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RSS प्रमुख ने की PM मोदी की जमकर तारीफ, बोले- मोदी का रास्ता भले टेढ़ा-मेढ़ा, लेकिन लक्ष्य अडिग

Patrika news network Posted: 2017-07-12 17:51:32 IST Updated: 2017-07-12 17:51:32 IST
RSS प्रमुख ने की PM मोदी की जमकर तारीफ, बोले- मोदी का रास्ता भले टेढ़ा-मेढ़ा, लेकिन लक्ष्य अडिग
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि मोदी का रास्ता भले ही टेढ़ा-मेढ़ा हो लेकिन उनका लक्ष्य अडिग है जिसके लिए वह भक्ति भाव से कर्म कर रहे हैं।

नर्इ दिल्ली।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धर्मसत्ता का ध्वजवाहक करार दिया है और कहा है कि मोदी का रास्ता भले ही टेढ़ा-मेढ़ा हो लेकिन उनका लक्ष्य अडिग है जिसके लिए वह भक्ति भाव से कर्म कर रहे हैं। भागवत ने सुलभ इंटरनेशनल के प्रणेता डॉ. बिन्देश्वर पाठक द्वारा मोदी के जीवन चरित्र पर रचित कॉफी टेबल बुक 'नरेन्द्र दामोदरदास मोदी : दि मेकिंग ऑफ लीजेंड' का विमोचन करने के बाद समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष डॉ. बलदेव भाई शर्मा ने की।



भागवत ने कहा कि मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पहले की'अप्रसिद्ध यात्रा' के कारण ही मुख्यमंत्री बनने के बाद की जीवन यात्रा को इतनी प्रसिद्धि मिली है। उन्होंने कहा कि मोदी प्रसिद्धि के प्रकाश में रहकर भी उसके कोई प्रभाव से दूर रह कर देश के हित में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के दो प्रकार के व्यक्तित्व होते हैं -एक दिखने वाला और एक काम करने वाला। मोदी भारत को उससे बेहतर बनाने के लिए जुटे हैं, जैसा वह 1000 या 2000 वर्ष पहले था। उन्होंने 2024 तक का लक्ष्य रखा है लेकिन उनके विचार में इससे ज्य़ादा वक्त लग सकता है क्योंकि बहुत सा काम समाज को खुद करना होगा। उन्होंने कहा कि एक बार वृंदावन के एक संत ने देश के विश्वगुरु बनने के बारे में एक सवाल के जवाब में कहा था कि जब धर्मसत्ता आएगी तभी ऐसा होगा। धर्म के चार आधार हैं -सत्य, करुणा, शुचिता और तप। मोदी के चरित्र को इन गुणों की कसौटी पर देखा जाना चाहिए। उनके कर्मों को भी इसी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।



उन्होंने नेतृत्व के छह गुणों का उल्लेख किया और कहा कि तौर तरीके, क्षमता एवं कौशल तो सीखने से आ जाते हैं लेकिन असली चमक अंदर के गुणों से आती है। सरसंघचालक ने कहा कि ये नेतृत्व के पीछे के नेतृत्व वाले गुण हैं, जिनकी वजह से वह देश की आशा की किरण बने। वह स्वार्थ, भय या मजबूरी में नहीं बल्कि देशभक्ति की भावना से काम कर रहे हैं। उनके मन में देश के प्रति करुणा एवं आत्मीयता है लेकिन मोह नहीं है। वह प्रकृति एवं स्वभाव से ऊपर उठकर काम करने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें अपने लक्ष्य एवं कार्यकर्ताओं पर विश्वास है। उन्होंने कहा कि उनका रास्ता टेढ़ा-मेढ़ा हो सकता है लेकिन लक्ष्य अडिग है और उन्हें नित्य एवं अनित्य का पूरा विवेक है। कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा, अर्जुन राम मेघवाल, विजय सांपला, पुड्डुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी, सांसद सत्यनारायण जटिया, लक्ष्मीकांत यादव, प्रह्लाद पटेल आदि मौजूद थे।



इस मौके पर शाह ने कहा कि मोदी का जीवन चरित्र इस बात का उदाहरण है कि ईश्वर प्रदत्त मेधा और सबको साथ लेकर चलते हुए व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को परे रखकर अपने कर्म के बलबूते दुनिया के शिखर तक कैसे पहुंच सकता है। उन्होंने पुस्तक में अंग्रेजी के शब्द 'लीजेंड' का प्रयोग किए जाने पर असहमति व्यक्त की और कहा कि मोदी इतने सहज हैं कि ऐसे भारी भरकम शब्द उनके व्यक्तित्व से मेल नहीं खाते हैं। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद आठ-दस साल में देश में अजीबोगरीब माहौल बना। कई लोगों को लगा कि बहुदलीय संसदीय प्रणाली विफल हो जाएगी। देश की न कोई दिशा थी और न ही समस्या का निवारण हो रहा था। उसी वक्त मोदी ने गुजरात में दस बहुत बड़ी समस्याओं का निवारण किया, जिनमें गुजरात के गिरते भूजलस्तर को रोकना और नर्मदा का पानी सरस्वती तक ले गए। एक साल में सोलह हजार चेकडैम और 11 हजार तालाब बनवाए। आज गुजरात पूरी तरह से 'डार्क जोन' मुक्त हो चुका है।



शाह ने कहा कि गुजरात में मोदी ने स्वरोजगार एवं कौशल विकास पर जोर दिया और केन्द्र में आने के बाद उसी को आगे बढ़ाया, जिससे सात करोड़ 28 लाख लोगों को लाभ मिला है। गुजरात की कृषि विकास दर दस साल तक 12 प्रतिशत से अधिक रही। इन सब बातों ने देश की विषम परिस्थितियों में हुए 2014 के चुनाव में लोगों के मन में आशा का संचार किया और उन्हें प्रचंड जनादेश का आशीर्वाद मिला।



उन्होंने कहा कि मोदी ने तीन साल के शासन में कृषि विकास और उद्योग विकास, गांव के विकास एवं शहर के विकास तथा जनकल्याण एवं सुधारों के बीच के अंतर्द्वंद्व को दूर किया और विकास कार्य को नई गति एवं दिशा दी। विदेश नीति का अनूठा प्रयोग किया और दुनिया भर के देशों से अच्छे संबंध बनाए, लेकिन अपनी सीमा की सुरक्षा एवं सार्वभौमिकता अक्षुण्ण रखने का संदेश भी दिया। महिलाएं एवं बच्चियों को सम्मान के साथ जीने का मौका मिले, इसके लिये स्वच्छता अभियान चलाया। देश भर में चार करोड़ 38 लाख शौचालय बनवाए। वर्ष 2019 तक पांच करोड़ गरीबों को रसोई गैस कनेक्शन दिये जाने हैं। अगले साल मई तक सभी गांवों में बिजली और सड़क पहुंच जाएगी और हर घर में शौचालय एवं बैंक खाता होगा। इस प्रकार से वह देश को गरीबी के जाल से उबारने में जुटे हैं।



सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक एवं पुस्तक के रचयिता पाठक ने कहा कि अगर शौचालय निर्माण के लिए बैंक ऋण उपलब्ध हो जाए तो 2019 तक पूरे देश को खुले में शौच से मुक्त करने का प्रधानमंत्री का सपना पूरा हो सकता है। वह इस काम के लिए दुनिया के बड़े धनाढ्यों से भी धन लेने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था देश के सभी छह लाख 46 हजार गांवों में एक-एक युवा को शौचालय बनाने का प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराएगी।

rajasthanpatrika.com

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