए स्कूल, कॉलेजों के स्टूडेंट्स के बीच एग्जीबिशन में प्रदर्शित प्रोजेक्ट्स चर्चा का विष्ाय रहे।

एग्जीबिशन में मुंबई से आए फ्रीलांस साइंस एक्सपर्ट पुरूषोतम त्रिपाठी का \"मायलर\" ग्लास खूब चर्चा में रहा। इस ग्लास के जरिए सूर्य को देखने पर यह मून की तरह नजर आता है।

ग्यानो टेलीस्कोप और बॉल मिरर सन प्रोजेक्टर भी आकर्षण का केन्द्र बना। सृजन टीम के परमेश, ओपी गोदारा, शरद, विवेेक, रामप्रताप, सौरभ, पुनप्रीüत, कपिल, चित्रांश, सृष्टि, ओजस्वी, वंदता, काम्या, गरिमा, गर्विता, कनिका और ऎश्वर्या हिस्सा ले रहे हैं। एक्स्पो शनिवार तक चलेगी।

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