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शिवराज ने तोड़ा उपवास, कहा-'शैतानियत' और 'हैवानियत' फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा

Patrika news network Posted: 2017-06-11 15:43:29 IST Updated: 2017-06-11 15:43:29 IST
शिवराज ने तोड़ा उपवास, कहा-'शैतानियत' और 'हैवानियत' फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा
  • मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन के दौरान फैली हिंसा के बाद शांति बहाली की अपील को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का शनिवार को से यहां जारी अनिश्चिकातीन उपवास रविवार को समाप्त हो गया।

भोपाल।

 मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन के दौरान फैली हिंसा के बाद शांति बहाली की अपील को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का शनिवार को से यहां जारी अनिश्चिकातीन उपवास रविवार को समाप्त हो गया। बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश जोशी और कई बुजुर्ग किसानों ने मुख्यमंत्री को उपवास के मंच पर नारियल पानी पिलाकर उनका उपवास तुड़वाया। 


उपवास समाप्त होने के पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश की जनता से अपील की कि जनता प्रदेश में अराजकता फैलाने वाले तत्वों को अलग-थलग करे और प्रदेश को एक बार फिर शांति का टापू बनाने में मदद करें। उन्होंने कहा कि हिंसा के दौरान निर्दोषों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन 'शैतानियत' और 'हैवानियत' फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदसौर जिले में हिंसा में मरने वाले लोगों के परिजन ने भी उनसे मुलाकात करते हुए उनसे उपवास तोडऩे की अपील की। 


उन्होंने वहां मौजूद जनता से पूछा कि प्रदेश में दो दिन से हिंसा की कहीं से कोई खबर नहीं आई है, क्या उन्हें उपवास तोड़ देना चाहिए, जिस पर सभी ने एकसुर में हां में जवाब दिया। वहीं किसानों की समस्याओं के समाधान के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए उन्होंने प्रदेश में दूध खरीदी के लिए अमूल फार्मूला लागू करने, कृषि उत्पाद लागत एवं विपणन आयोग बनाने, एक हजार करोड़ रुपए का मूल्य स्थिरीकरण कोष स्थापित करने और स्वामीनाथन आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर स्टेट लैंड यूज एडवाइजरी सर्विस बनाने की भी घोषणा की। 


शिवराज सिंह ने कहा कि उन्होंने प्रदेश में कृषि क्षेत्र और कृषकों के लिए स्वामीनाथन आयोग की अनुशंसाओं से कहीं आगे बढ़ कर काम किया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने स्वामीनाथन आयोग की कई अनुशंसाओं का हवाला देते हुए उनके आधार पर बताया कि प्रदेश में किस अनुशंसा के तहत क्या काम किया गया है। 


उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन आयोग ने जल की उपलब्धता की बात कही थी, मध्यप्रदेश में 40 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई होती है। उन्होंने आंदोलन से सर्वाधिक प्रभावित मालवा और निमाड़ क्षेत्र के किसानों को विशेष तौर पर संबोधित करते हुए कहा कि नर्मदा जल अंतिम क्षेत्र तक पहुंचना सुनिश्चित किया गया है। इस दौरान उन्होंने कई जिलों और संभागों का नाम लेते हुए वहां पानी पहुंचाने की बात कही। 


मुख्यमंत्री ने किसानों के बच्चों को रोजगार देने और उनकी शिक्षा व्यवस्था के लिए चलाई जा रहीं योजनाओं का भी जिक्र किया। श्री चौहान ने स्वामीनाथन आयोग की अनुशंसा के मुताबिक स्टेट लैंड यूज एडवाइजरी सर्विस बनाने की घोषणा की, जो किसानों को मौसम के हिसाब से पहले से सलाह देगा। 


इसके अलावा उन्होंने फसलों की वैज्ञानिक तौर पर लागत और उस पर लाभकारी दाम सुनिश्चित करने के लिए कृषि उत्पाद लागत एवं विपणन आयोग बनाने, किसानों को आधुनिक जानकारी देने के लिए ज्ञान चौपालों की व्यवस्था करने और बिचौलियों को कम करने के लिए किसान बाजार बनाने की भी घोषणा की। 


उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जो न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करेगी, उसका पालन सुनिश्चित करते हुए उसके नीचे के दाम में खरीदने को अपराध माना जाएगा। उपवास स्थल पर मौजूद लोगों की नारेबाजी के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बाद भी जिनकी जो जरुरतें हुईं, वे सब चर्चा के बाद सुलझाई जाएंगी। उन्होंने उपवास समाप्ति के पहले किसान संगठनों के वहां मौजूद प्रतिनिधियों का भी आभार व्यक्त किया। 


मुख्यमंत्री के साथ उपवास पर बैठीं उनकी पत्नी साधना सिंह चौहान ने भी उनके बाद अपना उपवास समाप्त किया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद प्रभात झा भी मौजूद थे।

rajasthanpatrika.com

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