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ये है फास्ट फूड पैकेजिंग का खतरनाक सच

Patrika news network Posted: 2017-04-19 14:23:05 IST Updated: 2017-04-19 14:23:21 IST
ये है फास्ट फूड पैकेजिंग का खतरनाक सच
  • अमरीका के साइलंट स्प्रिंग इंस्टीट्यूट में हुए शोध के अनुसार फास्ट फूड पैक करने के लिए प्रयोग होने वाले पेपर, रैपर्स, पेस्ट्री बैग्स, कंटेनर आदि में फ्लोरीन की मात्रा ज्यादा होती है जो व्यक्ति को रोगी बनाते हैं।

जयपुर

अमरीका के साइलंट स्प्रिंग इंस्टीट्यूट में हुए शोध के अनुसार फास्ट फूड पैक करने के लिए प्रयोग होने वाले पेपर, रैपर्स, पेस्ट्री बैग्स, कंटेनर आदि में फ्लोरीन की मात्रा ज्यादा होती है जो व्यक्ति को रोगी बनाते हैं। 


अक्सर विशेषज्ञ सेहतमंद रहने के लिए मार्केट में मिलने वाले फ्रेंच फ्राइज, बर्गर, पिज्जा जैसे फास्ट फूड को खाने से मना करते हैं लेकिन घर बैठे इन्हें ऑर्डर करने पर दोगुना नुकसान पहुंचता है।  


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विभिन्न तरीके से प्रयोग

फ्लोरिनेटेड कैमिकल्स जिन्हें पीएफएएस या पीएफसी के तौर पर जानते हैं, सेहत के लिए हानिकारक हैं। इन्हें दाग-धब्बे मिटाने, नॉन स्टिक बर्तनों, फर्नीचर, कारपेट, कपड़ों व ब्यूटी प्रोडक्ट को बनाने में प्रयोग करते हैं। नॉट्रे डेम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार सैंडविच व बर्गर रैपर में 38 फीसदी, मिठाई व ब्रेड के रैपर में 56 फीसदी, खाना पैक करने वाला पेपर में 46 फीसदी, पेपरबोर्ड में 20 फीसदी और जूस, दूध आदि पेय पदार्थ में 16 फीसदी फ्लोराइन होता है।


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सेहत को नुकसान

फ्लोरिनेटेड कैमिकल्स की अधिक मात्रा किडनी व टैस्टीकुलर कैंसर के साथ कोलेस्ट्रॅाल बढ़ाती है। थायरॉइड व अन्य हार्मोन में गड़बड़ी से बच्चों के शारीरिक विकास पर असर होता है। गर्भावस्था के दौरान के रक्त में पीएफएएस की मात्रा ज्यादा होने से गर्भपात की आशंका बढ़ती है। 


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बचाव: कोशिश करें कि भोजन ताजा ही खाएं। फ्लोराइनरहित पैकेजिंग जैसे पेपर कप या बैग में  मिठाई या फ्रेंच फ्राइज लें।

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