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अब सिनेमा हॉल में गूंजेगा जन गण मन, फिल्म देखने से पहले आपको मालूम होनी चाहिए ये जरूरी बातें

Patrika news network Posted: 2016-12-01 10:29:16 IST Updated: 2016-12-01 10:33:14 IST
अब सिनेमा हॉल में गूंजेगा जन गण मन, फिल्म देखने से पहले आपको मालूम होनी चाहिए ये जरूरी बातें
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर विराम लगाते हुए सिनेमाघर में राष्ट्रगान के समय सावधान की मुद्रा में खड़े होने को अनिवार्य किया है। भारत सरकार ने भी पिछले साल इस संबंध में नियम बनाया था।

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सिनेमाहाल में फिल्म की शुरुआत से पहले राष्ट्रगान बजने के वक्त सभी दर्शकों को सम्मान में खड़ा होना अनिवार्य किया है। सरकार से यह फैसला 10 दिन में लागू कराने का कहा गया है। साथ ही राष्ट्रगान के किसी भी तरह के कमर्शियल इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। 




हाल ही में 2015 में मद्रास हाईकोर्ट में भी इस मामले पर सुनवाई हुई थी। तब एक वकील ने याचिका में मांग की कि सिनेमा हाल मालिकों को फिल्म दिखाते वक्त राष्ट्रगान बजाने से मना किया जाए। तर्क दिया गया कि इस दौरान कुछ लोग ही खड़े होते हैं और ज्यादातर बैठे रह कर राष्ट्रगान का अपमान करते हैं। 



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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर विराम लगाते हुए सिनेमाघर में राष्ट्रगान के समय सावधान की मुद्रा में खड़े होने को अनिवार्य किया है। भारत सरकार ने भी पिछले साल इस संबंध में नियम बनाया था। राष्ट्रगान के संदर्भ में प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 में नियम बनाए गए हैं। इसमें राष्ट्रगान का अपमान करने पर तीन साल तक की कैद या जुर्माना हो सकता है। 



अब खड़ा होना होगा अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद खड़ा होना अनिवार्य है। केंद्र सरकार ने भी 5 जनवरी, 2015 को अपने आदेश में सावधान की मुद्रा में खड़े होने का नियम बनाया था। साथ ही सरकार ने कहा था कि न्यूजरील, डॉक्यूमेंट्री या फिल्म के बीच में राष्ट्रगान बजने पर दर्शकों से अपेक्षा नहीं की जाती कि वे खड़े हो जाएं, क्योंकि इससे राष्ट्रगान के प्रति सम्मान दिखाने के बजाय फिल्म देखने में बाधा होगी और अव्यवस्था भी फैलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी फिल्म की शुरुआत में खड़े होने का आदेश दिया है। 



बाधा पहुंचाने पर है सजा

1971 के प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट के सेक्शन तीन के मुताबिक, 'जान-बूझ कर किसी को राष्ट्रगान गाने से रोकने या गा रहे समूह को बाधा पहुंचाने पर तीन साल तक कैद की सजा या जुर्माना भरना पड़ सकता है। दोनों सजाएं एक साथ भी दी जा सकती हैं। 



1987 में स्कूल से निकाला

1987 में केरल के एक स्कूल ने राष्ट्रगान न गाने के आरोप में तीन बच्चों को निकाल दिया था। हालांकि, बच्चे राष्ट्रगान के दौरान खड़े थे। उन्होंने गाया नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें वापस लेने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा, कोई सम्मानपूर्वक खड़ा है और गा नहीं रहा तो यह अपमान की श्रेणी में नहीं आता। 



1975 में भी बदला नियम

1975 से पहले, फिल्म के बाद राष्ट्रगान गाने की परंपरा थी। सिनेमाघर में लोग उचित सम्मान न देते थे, इसलिए रोक लगा दी गई। कुछ साल बाद, केरल के सरकारी सिनेमाघरों में फिर यह परंपरा शुरू हुई। फिर महाराष्ट्र में भी फिल्म शुरू होने पहले राष्ट्रगान बजाया जाने लगा। इसके बाद इस बारे में नियम बना।



