चुनाव लड़ने पर अब इन लोगों पर हो जाएगी आजीवन पाबंदी, चुनाव आयोग उठा रहा ये बड़ा कदम

Patrika news network Posted: 2017-03-21 09:27:33 IST Updated: 2017-03-21 09:27:56 IST
चुनाव लड़ने पर अब इन लोगों पर हो जाएगी आजीवन पाबंदी, चुनाव आयोग उठा रहा ये बड़ा कदम
  • इस वर्ष पांच राज्यों में चुनकर आए कुल 689 विधायकों में से 28 फीसदी पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 16 मामले मऊ सीट से बसपा विधायक मुख्तार अंसारी पर दर्ज हैं।

नई दिल्ली।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि उन सांसदों और विधायकों को जिन्हें दो या दो से अधिक साल की सजा दी गई है उसका चुनाव लडऩे पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाए। 


सजायाफ्ता सांसदों और विधायकों को आजीवन चुनाव लडऩे पर रोक लगाने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग ने कहा कि वो याचिकाकर्ता की सभी बातों से सहमत हैं। 


चुनाव आयोग ने कहा है कि उसने चुनावों में अपराधियों को रोकने के लिए कानून मंत्रालय को प्रस्ताव भेजे हैं लेकिन वो अभी लंबित है। इसी मसले पर अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने याचिका दायर कर मांग की है कि एक साल के अंदर विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका से जुड़े लोगों के खिलाफ आपराधिक मामलों का निपटारा हो और एक बार दोषी होने पर उन पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाए। 


उन्होंने मांग की है कि ऐसे लोगों को चुनाव लडऩे, राजनीतिक दल का गठन करने और पदाधिकारी बनने पर रोक लगाई जाए। याचिका में ये भी मांग की गई है कि चुनाव आयोग, विधि आयोग और नेशनल कमीशन टू रिव्यू द वर्किंग ऑफ द कांस्टीट्यूशन की ओर से सुझाए गए महत्वपूर्ण चुनाव सुधारों को लागू करवाने का निर्देश केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को दिया जाए। याचिका में ये भी मांग की गई है कि विधायिका की सदस्यता के लिए न्यूनतम योग्यता और अधिकतम आयु सीमा तय की जाए।


इस वर्ष पांच राज्यों में चुनकर आए कुल 689 विधायकों में से 28 फीसदी पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 16 मामले मऊ सीट से बसपा विधायक मुख्तार अंसारी पर दर्ज हैं। उन पर 24 धाराओं में केस दर्ज किए गए हैं। वहीं दूसरे नंबर भदोही से चुने गए विजय कुमार हैं। उनपर 22 धाराओं के तहत 16 मामले दर्ज हैं। 


इसी तरह से हापुड़ की ढोलाना सीट से बसपा विधायक असलम अली पर 20 धाराओं में 10 मामले दर्ज हैं। जीत दर्ज करने वाले उत्तर प्रदेश के 143 यानी 36 प्रतिशत विधायकों के खिलाफ आपराधिक माममले हैं। पंजाब में 16 यानी 14 प्रतिशत विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। वहीं, उत्तराखंड के 22 यानी 31 प्रतिशत विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। 


पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में सबसे कम 2 यानी मात्र 3 प्रतिशत विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज है। अगर बात गोवा की की जाए तो गोवा में 09 यानी 23 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज है।

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