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टोल प्लाज़ा पर सेना की तैनाती पर ममता के तीखे तेवर, निशाने पर देश के पीएम

Patrika news network Posted: 2016-12-02 11:48:41 IST Updated: 2016-12-02 17:25:02 IST
  • नोटबंदी से ममता बिफरी हुई हैं, और उन्होंने यह कसम भी खाई है कि अपनी पूरी ज़िन्दगी वह मोदी को "सियासी तौर पर बर्बाद" करने में लगा देंगी।

नई दिल्ली।

नोटबंदी पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का खुलकर विरोध करने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र पर बंगाल में आपातकाल जैसे हालात पैदा करने के आरोप लगाए हैं। मामला तब तूल पकड़ा जब सेना की कई बख्तरबंद गाड़ियां और ट्रकों ने हुगली नदी के किनारे अपना डेरा जमा लिया। ममता ने सचिवालय नाबन्ना के पास बने टोल प्लाजा के पास सैनिकों की मौजूदगी को मुद्दा बनाया और विरोधस्वरूप रात भर अपने दफ्तर में ही बनी रही। 


ममता ने अपने ट्वीट में सेना की मौजूदगी को दुर्भावनापूर्ण बताया। 


सेना ने कहा, नियमित अभ्यास है 

आम तौर पर सेना की तैनाती को सियासी मुद्दा नहीं बनाया जाता है लेकिन ममता ने इसे बंगाल की संप्रभुता पर हमला मान इसे बड़ा मुद्दा बना लिया। सेना के पूर्वी कमान की तरफ से भी कई ट्वीट किए गए और इसे सभी उत्तर पूर्व की राज्यों में चल रहे सुरक्षा अभ्यास का हिस्सा बताया। 


सेना का ट्वीट



सेना ने हवाला दिया कि पूरे उत्तर पूर्व में इस समय कई जगह पर अभ्यास चल रहे हैं। कम से कम 18 जगहों पर असम में, पश्चिम बंगाल में 19 अलग अलग जगहों पर, मणिपुर में 6 जगहों पर और मेघालय और त्रिपुरा में 5 जगहों पर इस तरह के अभ्यास चल रहे हैं। आम तौर पर इस तरह के अभ्यास के लिए सेना राज्य सरकारों से किसी भी तरह की अनुमति नहीं लेती है।  



ममता ने पूर्वी कमान पर लोगों को गुमराह करने वाले तथ्य परोसने के भी आरोप लगाए। इससे पहले गुरुवार को टीएमसी ने ममता बनर्जी के हवाई जहाज़ को कोलकाता में लैंड नहीं करने देने को लेकर हंगामा किया था। उनके सांसदों ने कहा था कि ममता के प्लेन में उस वक़्त फ्यूल कम था और जानबूझकर उनके जहाज़ को हवा में घुमाया जा रहा था। 


आज भी भी सेना की तैनाती के मुद्दे पर ममता के सांसदों द्वारा संसद के अन्दर विरोध किया जाएगा। मुद्दाविहीन विपक्ष के पास यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है और नोटबंदी को लेकर बहस पर से भी ध्यान हटेगा। 


निगाहें कहीं, निशाना कहीं

गौरतलब है, नोटबंदी को लेकर सबसे पहले ट्वीट करने वाली ममता बनर्जी ही थी। उस ट्वीट को रीट्वीट किया था, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने। नोटबंदी से ममता बिफरी हुई हैं, और उन्होंने यह कसम भी खाई है कि अपनी पूरी ज़िन्दगी वह मोदी को "सियासी तौर पर बर्बाद" करने में लगा देंगी। 


इस वक़्त कांग्रेस एक सियासी विकल्प के तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ रही है। राजनीतिक शून्य में भरने के लिए ममता दीदी के लिए अच्छा मौका भी है।  



नोटबंदी के मुद्दे पर मुलायम और नीतीश ने मोदी का खुलकर विरोध नहीं किया। ममता चाहेंगी कि खुद को मोदी के खिलाफ एक कद्दावर विकल्प के तौर पर खड़ा किया जाए। 

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