राष्ट्रगान बजाने के नियम

- नागरिक और सैन्य सेवाओं के कार्यक्रम की संवैधानिक शुरुआत के वक्त।

- राष्ट्रपति, राज्यपाल, लेफ्टिनेंट गवर्नर को सलामी के वक्त।

- परेड के दौरान- चाहे विशिष्ट अतिथि उपस्थित हों या नहीं।

- औपचारिक राज्य कार्यक्रमों और सरकार द्वारा आयोजित अन्य क्रार्यक्रमों में राष्ट्रपति, राज्यपाल, लेफ्टिनेंट गवर्नर के आगमन और कार्यक्रमों से उनकी वापसी पर।

- ऑल इंडिया रेडियो पर राष्ट्रपति के संबोधन से तत्काल पहले और उसके बाद।

- जब राष्ट्रीय ध्वज को परेड में लाया जाए और जब रेजीमेंट के रंग प्रस्तुत किए जाते हैं।

- नौसेना के रंगों को फहराने के लिए व अन्य अवसरों पर जिनके लिए भारत सरकार विशेष आदेश जारी करे।

- सामान्यत: प्रधानमंत्री के लिए नहीं बजाया जाता, विशेष अवसर इसे बजाया जाता है।



राष्ट्रगान का समूह गायन

- राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अवसर पर राष्ट्रगान का समूह गायन अनिवार्य है।

- सांस्कृतिक अवसरों पर या परेड के अलावा अन्य समारोह पूर्ण कार्यक्रमों में। 

- सरकारी कार्यक्रम में राष्ट्रपति के आगमन के अवसर पर। विदा होने के तत्काल पहले।

- राष्ट्रगान को गाने के सभी अवसरों पर सामूहिक गान के साथ इसके पूर्ण संस्करण का उच्चारण किया जाएगा।

- राष्ट्रगान उन अवसरों पर गाया जाए, जो पूरी तरह से समारोह न हों, लेकिन इनका कुछ महत्व हो, जिसमें मंत्रियों आदि की उपस्थिति शामिल है। 

- सामूहिक गान पर तब तक कोई आपत्ति नहीं है जब तक इसे मातृ भूमि को सलामी देते हुए आदर के साथ गाया जाए और इसकी उचित गरिमा बनाए रखी जाए। 

- विद्यालयों में, दिन के कार्यों में राष्ट्रगान को सामूहिक रूप से गा कर आरंभ किया जा सकता है। 



नियम

- राष्ट्रगान गाया या बजाया जाता है तो श्रोताओं को सावधान की मुद्रा में खड़े रहना चाहिए। हालांकि फिल्म के किसी हिस्से या किसी समाचार की गतिविधि या में बजाया जाए तो अपेक्षित नहीं है कि खड़े हों, क्योंकि तब प्रदर्शन में बाधा आएगी और भ्रम पैदा होगा। साथ ही राष्ट्र गान की गरिमा में वृद्धि नहीं होगी। 



- सबसे पुराना राष्ट्रगान ग्रेट ब्रिटेन का 'गॉड सेव दि क्वीन' माना जाता है, जिसे 1825 में राष्ट्रगान के रूप में वर्णित किया गया था। हालांकि जापान का किमिगायो सबसे पुरानी रचना है, जो सातवीं सदी की है। जापानी राष्ट्रगान दुनिया का सबसे छोटा राष्ट्रगान भी है।



- गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर दुनिया के एकमात्र व्यक्ति हैं, जिनकी रचना एक से अधिक देशों में राष्ट्रगान के रूप में अपनाई गई। उनकी एक दूसरी कविता 'आमार सोनार बांग्ला' को बांग्लादेश में राष्ट्रगान का दर्जा हासिल है।



दुनिया के कुछ अनूठे राष्ट्रगान

दक्षिण अफ्रीका का राष्ट्रगान अपने आप में कुछ अलग है। इसमें 5 देशों की 11 भाषाओं का प्रयोग किया गया है। भूतपूर्व सोवियत संघ ने 19वीं सदी के अंत में दो फ्रांसीसी मजदूरों के संगीतबद्ध कम्युनिस्ट इंटरनेशनल की जगह 1944 में गिम्न सोवेतस्कोगो सोयुन को राष्ट्रगान के रूप में अपनाया।



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