Ad Block is Banned Click here to refresh the page

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे

मोदी सरकार की स्वास्थ्य नीति में खुश होने के लिए बहुत कुछ, जानें किसको- क्या मिलने जा रहा फ़ायदा?

Patrika news network Posted: 2017-03-16 18:29:18 IST Updated: 2017-03-16 18:29:18 IST
मोदी सरकार की स्वास्थ्य नीति में खुश होने के लिए बहुत कुछ, जानें किसको- क्या मिलने जा रहा फ़ायदा?
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति को मंत्रिमंडल ने बुधवार को ही मंजूरी दी थी। इस नीति को अंतिम रूप देने से पहले लोगों से सुझाव मांगे गए थे । मंत्रालय को इस बारे में पांच हजार सलाह मिली थी।

नई दिल्ली।

सरकार ने सकल घरेलू उत्पाद में स्वास्थ्य सेवा की हिस्सेदारी ढाई प्रतिशत तक करने वाली नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति की घोषणा करते हुए गुरुवार को कहा कि इसमें गरीबों को मुफ्त इलाज और परीक्षण की सेवा प्रदान करने के अलावा कुष्ठ रोग और क्षयरोग जैसी प्रचलित महामारियों का चरण बद्ध ढंग से उन्मूलन किया जाएगा। 


स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने संसद के दोनों सदनों में नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति की पेश करते हुए कहा कि इसके बाद भारत की स्वास्थ्य नीति 'रोगों के इलाज से स्वास्थ्य जीवन की ओर' परिवर्तित हो रही है। उन्होंने कहा कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य जीवन प्रत्याशा मौजूदा 67.5 वर्ष से बढकर वर्ष 2025 तक 75 वर्ष करने, वर्ष 2020 तक एचआईवी का निराकरण, वर्ष 2018 तक कुष्ठ रोग , वर्ष 2017 तक कालाजार और वर्ष 2017 तक लिम्फेटिक फिलारिएसिस का उन्मूलन करना भी शामिल किया गया है। 


नीति में वर्ष 2030 तक क्षयरोग उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है। नई नीति से देश के सभी नागरिकों खासतौर से समाज के वंचित तबकों के लिए गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य व्यय को समयबद्ध ढंग से सकल घरेलू उत्पाद के 2.5 प्रतिशत तक लाने का प्रस्ताव है। इसके लिए निजी सरकारी भागीदारी पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 15 साल के अंतराल के बाद आई यह नीति सामाजिक,आर्थिक,प्रौद्योगिकीय और महामारियों के बदलते मौजूदा परिदृश्य की चुनौतियों से कारगर तरीके से निबटने को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।


READ: मोदी सरकार ने देश को दिया सेहत का तोहफा, सस्ती दरों पर मिलेंगी अब ये सुविधाएं



नड्डा ने कहा कि नीति का मूल लक्ष्य समाज के सभी वर्गों के लिए स्वास्थ्य और कल्याण का उच्चतम संभव स्तर प्राप्त करना और किसी भी प्रकार की वित्तीय कठिनाई के बिना गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं प्रदान करना है। इसके जरिए विक्लांगता समायोजित आयु वर्ष (डीएएलवाई) सूचकांक की नियमित निगरानी करना, वर्ष 2025 तक राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर टीएफआर को घटाकर एक तक लाना, वर्ष 2025 तक पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में मृत्यु दर को कम करके 23 करना और एमएमआर के वर्तमान स्तर को 2020 तक घटाकर 100 करना, नवजात शिशु मृत्यु दर को घटाकर 16 करना तथा मृत जन्म लेने वाले बच्चों की दर को 2025 तक घटाकर 'एक अंक' में लाना जैसी महत्वपूर्ण बातें शामिल हैं। 


READ: गुजरात की तर्ज़ पर राजस्थान में भी कार-छोटे वाहन हो सकते हैं टोल फ्री



सरकार ने नई नीति में 2025 तक दृष्टिहीनता के मामलों को घटाकर प्रति हजार-पच्चीस करने तथा ऐसे रोगियों की संख्या को वर्तमान स्तर से घटाकर एक-तिहाई करने का लक्ष्य भी रखा है। इसके अलावा ह्दय रोग, कैंसर, मधुमेह या सांस के पुराने रोगों से होने वाली अकाल मृत्यु को 2025 तक घटाकर 25त्नफीसदी पर ले आना भी सुनिश्चित किया गया है। 


नीति में गैर-संचारी रोगों की उभरती चुनौतियों से निपटने पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया गया है ताकि ऐसे रोगों की रोकथाम और इससे होने वाली मृत्यु दर में कमी लाई जा सकेगी। इसमें आयुष प्रणाली के त्रि-आयामी एकीकरण की परिकल्पना भी की गई है जिसमें क्रॉस रेफरल, सह-स्थल और औषधियों की एकीकृत पद्धतियां शामिल हैं। इन पद्धतियों में प्रभावी रोकथाम तथा चिकित्सा की व्यापक क्षमता है, जो सुरक्षित और किफायती है। 


वहीं योग को स्कूलों और कार्यस्थलों में और अधिक व्यापक ढंग से लागू करने की तैयारी भी की गई है। नड्डा ने कहा कि कुल मिलाकर नई स्वास्थ्य नीति का प्रमुख लक्ष्य वंचितों औ गरीबों के साथ ही देश के सभी वर्गों को सस्ती दरों पर गुणवत्ता युवक्त सेवाएं प्रदान करना है। यह नीति स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पेशेवर लोगों द्वारा तैयार की गई है। 


इसमें देश के स्वास्थ्य परिवेश में सुधार के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का समाधान करने तथा औषधियों और उपकरणों के लिए मेक इन इंडिया को लागू करने की परिकल्पना की गई है। उन्होंने कहा कि नीतिगत लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश,स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के बेहतर प्रबंधन और वित्त पोषण , मानव संसाधन का विकास , तय मानकों का अनुपालन तथा स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने में केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय पर खास जोर दिया गया है। 


उन्होंने कहा कि इस नीति को अंतिम रूप देने से पहले लोगों से सुझाव मांगे गए थे । मंत्रालय को इस बारे में पांच हजार सलाह मिली थी। इन सभी सुझावों पर विचार करके आवश्यक बिंदुओं को नीति में शामिल किया गया है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में बुनियादी स्तर पर बदलाव लाया जा सके। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति को मंत्रिमंडल ने बुधवार को ही मंजूरी दी थी।

rajasthanpatrika.com

Bollywood